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Exclusive: राम मंदिर से लेकर विधानसभा चुनावों तक, हर सवाल का गृह मंत्री अमित शाह ने दिया जवाब, यहां पढ़िए पूरा इंटरव्यू

News18Hindi
Updated: October 18, 2019, 6:16 AM IST
Exclusive: राम मंदिर से लेकर विधानसभा चुनावों तक, हर सवाल का गृह मंत्री अमित शाह ने दिया जवाब, यहां पढ़िए पूरा इंटरव्यू
गृह मंत्री अमित शाह ने कई मुद्दों पर सवालों के जवाब दिए.

गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने News18 Network Group Editor-in-Chief राहुल जोशी के सवालों का जवाब दिया. इस दौरान शाह ने अनुच्छेद 370 से लेकर आर्थिक सुस्ती तक पर बात की.

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  • Last Updated: October 18, 2019, 6:16 AM IST
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अमित भाई, नेटवर्क 18 को इंटरव्यू देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद, गृहमंत्री बनने के बाद यह नेटवर्क 18 के साथ आपका पहला इंटरव्यू है, आपको इसकी बहुत-बहुत बधाई आप 305 सीट जीतकर सत्ता में वापस आए.

मेरा पहला सवाल यह कि हम पहला इंटरव्यू 6 कृष्णा मेनन मार्ग पर कर रहे हैं. यहां पर अटल बिहारी वाजपेयी जी रहा करते थे, 1996 में आपने उनका इलेक्शन कैंपेन संभाला था. जब आप यहां पहली बार आए तो आपके मन में क्या विचार था?

-कई बार घर के अंदर आना हुआ जब अटल जी यहां रहा करते थे. हर अच्छे मौके उनका आशीर्वाद लेने के लिए भारतीय जनता पार्ट के सभी नेता आते थे, मैं भी आता था तो बहुत सारी स्मृतियां पार्टी की इस घर के साथ भी जुड़ीं हैं और बहुत अच्छा महसूस हुआ जब ये घर मुझे अलॉट हुआ.

अमित भाई, आप एक मामूली कार्यकर्ता थे भारतीय जनता पार्टी के. वहां से आप भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष बने, आज आप देश में गृहमंत्री हैं. सभी लोग कहते हैं भारतीय जनता पार्टी में आप सेकेंड मोस्ट पावरफुल लीडर हैं देश के, आप अपने इस सफर को किस तरह देखते हैं?

-देखिए मैं मानता हूं ये भारतीय जनता पार्टी की ही विशेषता है, कार्यपद्धति की विशेषता है. अगर आप में लगन है, मेहनत करने की क्षमता है, एक निष्ठा है, तो पार्टी आपको धीरे-धीरे बड़ा बनाती जाती है, हर व्यक्ति के जीवन में अच्छे बुरे समय भी आते हैं, मगर पार्टी के प्रति निष्ठा रखकर आपने पार्टी पर भरोसा किया है तो मैं मानता हूं भारतीय जनता पार्टी में कभी भी निराशा प्राप्त नहीं होगी, और मेरे जैसे कई कार्यकर्ता छोटे से कार्यकर्ता से बड़े-बड़े नेता बने, बहुत नेता बहुत नीचे से करियर शुरू किए तो पार्टी की कार्यपद्धति ही छोटे से कार्यकर्ता को बहुत बड़ा नेता बनाती है, बहुत बड़े पद पर बैठाती है, और पार्टी ही आगे ले जाती है.

ये सवाल तो हम मीडिया में आपसे बहुत बार पूछ चुके थे आप मंत्रिमंडल में आएंगे या नहीं और आपको कौन सा मंत्री पद मिलेगा? एक सवाल मेरे दिमाग में है जो मैं पूछना चाह रहा था. मंत्रिमंडल की घोषणा से दो दिन पहले सब लोग कह रहे थे कि आप फाइनेंस मिनिस्टर बनने जा रहे हैं. यहां तक कि दो चार चैनल ने ये स्टोरी ब्रेक भी कर दी और उसको काफी चलाया. यह कैसे हुआ इसमें कुछ सत्य था कि नहीं, आपको गृह मंत्रालय कैसे मिला? 

-आप लोगों को भारतीय जनता पार्टी के बारे में और विशेषकर जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं, तब इस तरह के आकलन नहीं लगाने चाहिए. हमारी संविधान की व्यवस्था है कि मंत्रिमंडल का चयन और मंत्रियों के चयन के बाद विभाग का बंटवारा प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है जो संविधान ने उनको दिया है. मैं मानता हूं कि इस पर बहुत ज्यादा सोचना या आकलन करना निरर्थक होता है. नरेंद्र भाई ने बहुत सालों तक संगठन का काम किया है. मोदी जी ने पूरे देश का काम देखा, गुजरात का काम देखा, ढेर सारे कार्यकर्ताओं को अच्छे से जानते हैं. अपने अनुभव और कार्यकर्ताओं की क्षमताओं के आधार पर फैसला करते हैं. हम सबका दायित्व है कि वह जो फैसला करें उसको सफल बनाएं.
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तो फाइनेंस मिनिस्टर की बात कभी थी ही नहीं...

– मीडिया में ही थी.

अमित भाई, आप गृह मंत्री के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष भी हैं. आप एक ऐसे अध्यक्ष रहे हैं, जिसने पार्टी को 5 साल में पार्टी को बहुत टर्न अराउंड किया है. जब मैं प्रधानमंत्री का इंटरव्यू कर रहा था तो उन्होंने कहा कि इसका पूरा श्रेय अमित भाई को जाता है, उन्होंने जिस तरीके से पार्टी को चलाया है. आज इस मोड़ पर कुछ महीनों में आप जो हैं इस पद से किसी दूसरे की नियुक्ति करेंगे या फिर आप पार्टी में ऐसे ही इंवॉल्व रहेंगे?

-देखिए जहां तक भारतीय जनता पार्टी का सवाल है, नए अध्यक्ष जी मुझे जो काम देंगे, वो मैं जरूर करूंगा. परंतु जिम्मेदारी के अलावा कार्यकर्ता के तौर पर भी मेरी जिम्मेदारी है. पार्टी सफल हो, पार्टी के लिए मैं मेरी पूरी शक्तियों को, मेरी पूरी ऊर्जा को अध्यक्ष जी को सफल करने के लिए लगा दूंगा.



जैसे कुछ राज्य हैं, ईस्ट हो गया साउथ हो गया... यहां पर भारतीय जनता पार्टी को वैसी सफलता नहीं मिली है. क्या आपकी नजर साउथ और ईस्ट पर बनी रहेगी?

