तेलंगाना के मंत्री बोले- थर्ड फ्रंट की कोशिशें होंगी तेज, 2019 में नहीं करेंगे BJP को सपोर्ट

CNN NEWS18 की पत्रकार मारिया शकील से एक्सक्लूसिव बातचीत में केटी रामाराव ने कहा कि तेलंगाना राष्ट्र समिति को जीत दर्ज करने के लिए किसी भी तरह के गठबंधन की जरूरत नहीं है.

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Updated: November 9, 2018, 6:48 PM IST
तेलंगाना के मंत्री बोले- थर्ड फ्रंट की कोशिशें होंगी तेज, 2019 में नहीं करेंगे BJP को सपोर्ट
केटी रामा राव की फाइल फोटो
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Updated: November 9, 2018, 6:48 PM IST
तेलंगाना सरकार में आई टी मिनिस्टर केटी रामाराव ने कहा है आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी दो तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में आएगी. CNN NEWS18 की पत्रकार मारिया शकील से एक्सक्लूसिव बातचीत में केटी रामाराव ने कहा कि तेलंगाना राष्ट्र समिति को जीत दर्ज करने के लिए किसी भी तरह के गठबंधन की जरूरत नहीं है. उन्होंने दावा किया कि तेलंगाना की जनता टीआरएस को आगामी चुनावों में स्पष्ट बहुमत देगी.

यहां पढ़ें मारिया शकील से केटी रामाराव की बातचीत के अंश -

राज्य बनने के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव है. अधिकतर सर्वे यह दिखा रहे हैं कि आपके पिता (मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव) को फायदा हो रहा है. क्या पहले चुनाव कराना फायदेमंद दिख रहा है या फिर जमीन पर काम दिख रहा है?

- अगर हम देखें कि बीते चार साल में तेलंगाना में क्या हुआ है तो यह पाएंगे कि मिनी विधानसभा चुनाव माने जाने वाले ग्रेटर हैदराबाद म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन में हमने संतोषजनक जीत दर्ज की. साल 2018 में होने वाला चुनाव हमारे लिए कुछ अलग नहीं है. हम स्पष्ट रूप से आगे बढ़ रहे हैं. बीते दो महीने में सात सर्वे आए हैं और सभी में टीआरएस को दो तिहाई बहुमत दिखाया गया है. हम वाकई आत्मविश्वास से भरे हुए हैं.

आप जानते हैं कि कांग्रेस, टीडीपी, सीपीआई, तेलंगाना जन समिति के गठबंध से एक महाकुटमी नाम का गठबंधन बना है जो टीआरएस के खिलाफ है. आप अकेले चुनाव लड़ रहे हैं. क्या आप इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि गठबंधन के खिलाफ अकेले चुनाव लड़ने की रणनीति कारगर साबित होगी?

- साल 2014 में हमने जब चुनाव जीता था तो स्पष्ट बहुमत मिला था. इस बार भी कुछ अलग नहीं होगा. पिछली बार भी कांग्रेस का सीपीआई समेत अन्य दलों से गठबंधन था. इस बार तेलुगू देश पार्टी भी शामिल है. इस गठबंधन का कोई आधार नहीं है, जिस पर यह टिक सके. मैं या तेलंगाना की जनता इस गठबंधन को गंभीरता से नहीं ले रही है. कांग्रेस ने गठबंधन का सहारा लेकर अपने पैर में कुल्हाड़ी मार ली.

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हम यह भी देख रहे हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर भी गठबंधन बन रहा है. चंद्रबाबू नायडू (आंध्र प्रदेश के सीएम) एमके स्टालिन से मुलाकात कर रहे हैं. मार्च में आपके पिता ने एक गठबंधन की बात कही थी जिसमें गैर कांग्रेस और गैर बीजेपी दलों को एकजुट करने का आह्वान किया था. उस समय नायडू और ममता बनर्जी (पश्चिम बंगाल की सीएम) ने स्वीकार्यता दी थी. मार्च में जिसकी बात की गई थी, उस थर्ड फ्रंट या फेडरल फ्रंट की क्या स्थिति है?

-हमारा पक्ष एकदम स्पष्ट है कि तथाकथित राष्ट्रीय दल कांग्रेस और बीजेपी ने हमारे देश को नष्ट किया है. आजादी के 71 साल बाद भी तमाम मुद्दे ऐसे हैं जिन पर काम किया जाना चाहिए. हम चाहते हैं कि राज्यों को अधिक अधिकार दिए जाएं, ताकि संघीय ढांचा और मजबूत हो सके.अब नायडू और अन्य पार्टियों के नेता क्या कर रहे हैं, वह हमारी चिंता नहीं है. हमें उम्मीद है कि दिसंबर में होने वाले चुनाव हम जीतेंगे और फिर 11 दिसंबर के बाद इस मुद्दे पर आगे बढ़ेंगे.

तो आप यह कह रहे हैं कि दिसंबर में एक बार फिर फेडरल फ्रंट बनाने की कोशिश होगी?

- बेशक. हमारे नेता और सीएम इस बात पर स्पष्ट हैं कि दोनों राष्ट्रीय दलों ने देश को नष्ट किया है और देश में राज्यों की ओर से मजबूत नेतृत्व की जरूरत है.

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आपके साथ कौन खड़ा होगा? शरद पवार, नायडू, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव एक गठबंधन में जा रहे हैं जो आकार ले रहा है. कौन आपके फेडरल फ्रंट का हिस्सा होगा?

-एक मत वाले दलों का फेडरल फ्रंट बनेगा. हम फिलहाल राज्य के चुनाव पर फोकस कर रहे हैं. राष्ट्रीय चुनावों के लिए अभी लंबा है. जनवरी और फरवरी में आप बहुत कुछ होता हुआ देखेंगे.

लेकिन ऐसा नहीं लगता है कि चंद्रबाबू नायडू राज्य चुनावों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. आपको क्यों लगता है कि वह राज्य में कांग्रेस पार्टी की मदद से आपके खिलाफ खड़े हैं.

- चंद्रबाबू नायडू की पार्टी तेलंगाना में विलुप्त होने का खतरा है. इसलिए वह खुद को जोर देने और इस गठबंधन के माध्यम से तेलंगाना में सीट या 2 बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं. उनकी पार्टी यहां खत्म हो जाएगी.

ऐसी अटकलें लगाई जा रही है कि जब विधानसभा भंग कर रहे थे तो उन्होंने बीजेपी को लूप पर रखा था. तो क्या केसीआर साल 2019 से पहले बीजेपी या एनडीए का हिस्सा बन सकते हैं.

हम एक स्वतंत्र पार्टी हैं, हम यूपीए का हिस्सा नहीं हैं, एनडीए का हिस्सा नहीं है. वास्तव में आप 11 दिसंबर के बाद एनडीए और यूपीए के समकक्ष एक व्यवहार्य विकल्प लाने के हमारे प्रयास देखेंगे.

क्या तेलंगाना की जनता को आश्वस्त कर सकते हैं कि आप साल 2019 के पहले बीजेपो को सपोर्ट नहीं करेंगे?

हमारे साथ आने का कोई सवाल ही नहीं उठता. देश और अपने राज्य के लिए हमारी सोच बीजेपी से अलग है. हमारे साथ करने की कोई दशा नहीं है. मैं आपको यह बता सकता हूं कि निश्चित तौर पर हम अगला चुनाव जीतने जा रहे हैं. इसके साथ ही हम राज्य में 15 लोकसभा सीटें भी जीतेंगे.

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