टूलकिट मामलाः शांतनु पर बिना वारंट के दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई की! परिवारवालों ने लिखी चिट्ठी

टूलकिट मामले में शांतनु पर आरोप हैं कि ये खालिस्तानी समर्थकों के साथ संपर्क में था.

Toolkit matter: परिवार वालों ने अपनी चिट्ठी में कहा है कि दिल्ली पुलिस ने शांतनु के घर पर छापेमारी की, तलाशी ली और कुछ सामान भी लेकर गए, हालांकि इस दौरान अधिकारियों ने कोई भी सर्च वारंट नहीं दिखाया.

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    विवेक गुप्ता

    टूलकिट मामले में आरोपी शांतनु मुलुक के परिवार वालों ने बीड़ एसपी को एक चिट्ठी लिखी है. परिवार वालों ने अपनी चिट्ठी में कहा है कि दिल्ली पुलिस ने शांतनु के घर पर छापेमारी की, तलाशी ली और कुछ सामान भी लेकर गए, हालांकि इस दौरान अधिकारियों ने कोई भी सर्च वारंट नहीं दिखाया. परिवारवालों का कहना है कि उन्हें शक है कि पुलिस ने बिना वारंट के ही सारी कार्रवाई की.

    शांतनु मुलुक के परिवार वालों से इस तरह की चिट्ठी मिलने के बाद बीड़ एसपी आर राजा मामले की जांच कर रहे हैं. न्यूज18 इंडिया से खास बातचीत में बीड़ के एसपी आर राजा ने कहा, 'हां परिवार ने चिट्टी लिखी है, हमारे पास चिट्टी आई है कि दिल्ली पुलिस के दो अधिकारी शांतनु के घर गए थे. परिवार का कहना है की पुलिस अधिकारियों ने पास कोई भी सर्च वारंट नहीं था, हम जांच कर रहे है.'

    पुलिस ने घर का सामान किया जब्त
    वहीं, इस मामले पर शांतनु के भाई ने न्यूज18 इंडिया के साथ बातचीत में कहा, '12 फरवरी को सुबह 5.30 बजे दो पुलिस अधिकारी शांतनु के घर गए हैं. उस वक्त शांतनु घर पर नहीं था. पुलिसवालों ने घर की तलाशी ली और कुछ सामान भी जब्त किया. हमने पूछा कि कोई कागज़ या वारंट तो उन लोगों ने कुछ नहीं दिखाया, जिसके बाद हमने लोकल पुलिस को इसकी जानकारी दी तो पता चला कि दिल्ली पुलिस ने लोकल पुलिस स्टेशन में भी कोई साइन नहीं किया था.'

    बता दें कि टूलकिट मामले में आरोपी शांतनु मुलुक को बॉम्बे हाईकोर्ट ने 10 दिन की अग्रिम ट्रांजिट जमानत दी है. आरोपी शांतनु मुलुक के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने ये फैसला सुनाया है. बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच की जस्टिस विभा कंकानवाड़ी ने शांतनु मुलुक को 10 दिन की अग्रिम ट्रांजिट जमानत दे दी. मुलुक ने दिल्ली पुलिस को याचिका में पक्षकार नहीं बनाया था, लेकिन महाराष्ट्र सरकार की ओर से अग्रिम जमानत पर आपत्ति उठाई गई.

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    आखिरकार क्या है पूरा मामला?
    उल्लेखनीय है कि टूलकिट मामले में शांतनु पर आरोप हैं कि वो खालिस्तानी समर्थकों के साथ संपर्क में था और उनके इशारे पर वो टूलकिट गूगल डॉक्यूमेंट क्रिएट किया गया था, जिसे दिशा रवि ने ग्रेटा थनबर्ग को भेजा था और जो ग्रेटा से लीक हो गया था.

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