-ईस्ट और साउथ लगभग-लगभग दो अलग-अलग प्रकार के स्टेट हैं इसमें हमने लोकसभा चुनाव में चुनावी सफलता हासिल की. बंगाल के अंदर 18 सीट, नॉर्थ ईस्ट पूरा स्वीप कर गए हैं, असम पूरा स्वीप किया है, उड़ीसा के अंदर 8 सीट... यह कोई कम नहीं है. लगभग-लगभग हॉफ वे मार्क के नजदीक हैं, साउथ के अंदर अभी हमें अच्छी सफलता मिलना बाकी है. विशिष्ट प्रकार की राजनीतिक परिस्थिति के कारण जितनी हमारी चुनाव में अपेक्षा थी, उतनी नहीं मिली. तेलंगाना में हमने अच्छा परफॉर्म किया है, परंतु केरल, तमिलनाडु, आंध्र के अंदर हमारा परफॉर्मेंस अच्छा नहीं रहा. कर्नाटक के अंदर हमारा परफॉर्मेंस बहुत अच्छा रहा है, साउथ में भी तेलंगाना और कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी को ठीक-ठीक सफलता हासिल हुई है. मुझे लगता है कि अगले पांच साल के अंदर जो राज्य छूटे हैं, वहां पर भी भारतीय जनता पार्टी अपने आप को मजबूत करेगी.

वेस्ट बंगाल में चुनाव आने वाले हैं एक डेढ़ साल के बाद. वहां पर कैसे देखते हैं अपनी स्थिति आज. आपको क्या लगता है इस चुनाव में क्या होगा? आप किस तरह का प्रेडिक्शन करते हैं?  

- मेरा प्रेडिक्शन मैं अभी से कह देता हूं. दो तिहाई बहुमत से वहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने जा रही है. जब मैं 20 सीट कहता था, तब भी मुझे वैसे ही कहते थे. हम 18 सीटें जीत चुके हैं. तीन सीट 5-7, 5-7 हजार के मार्जिन से रही हैं और वो भी इतनी एट्रोसिटी और इतने रिगिंग के बाद. ...और भारतीय जनता पार्टी जीतेगी या नहीं, बंगाल की जनता के मन में तब बहुत बड़ा क्वेश्चनमार्क था. आज वो क्वेश्चन मार्क नहीं है, क्योंकि हम 18 सीटें जीत चुके हैं.

और आपका वहां पर चेहरा कौन होगा?

चेहरा तो अभी तय नहीं है. होगा या नहीं होगा, यह भी अभी तय नहीं है. परंतु बंगाल की जनता ने इस सरकार को निकालने का मन बना लिया है और आज हम सबसे बड़ा विपक्ष बनकर उभरे हैं.

सौरभ गांगुली आपसे मिले तो मीडिया में चर्चा है कि वह चेहरा हो सकते हैं. मुकुल रॉय छोड़कर आए थे ममता दीदी को...

-सौरभ जी के साथ राजनीति की कोई चर्चा नहीं हुई है.



आगे भी नहीं होगी?

-अभी तो नहीं हुई है.

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आप ऐसा नहीं कह रहे हैं कि नहीं होगी, आगे हो भी सकती है?

-आगे कुछ भी हो सकता है, लेकिन अभी कोई चर्चा नहीं हुई है. देखिए पार्टी अभी चुनाव के काफी दूर है, पार्टी उस वक्त निर्णय करेगी कि चेहरा सामने लेकर जाना है या नाम पर चुनाव लड़ना है, वो उस वक्त हम तय करेंगे.

आप लोग पांच महीने पहले सरकार में आए. सचिन तेंदुलकर भी 2-4 ओवर सेटल होते थे, उसके बाद चौके छक्के मारते थे. आपने तो तुरंत ही काम शुरू कर दिया. बहुत सारे सवाल हैं हमारे पास, कश्मीर पर सवाल हैं, जिस पर हम आएंगे. सबसे पहले मुझे लगता है चुनाव जो आ रहे हैं उस मुद्दे पर बात कर लेते हैं. महाराष्ट्र और हरियाणा इन दोनों स्टेट को कैसे देखते हैं? पहले महाराष्ट्र को ले लें, महाराष्ट्र को आप कैसे देखते हैं?

-देखिए महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी की पांच साल की यात्रा बहुत रोचक और सफल रही है. हमने 2014 में शिवसेना के साथ हमारा गठबंधन नहीं हो पाया, हम अकेले गए और सबसे बड़ा दल बन कर उभरे. शिवसेना और भाजपा की सरकार चली. देवेंद्र जी हमारे मुख्यमंत्री बने. पांच साल तक महाराष्ट्र को आगे बढ़ाने के लिए नरेंद्र मोदी और देवेंद्र फडणवीस की जोड़ी ने बहुत अच्छा काम किया है. 15 साल के यूपीए के शासन में जो महाराष्ट्र शिक्षा में नंबर वन होता था, एग्रीकल्चर में नंबर वन होता था, इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट में नंबर वन होता था, एफडीआई में नंबर वन होता था, कॉपरेटिव में नंबर वन होता था, वे सारे 15 के नीचे चले गए और ये अब पांच साल से कम समय के अंतराल में एक से पांच के अंदर है. यह बहुत अच्छा परफॉर्मेंस है और नरेंद्र मोदी जी ने भी महाराष्ट्र के विकास के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी. एक जमाने में जब कांग्रेस की सरकार थी, तब वह पांच साल के अंदर एप्रोक्सीमेटली एक लाख 22 हजार करोड़ रुपए दिए थे. भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने चार लाख 78 हजार करोड़ रुपए दिए है.

करीब तीन गुना...

-यह जो विकास नीचे तक पहुंचा है और पांच साल तक देवेंद्र फडणवीस सरकार पर एक भी भ्रष्टाचार का आरोप हमारे विरोधी भी नहीं लगा पाए. जिस प्रकार केंद्र में मोदी जी पर भी एक भी भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा. एक पारदर्शी शासन देने का हमने काम किया है और 20 साल की रिक्वायरमेंट को देखकर हमने इन्फ्रास्ट्रक्चर का बेस बनाने और इनकी सुविधाएं बढ़ाने की शुरुआत की है. मैं मानता हूं बहुत अच्छी सुविधाएं होंगी... एग्रीकल्चर में, कॉपरेटिव के क्षेत्र में बहुत अच्छा काम होगा. मेरे तीन दौरे हुए हैं, महाराष्ट्र की जनता एकदम चट्टान की तरह भारतीय जनता पार्टी के साथ खड़ी है.

कितनी सीट देंगे आप गठबंधन को?

-हमारे गठबंधन की दो तिहाई से ज्यादा सीटें आएंगी.

उसमें भारतीय जनता पार्टी की कितनी सीटें होंगी?

-ऐसा अंदाज लगाना अभी मुश्किल है परंतु भारतीय जनता पार्टी अपनी सीटों में काफी बढ़ोतरी करेगी.

तो आप यह कह रहे हैं कि अपने आप भी भारतीय जनता पार्टी सिंपल मेजॉरिटी की ओर जा सकती है, आप 164 सीटों पर जा सकते हैं?

-हां जा सकते हैं कुछ भी असंभव नहीं है.

पांच सालों में जो उपलब्धियां हुई, वो आप बता रहे थे. उसके बाद भी भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना का साथ एक बैड मैरिज जैसा क्यों लगता है? ऐसा क्यों लगता है कि साथ रहकर भी खुश नहीं हैं?

-गठबंधन में कई बार कार्यकर्ताओं का दबाव होता है. कई बार सब लोग अपनी-अपनी पार्टी को एक्सपेंड करना चाहते हैं. मैं इसमें किसी प्रकार की नेगोसिएशंस को बुरा नहीं मानता. यह तंदुरुस्त गठबंधन की निशानी है और अंततोगत्वा चाहे लोकसभा या विधानसभा हो हमारा गठबंधन शत प्रतिशत हुआ है. लोकसभा में भी दोनों पार्टियों की कैडर एक साथ मिलकर चुनाव लड़ी और जीती है. विधानसभा में भी हम एक साथ मिलकर लड़ रहे हैं और जीतेंगे भी.

उसके बाद भी शिवसेना ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवसेना का होगा. उनके नंबर भी आप से कम हैं, कम सीटों पर लड़ रहे हैं... फिर भी दावा कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री उनका होगा?

नहीं ठीक है... इसको... मैं नहीं मानता इसको कि गठबंधन के लिए यह बहुत बड़ा खतरा है यह बहुत स्पष्ट है कि नई सरकार में देवेंद्र फडणवीस भारतीय जनता पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री होंगे.

कोई डिप्टी सीएम भी हो सकता है?

– फडणवीस और उनकी टीम परिणाम को देखकर तय करेंगे, और भारतीय जनता पार्टी का पार्लियामेंट्री बोर्ड तय करेगा.

परिणाम अगर अच्छे होंगे तो इसकी गुंजाइश है?

-सारे ऑप्शन अभी तो ओपन ही हैं. भारतीय जनता पार्टी का पार्लियामेंट बोर्ड और महाराष्ट्र यूनिट चर्चा करके इसको तय करेंगे.

हरियाणा की क्या सिचुएशन है? पिछले दिनों आप हरियाणा में रहे हैं. हरियाणा में आप खुद को कितनी सीटें देंगे?

-हरियाणा में भी बहुत अच्छी स्थिति है. आर्टिकल 370 को हटाने का बहुत बड़ा प्रभाव दिखाई पड़ता है कि सबसे ज्यादा सेना में भेजने वाले प्रदेशों में एक प्रदेश हरियाणा है. हरियाणा के अंदर भी जीरो करप्शन वाली सरकार चली है. वहां पर भी 22 हजार करोड़ रुपया पांच साल में यूपीए सरकार ने दिया था, मोदी जी की सरकार ने लगभग लगभग एक लाख  17 हजार करोड़ रुपए दिए हैं. यह जो परिवर्तन आया है ढेर सारे काम में... छोटे से प्रदेश के अंदर एक भी जिला ऐसा नहीं जहां से रोड नहीं जाती है, फोर लेन रोड सिक्स लेन रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजली पहुंचाना, किसानों की समस्या को हल करना जितना भी धान और गेहूं है, वह सारे समर्थन मूल्य के हिसाब से खरीदना.

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नंबर आप नहीं दे रहे हैं?

– नंबर कहना अभी ठीक नहीं होगा, परंतु वहां भी हम दो तिहाई बहुमत को पार कर जाएंगे.

तो पिछली बार से कहीं अच्छा प्रदर्शन...

– बहुत अच्छा प्रदर्शन.

यहां पर जाट वर्सेस नॉन जाट फैक्टर कितना बड़ा रोल प्ले कर रहा है आपके फेवर में?

– पांच साल के अंदर जातिवाद की राजनीति शत प्रतिशत डायल्यूट हुई है. नरेंद्र मोदी जी की सबसे बड़ी उपलब्धि इस देश की डेमोक्रेसी, इस देश के डेमोक्रेटिक प्रोसेस को जो है, वो है जातिवाद, परिवार वाद और तुष्टिकरण से मुक्ति. इन तीनों बातों से बड़े लंबे समय के बाद मोदी जी ने लोकतंत्र को मुक्त करवाया है. 1967 के बाद स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ता था और जातिवाद, परिवार वाद इस राजनीति के अंदर शायद कभी न मिटने वाले दूषण बन गए थे. परंतु 2014 से 2019 मे इन समस्यायों से काफी मुक्ति मिली है.

थोड़ा आगे बढ़ेंगे... आने वाले कुछ एक-दो प्रदेशों के चुनाव... फिर दिल्ली का चुनाव कब होगा आपके हिसाब से?

-चुनाव आयोग जब कराएगा तब होगा... फरवरी की शुरुआत में या जनवरी के एंड में होता है.


पार्टी की स्थिति आपको कैसी लग रही है?

-हां हां, वहां पर हमारा बहुत अच्छा परिणाम आएगा. तीनों म्युनिसिपल कॉरपोरेशन में हम जीते हैं, सभी के सभी लोकसभा सीटें जीते हैं, और वर्तमान सरकार से मोहभंग की स्थिति पूरी हो चुकी है.

पिछली बार भी दिल्ली में आपका कोई चेहरा नहीं था इस बार भी ऐसा कोई चेहरा नहीं है उसका कोई आप को घाटा हो सकता है?

-ऐसा नहीं है कि हम मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चा नहीं करेंगे. पार्टी इस पर विचार करेगी.

तो इस बार कोई चेहरा होगा?

-मुझे विश्वास है जिस प्रकार से 'आप' पार्टी से लोगों का मोहभंग हुआ है उसका विकल्प भारतीय जनता पार्टी ही हो सकती है क्योंकि म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के चुनाव और लोकसभा के चुनाव में हम सबसे बड़े विजेता बनकर उभरे हैं और लोकसभा में शत-प्रतिशत विजय प्राप्त की है.

अरविंद केजरीवाल ने अपनी काफी स्ट्रैटेजी बदली है. दो साल से कोई अटैक नहीं कर रहे हैं. यहां तक कि आपने 370 हटाया तो वह पहले नेता थे जिन्होंने आपका समर्थन किया?

-वह ठीक है.

इसका कोई फर्क पड़ेगा चुनाव पर?

-परफार्मेंस और इसका कोई लेना-देना नहीं होता है. कोई यह माने कि मैं सतही तौर पर क्या बोलता हूं इसके आधार पर ही वोट तय होता है मतदाता अपना मत तय करता है, तो मैं नहीं मानता ऐसा है. जो आपका परफॉर्मेंस है जमीनी परफॉर्मेंस... उसका एक बहुत बड़ा रोल रहता है.

एक और क्रूशियल स्टेट है जो एक-डेढ़ साल में चुनाव में जाएगा, वह है बिहार जहां पर आपने नीतीश कुमार के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा है. पिछली बार आपने उसको स्वीप भी किया था वहां भी कुछ बैड मैरिज टाइप की सिचुएशन है. सरकार में पार्टिसिपेट करने से मना किया, कुछ नोकझोंक लगी हुई है तो क्या भारतीय जनता पार्टी बिहार में अपने आप अलग से चुनाव लड़ेगी?

-देखिए जदयू और भाजपा का गठबंधन अटल है. दोनों पार्टियां साथ में चुनाव में जाएंगी. हम नीतीश जी के नेतृत्व में चुनाव लड़ेंगे, यह स्पष्ट है. जहां तक बिहार का सवाल है राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए मोदी जी के नेतृत्व में राजनीति के क्षेत्र में काम करता है.

तो आप ये कह रहे हैं आपके बीच में कोई अनबन नहीं है?

-देखिए जब गठबंधन होता है तो नीचे के स्तर पर कुछ अनबन होती है, वह होनी ही चाहिए. वही स्वस्थ गठबंधन के लक्षण है. परंतु मतभेद मनभेद की स्थिति में नहीं परिवर्तित हुए हैं. हम अच्छे से चुनाव लड़ेंगे, एक साथ चुनाव लड़ेंगे.

अमित जी, एक सवाल जो सबसे बुलंद मुद्दा रहा है पिछले कुछ महीनों में... कश्मीर का मुद्दा धीरे-धीरे पिछले कुछ दिनों में सभी सर्विसिस वापस भी आई हैं. पोस्टपेड सर्विस मोबाइल की भी शुरू हो गई है. मेरा जो सवाल है, पहले एक ब्रॉड सवाल है कि आप कैसे देखते हैं कश्मीर कैसे आगे जाएगा, सिचुएशन कैसे इंप्रूव करेंगे? प्रधानमंत्री कह रहे थे चार महीने लगेंगे सिचुएशन को नॉर्मल होने में... क्या कदम उठाएंगे?

-देखिए कश्मीर की तीन समस्याएं थीं. एक तो अलगाववाद और आतंकवाद, दूसरा करप्शन... जबरदस्त भ्रष्टाचार था और तीसरा एक विकास का जो ब्लूप्रिंट होना चाहिए, उसका अभाव था. मुझे लगता है तीनों समस्याओं की जड़ धारा 370 ही थी. धारा 370 के कारण पाकिस्तान की एजेंसियों ने वहां के युवाओं को भ्रमित किया. पहले अलगाववाद... अलग राज्य, बाद में आजादी ना मिले तो आतंकवाद और हाथ में बंदूक थमा दे. 90 से लेकर आज तक 40 हजार लोग मारे गए. अगर इसकी कोई डिटेल्ड स्टडी करता है तो आपको तुरंत मालूम पड़ेगा थोड़ी स्टडी के बाद कि यह आर्टिकल 370 के कारण हुआ. मैं मानता हूं कि आतंकवाद को मूल से नष्ट करने का काम आर्टिकल 370 को समाप्त करने के साथ शुरू हुआ है और इस दिशा में हम सफलतापूर्वक आगे बढ़ेंगे, ऐसा मुझे भरोसा है. दूसरा, एंटी करप्शन ब्यूरो ही नहीं था. आर्टिकल 370 का उपयोग करके वहां एंटी करप्शन ब्यूरो ही नहीं बनाया. आज देश के सारे कानून वहां लगे हैं. ईडी को भी सर्वाधिकार प्राप्त है. इनकम टैक्स को भी है और एसीबी भी बनी है.

अब भ्रष्टाचार पर नकेल कसी जाएगी. जो पैसा केंद्र से जाता है जम्मू-कश्मीर, वह पूरा का पूरा जनता के कामों में खर्च होगा. इससे डेवलपमेंट बढ़ने वाला है. दूसरा बजट का एक बड़ा हिस्सा 73वें अमेंडमेंट के साथ स्थानीय इकाइयों के चुनाव के लिए अलॉट होता था, लेकिन कभी इस्तेमाल नहीं हुआ. चुनाव करवाते ही नहीं थे. तहसील, पंचायत, जिला पंचायत के चुनाव होते ही नहीं थे. अब क्योंकि 73 और 74वां संशोधन अप्लाई हो गया है तो नियमित रूप से सरपंच के चुनाव कराने पड़ेंगे. अभी ब्लॉक्स के चुनाव चल रहे हैं और एक बहुत बड़ी राशि कश्मीर जैसे राज्य में मतलब 65सौ करोड की राशि सीधे पंचायती राज के हाथ में जाएगी. इससे भी गांव के विकास को बल मिलेगा. तीसरा, अनुभवी एडमिनिस्ट्रेशन मिलकर कश्मीर के विकास का 15 साल का एक ब्लूप्रिंट बना रहे हैं और मुझे लगता है ब्लूप्रिंट के आधार पर कश्मीर के इंफ्रास्ट्रक्चर का, एजुकेशन का, हेल्थ सेक्टर का, इंडस्ट्री का, टूरिज्म का सारा विकास होता है तो कश्मीर को विकसित राज्य बनने से कोई नहीं रोक सकता है. इन चीजों के बीच में जो सबसे बड़ा हर्डल 370 और 35 ए था, वो हट चुका है.

तो स्पेशल पैकेज फाइनेंसल पैकेज भी होगा?

-देखिए पैकेज ऑलरेडी मोदी जी ने दिया हुआ है मगर इसका इंप्लीमेंटेशन नहीं होता था. इतना करप्शन होता था. अब एक विजन के साथ एक अच्छे ब्लूप्रिंट के साथ वहां विकास का खाका खींचा जाएगा.

यह जो अभी आपने इलेक्शन की बात की जिसमें भारतीय जनता पार्टी और कुछ निर्दलीय उम्मीदवार खड़े हो रहे हैं.

- देश के कई हिस्सों में पंचायत चुनाव में पार्टियों को परमिशन ही नहीं है. सारे निर्दल लड़ते हैं ढेर सारे स्टेट ऐसे हैं तो इसका कोई मतलब नहीं है क्या? गांव के मतदाता अपना वोट देकर पंच और सरपंच सुनते हैं और गांव के विकास का काम उनके हाथ में जाता है जो गांव वालों के साथ बैठकर तय करते हैं कि मेरे गांव की प्रायरिटी क्या है... पंचायत घर बनाना है, स्कूल के कमरे बनाने हैं, पीने के पानी की व्यवस्था करनी है, स्वच्छता की व्यवस्था को सुदृढ़ करना है. जब यह गांव तय करता है तब विकास की गति अनेक गुना बढ़ जाती है.



भारत में जब यह अनाउंसमेंट आया, भारत में इसकी बहुत सराहना हुई. प्रेस न  भी आपका बहुत अच्छा सपोर्ट किया, पर फॉरेन प्रेस काफी क्रिटिक रहा, खासकर कि डेमोक्रेटिक लीडर, लोकल लीडर जो हाउस अरेस्ट में है, उसे लेकर. वे कब तक हाउस अरेस्ट में रहेंगे पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत?

– विशेषकर कांग्रेस पार्टी मुद्दे को तूल दे रही है और नेशनल कांफ्रेंस तूल दे रही है. मैं दोनों पार्टियों को बताना चाहता हूं की आर्टिकल 370 हटाने से कोई घटना नहीं हुई. कोई इतना बड़ा फेरबदल कश्मीर की राजनीतिक और संवैधानिक स्थिति में नहीं किया था फिर भी आपने शेख अब्दुल्ला जी को 11 साल तक जेल में रखा था. कश्मीर के मुख्यमंत्री पद से पदच्युत कर दिया बाद में जेल में रखा और अब आप हमें सवाल पूछ रहे हो? अभी-अभी हमने बड़ा फैसला दिया है लोगों की भावना भड़काने का अगर कोई प्रयास करता है तो हमें एहतियात के तौर पर कदम उठाने पड़ेंगे और टॉप प्रायरिटी कश्मीर में शांति है.

स्टेटहुड कब रिस्टोर हो पाएगा कश्मीर में, कोई 1 साल... 2 साल कोई टाइम फ्रेम है इसका?

-सिचुएशन पर डिपेंड करता है. अगर सब लोग कॉपरेशन देकर सिचुएशन को जल्दी-जल्दी नार्मल करेंगे तो जल्दी हो जाएगा.

कश्मीर में इन्वेस्टमेंट कैसे अट्रैक्ट करेंगे आप... प्राइवेट इन्वेस्टमेंट हो. सर्विस कंपनी हो?

-राहुल जी वहां इन्वेस्टमेंट की अपार संभावनाएं होती हैं, खनिज के क्षेत्र के अंदर पड़ी हैं, एजुकेशन के क्षेत्र में इन्वेस्टमेंट की अपार संभावनाएं, हेल्थ सेक्टर पूरा खुला पड़ा है... सारी संभावनाएं हैं 370 ने उनको रोक कर रखा था.

ये जो रोज अटैक्स हो रहे हैं लोगों पर जैसे फार्मर्स पर वहां, उसके लिए क्या व्यवस्था है?

– रोज नहीं 2 महीने में चार अटैक हुए हैं. 90 के दशक से आज तक हर महीने 16 अटैक की घटनाओं की एवरेज है.

आप कह रहे हैं ऑलरेडी अटैक कम हो गए हैं?

-कम हो गए हैं, इसे और कम करेंगे.

क्या आप कभी कश्मीर में नॉन मुस्लिम चीफ मिनिस्टर देखते हैं?

–ऐसे नहीं सोचना चाहिए. कश्मीर की जनता जो तय करेगी, वो मुख्यमंत्री होगा. हिंदू चीफ मिनिस्टर हो उससे भी कोई आपत्ति नहीं है, मुस्लिम चीफ मिनिस्टर हो उससे भी कोई किसी को कोई आपत्ति नहीं है. मगर वो कश्मीर की जनता को तय करना है.

आर्टिकल 370 हटाने के खिलाफ एक कॉन्स्टिट्यूशन बेंच का गठन हुआ है, अगर इसका कुछ जजमेंट विपरीत आ गया तो उसका क्या होगा?

-देखिए पूरी बिल की ड्राफ्टिंग की प्रक्रिया में मैं इंवॉल्व था. मैं आपको बताता हूं. आपके चैनल के माध्यम से जनता को आश्वस्त करता हूं कि लीगल स्क्रूटनी के अंदर यह बिल बहुत अच्छे तरीके से सौ में से सौ नंबर प्राप्त करेगा, ऐसा मुझे विश्वास है.

एक और मुद्दा है जो बराबर उठता रहा है. इस पर भी बाहर चर्चा होती है. इसका बाहर भी परसेप्शन गलत बनता है, वह है लिंचिंग का मुद्दा. अभी मोहन भागवत जी ने भी कहा लिंचिंग जैसी चीज हमारे इंडियन कल्चर में है ही नहीं तो यह मॉब लिंचिंग का जो मुद्दा है इसको कैसे सॉल्व करेंगे... आए दिन कुछ न कुछ घटना हो जाती है?

-अगर किसी भी व्यक्ति की किसी भी प्रकार से हत्या होती है तो धारा 302 है और जितनी भी घटनाओं के अंदर जान गई है, सब में लगाया गया है और विशेषकर भारतीय जनता पार्टी की सरकारों ने इसकी छानबीन भी अच्छे से की है. चार्जशीट भी अच्छे से लगाई है. इस समस्या को राजनीतिक स्वरूप देना है या सामाजिक जागरूकता लाकर इसका समाधान करना है, यह समाज को तय करना पड़ेगा. देश की जनता को तय करना पड़ेगा. दूषण के खिलाफ जागृति लाकर जागरूकता लाकर इसको हल करना चाहिए. मॉब लिंचिंग के जितने भी आरोप हैं उसकी संख्या भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद बढ़ी है, ऐसा नहीं है. ऐसा प्रचार किया जा रहा है. पहले भी एक गांव में चोर पकड़ा जाता था तो गांव वाले पकड़कर मारते थे शायद मृत्यु हो जाती थी. ऐसी घटना पहले भी हुई हैं.

पर ज्यादातर आप ये नहीं मानेंगे कि जो घटनाएं हो रही हैं उसमें मुसलमान या नीची जाति के लोग मर रहे हैं?

–ऐसा नहीं है. पहले की घटनाओं का भी आप एनालिसिस करिए, गरीब के ऊपर होती हैं.

इसको टेकल करने के लिए कोई कानून लाएंगे?

– कानून है, विद्यमान है कानून, अच्छे तरीके से जांच करनी चाहिए, अच्छे तरीके से अप्लाई करनी चाहिए.

हाल ही में हिंदी दिवस के दिन आपने कहा कि हिंदी देश को जोड़ सकती है. देश को समेट कर एक साथ ला सकती है. उसके ऊपर बहुत सारी चर्चा हो गई. ममता जी ने स्टेटमेंट दी, स्टालिन ने कुछ कहा. सबने कहा ये स्टेटमेंट ठीक नहीं है इसका विरोध किया कि ये ठीक नहीं है...

-मेरा भाषण आपसे रिक्वेस्ट है पूरा सुन लीजिए. मैंने सबसे पहले कहा था हमारी सभी भारतीय भाषाओं को मजबूत करना चाहिए. परंतु कई बार सभी राज्यों में कोऑर्डिनेशन में अंग्रेजी का उपयोग होता है. इसकी जगह अगर हिंदी का उपयोग होता है तो हमारी भाषा है, इसको ताकत देनी चाहिए. मैंने बार-बार उसमें भारतीय भाषाओं को मजबूत करने की बात कही है. हिंदी की किसी भी भारतीय भाषा से स्पर्धा नहीं है. मैं भी नॉन हिंदी प्रदेश से आता हूं. राजभाषा ही मेरे मंत्रालय का एक अंग है.



प्रधानमंत्री ने तमिल भाषा की सराहना की. सबसे पुरानी भाषा है. इस बार वैष्टि पहनकर भी वहां गए. क्या इस बार आपका काम साउथ को मजबूत करने का है?

-सभी संस्कृतियों को प्रधानमंत्री जी रिप्रजेंट करते हैं इसको अलग तरीके से नहीं देखना चाहिए.

अमित जी, अपोजिशन का एक और आरोप है कि आजकल स्टेट इंटेलिजेंस सीबीआई, ईडी का उपयोग किया जा रहा है, उनका इस्तेमाल किया जा रहा है अपोजिशन के लीडर्स को परेशान करने के लिए. चाहे वो प्रफुल्ल पटेल हों या चिदंबरम या डी शिवकुमार. लेकिन ये बात भारतीय जनता पार्टी के अपने नेताओं के ऊपर लागू नहीं होती उनके ऊपर इन्वेस्टिगेशन नहीं होता है. इसके बारे में आप क्या कहेंगे?

-पहले मैं आपको स्पष्ट कर दूं कि इसमें से बहुत सारी एफआईआऱ यूपीए सरकार में रजिस्टर हुई थीं, हमने रजिस्टर नहीं की. हम इन्वेस्टिगेशन कर रहे हैं. जो आरोप लग रहा है, वह पॉलीटिकल वेंडेटा का लग रहा है. अगर पॉलिटिकल वेंडेटा होता तो छह साल क्यों लगता, एक डेढ़ साल में ही नाटक कर के धर लेते! थोरोली इन्वेस्टिगेशन हुआ है, सच्चा इन्वेस्टीगेशन हुआ है, एजेंसी अपना काम कर रही हैं. यह मुद्दा मीडिया में आता तो आप लोग कह देते 12 लाख करोड़ का घोटाला हुआ है, किसी पर एक्शन क्यों नहीं हुआ. ढेर सारे कांग्रेस के नेताओं ने भाषण किया है कि भाई अगर हमने भ्रष्टाचार किया था, तो हमें पकड़ते क्यों नहीं. जब एजेंसी पकड़ने जाती है तो हाय तौबा मचाते हैं. और टाइमिंग का सवाल है तो सोनिया जी पर क्या हमने एफआईआर की? एक प्राइवेट कंप्लेंटर ने की थी सुब्रमण्यम स्वामी जी ने. उनको भी जमानत लेनी पड़ी. कौन सा इलेक्शन था? पी चिदंबरम को अरेस्ट किया गया, डीके शिवकुमार को अरेस्ट किया गया, कौन सा इलेक्शन था? कहीं कैग ने, कहीं सीवीसी ने, कहीं देश की सर्वोच्च अदालत ने ऑर्डर किए हैं, उनके आधार पर यूपीए ने ही एफआईआर रजिस्टर की, जिसके तहत जांच हो रही है. मैं सबको कहना चाहता हूं कि कोई भी एजेंसी की जांच अंतिम नहीं होती. हमारे संविधान के अंदर व्यवस्था है यू कैन चैलेंज इट. सेशन कोर्ट में चैलेंज करें, हाई कोर्ट में चैलेंज करें, सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज करिए. ...तो सबने जाना चाहिए, कोर्ट जा भी रहे हैं, कोर्ट समर्थन नहीं कर रही है तो इसमें पॉलिटिक्स कहां से है!

पी चिदंबरम जब होम मिनिस्टर थे तो आपके पीछे भी एजेंसी लगी हुई थी क्या उनके ऊपर दबाव नहीं था?

-देखिए पी चिदंबरम जी जब होम मिनिस्टर थे तब मेरे ऊपर सीबीआई ने एफआईआर रजिस्टर की. सीबीआई गृह मंत्रालय में नहीं आती. आज भी सीबीआई और ईडी गृह मंत्रालय में नहीं आती. पहले गृह मंत्रालय को आप साइड कर दें. दूसरी बात, जब मुझ पर एफआईआर हुई थी मैंने हाईकोर्ट में एप्लीकेशन किया. हाईकोर्ट ने एक ही महीने में कह दिया था कि देयर इज नो प्राइमा फेसी केस अगेंस्ट अमित शाह. मैं बरी होकर नहीं आया, मैं डिस्चार्ज होकर आया हूं चार्ज फ्रेम नहीं हो पाए मेरे ऊपर और जजमेंट में लिखा गया. सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट कंफर्म हुआ है. पॉलिटिकल वेंडेटा का क्लियर कट केस है.

एनआरसी कब तक इम्प्लीमेंट हो पाएगा क्या इसका कोई रोडमैप है?

– निश्चित रूप से 2024 से पहले

यह जो डिटेंशन कैंप की बात कर रहे हैं जो कई जगह पर बन रहे हैं, इनसे क्या हासिल होगा?

-एक ट्रिब्यूनल होती है. ट्रिब्यूनल के ऑर्डर के हिसाब से होता है. प्रशासन अपनी तैयारी करता रहता है. ट्रिब्यूनल का एक लीगल प्रोसेस होता है और वह प्रोसेस अभी शुरू होगा अभी लीगल प्रोसेस चालू है. प्रशासन अपनी तैयारी करता रहता है.

आपने हाल ही में एक स्पीच में कहा कि जितने भी हिंदू हैं, ईसाई हैं, बौद्ध धर्म के लोग हैं, जैन हैं... वे सब हमारे देश में सुरक्षित हैं. आपने इसमें मुसलमानों का जिक्र नहीं किया. ऐसा क्यों?

-सुरक्षित हैं, ऐसा नहीं कहा. इन लोगों को हम नागरिकता देंगे, यह कहा था. इसके पीछे भी एक कारण है. अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश माइनॉरिटी अगर अपना धर्म बचाने के लिए इस देश की शरण में आती है, प्रताड़ित होकर आती है, अपनी माताओं-बहनों और बच्चियों का सम्मान बचाने के लिए यहां आती है, तो वह शरणार्थी होते हैं, घुसपैठिए नहीं. अगर रोजी रोटी के लिए गैर-कानूनी तरीके से आते हैं या कानून व्यवस्था बिगड़ने के लिए आते हैं तो वे घुसपैठिए होते हैं.

आप कह रहे हैं कि मुसलमानों का नाम इसलिए नहीं लिया, क्योंकि वे घुसपैठिए हैं और एजेंडा के साथ आते हैं?

-मुसलमान घुसपैठिए हैं ऐसा मेरा कहना नहीं है. उन पर धार्मिक प्रताड़ना होने की संभावनाएं नहीं हैं. बंटवारे के वक्त दोनों पाकिस्तान में इकट्ठा होकर 30 फीसदी हिंदू थे, अब 6.5 प्रतिशत हो गए, कहां गए?

अगला कदम आपका क्या होगा यूनिफॉर्म सिविल कोड आप कब तक लागू कर पाएंगे?

-यह हमारे घोषणापत्र का हिस्सा है, उचित समय पर इस पर पार्टी और सरकार दोनों चर्चा करेंगे. अभी कोई तिथि देना संभव नहीं है. हमारे घोषणा पत्र में है तो हमारा झंडा तो ऑटोमेटिक बनता है.

राम मंदिर मामले को आप कैसे देखते हैं आपकी क्या अपेक्षा है कि किस तरह का जजमेंट आएगा?

-1950 से यह केस चल रहा है और मुझे लगता है काफी देर हो चुकी थी. अब जजमेंट आना चाहिए. थोड़े समय में जजमेंट आ जाएगा और मैं मानता हूं कि जो भी फैसला आएगा इसको दोनों समुदाय, दोनों वर्ग स्वीकार करेंगे. इसमें अगर-मगर का सवाल नहीं है. देश के वरिष्ठतम न्यायमूर्ति ने इसको सुना है और जो जजमेंट आएगा मुझे विश्वास है दोनों समुदाय स्वीकार करेंगे.

जजमेंट के बाद आपको लगता है कि जहां पर और विवादित जैसे कि मथुरा और काशी हैं क्या वहां भी इस तरह की चीजें आगे बढ़ेंगी?

-मुझे नहीं लगता है और इस प्रकार की सोच कोई कर भी नहीं सकता है कि क्या होगा परंतु इस मसले का समाधान जजमेंट से हो जाएगा यह मुझे काफी आशा है.

अमित जी आप गृह मंत्री होने के सिवाय भाजपा के वरिष्ठ नेता भी हैं. आज देश के सामने एक बहुत बड़ा मुद्दा है और वह है इकॉनमी का मुद्दा. आप बिजनेस में भी रहे हैं और आपको स्टॉक मार्केट का ज्ञान है. अगर आप जीडीपी के आंकड़े देखें तो नीचे गिरते जा रहे हैं और मंदी का माहौल है, चाहे कोई भी सेक्टर हो मंदी का थोड़ा सा माहौल है और सेंटीमेंट थोड़ा खराब है इसको आप कैसे ठीक कर पाएंगे?

-देखिए आपके सवाल का जवाब दो भाग में देना चाहूंगा. 1990 के बाद हमारे देश का ही नहीं पूरी, दुनिया का अर्थतंत्र ग्लोबलाइज हुआ है, इसका वैश्वीकरण हुआ है लिबरलाइज हुआ है

और 1990 के बाद धीरे-धीरे यह चलते-चलते विश्व के अर्थतंत्र का प्रवाह अब एक ही होता है. अभी जो स्लोडाउन की बात कर रहे हैं यह सिर्फ भारत में नहीं है पूरे विश्व में है. यह वैश्विक मंदी है, जिसके असर से भारत का अर्थतंत्र अछूता नहीं रह सकता क्योंकि काफी हद तक ग्लोबलाइजेशन हो चुका है. अब भारत के अकेले के आंकड़े को गत वर्ष के इस तिमाही के आंकड़े के साथ मूल्यांकन करना, कंपैरिजन करना उचित नहीं है. टॉप 10 इकॉनॉमी को आपको लेना होगा और सब के जीडीपी में कितनी गिरावट आई है और उसके कंपैरिजन में भारत की गिरावट कितनी है, इस प्रकार के तुलनात्मक स्टडी करके भारत के परफॉर्मेंस को और मंदी को आप असेस कर सकते हो. मुझे लगता है यह असेसमेंट लगाने का सही तरीका होगा. यह हुई एक बात और दूसरी बात इससे कैसे निपटेंगे... जब से ग्लोबल स्लोडाउन का असर शुरू हुआ है, वित्त मंत्री ने ढेर सारे सेंटर्स पर जाकर उद्योगपतियों से मिलकर चार्टर्ड अकाउंटेंट से मिलकर मिलकर अलग-अलग अर्थशास्त्रियों से घंटों तक संवाद किया गया है. इसमें से ढेर सारी चीजें उन्होंने निकाली थी. देश की कैबिनेट ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में और कुछ वित्त विभाग में निर्मला बहन के नेतृत्व में ढेर सारे फैसले हुए हैं और ये फैसले बड़े-बड़े पांच विभागों के अंदर हुए हैं और ईश्वर की कृपा है कि इस बार खरीफ क्रॉप बहुत अच्छा हुआ. देश भर में अच्छी बारिश हुई. खरीफ की फसल आपका अंदाज मेरे हिसाब से 5 से 6 लाख करोड़ तक होगी. निर्मला जी ने जो कदम उठाए हैं इनका असर भी जब आने लगेगा तो मुझे लगता है धीरे-धीरे स्थिति में सुधार आएगा.

कॉरपोरेट टैक्स में कटौती की गई. इसकी ग्लोबल इनवेस्टर्स ने तारीफ की. मुझे लगता है कि इससे आने वाले समय में इनवेस्टमेंट में बढ़ोतरी होगी. लेकिन आज की तारीख में समस्या यह है कि बढ़ोतरी का सीधा संबंध डिमांड से है. आज डिमांड नहीं है. क्या हम निकट भविष्य में इनकम टैक्स में कटौती भी देखेंगे?

इसका फैसला वित्तमंत्री करेंगी. बजट फरवरी में आएगा. मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता. वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री तय करेंगे. लेकिन कॉरपोरेट टैक्स में कटौती लॉन्ग टर्म कदम है. इससे ग्लोबल इनवेस्टमेंट के लिए भारत का बाजार और आकर्षक दिखेगा. मुझे लगता है कि इस कदम से इनवेस्टमेंट में काफी बढ़ोतरी होगी.

मैं एक ग्लोबल सीईओ से कुछ दिन पहले मिला था. वो कह रहे थे आज अगर भारत को हम बाहर से अंदर देखें तो एक ही चीज खटकती है. वह यह है कि कंट्री रिस्क बढ़ गए हैं क्योंकि यहां कंसिस्टेंसी ऑफ पॉलिसी नहीं है. पॉलिसी कभी बदल जाती है. यह उनका मत था मैंने सोचा आपके सामने रखूं...

-मुझे नहीं लगता कि उन्होंने डिटेल स्टडी की है. पिछले 6 सालों में मोदी जी ने एक स्थाई अर्थनीति को अंजाम दिया है और इस दिशा में देश आगे बढ़ा.

रघुराम राजन जी कहते हैं कि मेजॉरिटेरिएनिज्म  और ओवर सेंट्रलाइजेशन की वजह से डिसीजन मेकिंग इकनोमिक पर्सपेक्टिव से स्लो हो गई है, क्या मानते हैं?

रघुराम राजन की बात पर टिप्पणी नही करना चाहता. विवाद नहीं मोल लेना चाहता. पॉलिसी बनाने का काम देश की चुनी हुई सरकार का है.

मैं आपकी बात मानता हूं आप जो कह रहे हैं के जीडीपी का जब हम आकलन करें तो औरों के कंपैरिजन में करना चाहिए और आज भारत शायद औरों के मुकाबले अच्छा भी कर रहा है. लेकिन भारत की एक अंदरूनी प्रॉब्लम है कि फाइनेंशल सेक्टर में बहुत स्ट्रेस है. बहुत से बैंक लिक्विडेशन की तरफ गए हैं. पब्लिक सेक्टर बैंक में स्ट्रेस है. पुराने स्कैम बाहर आ रहे हैं.  इससे सेंटिमेंट बिगड़ रहा है और समझ नहीं आ रहा है कि हालात पर कैसे काबू पाया जाएगा. इस पर आप क्या कहेंगे?

-10 साल जिस तरह से यूपीए की सरकार चली थी GDP के रिफरेंस  में जो फाइनेंस होना चाहिए था इससे कई गुना तेजी से ग्रोथ हो रही है. स्कैम हुए, लेकिन कभी ना कभी तो हम बैंकों के बैलेंस शीट को स्वच्छ करेंगे कि नहीं? या स्कैम के बोझ पर ही अपने अर्थ तंत्र को खड़ा करने का प्रयास करेंगे? जब यह प्रक्रिया चलती है तो थोड़े शॉक जरूर आएंगे जो आए भी हैं, लेकिन सरकार ने इसकी डिटेल स्टडी की है. अब धीरे-धीरे अर्थ तंत्र पटरी पर आ जाएगा. हमें जो यह लेगसी मिली है इसको ठीक करने की जिम्मेदारी जनता ने हमें दी है और मैं मानता हूं मोदी जी ने साहस पूर्ण कदम उठाकर इस को अच्छे से देखा है इस समस्या का समाधान जरूर होगा.



वीर सावरकर को भारत रत्न देने की बात पर आप क्या कहेंगे?

-मुझे रूल्स अभी मालूम नहीं है. इसको ध्यान से देखना पड़ेगा कि नियम क्या है और सावरकर जी के बारे में मेरा कहना स्पष्ट है सावरकर जी जितना राष्ट्रभक्त और सावरकर परिवार जितना बलिदानी बहुत कम परिवार हैं. देश में ऐसा कोई नहीं है, जिसके दो जन्म दिन हैं. देश में ऐसा कोई अन्य परिवार नहीं है जिसके दो भाई जेल में 12 साल रहे और इन सालों में एक-दूसरे को देखा तक नहीं. देश का ऐसा कोई परिवार नहीं है जिसकी संपत्ति ब्रिटिशर्स ने कई बार छीन ली हो. सावरकर जी के लिए जो भी बात कर रहे हैं वह इस देश के इतिहास के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. युवा पीढ़ी को सावरकर से प्रेरणा लेने से रोकने का पाप कर रहे हैं.

क्या आप मानते हैं भारत को हिंदू राष्ट्र होना चाहिए?

-हिंदू राष्ट्र का जहां तक सवाल है इसकी कल्पना को पहले को डिफाइन कर दे. हर व्यक्ति की अपनी अपनी कल्पना होती है. भारत अपने संविधान के तहत चलना चाहिए और संविधान के तहत चल रहा है.

कुछ ही दिनों में 22 अक्टूबर को आप 55 साल के हा जाएंगे. आपको एडवांस में जन्मदिन की बधाई. आप क्या करेंगे उस दिन. कोई सेलिब्रेशन होगा?

नहीं, मैं सेलिब्रेट नहीं कर रहा, मैं यात्रा पर हूं.

आप परिवार के साथ वक्त नहीं बिताएंगे?

-नहीं, मेरा परिवार फिलहाल अहमदाबाद में है.

आप लंबे वक्त तक चेस एसोसिएशन के अध्यक्ष थे. क्या आपको चेस पसंद है? क्या इस तरीके से आपने राजनीतिक का गेम सीखा?

-मैं बचपन से चेस खेलता रहा हूं.

हमें वक्त देने के लिए धन्यवाद, नमस्कार

-नमस्कार

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First published: October 18, 2019, 6:16 AM IST
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