न्यूज़18-इप्सॉस एग्ज़िट पोल 2019 : धौरहरा में पिछली हार का बदला चुका पा रहे हैं जितिन प्रसाद?

लोकसभा चुनावों में वोटिंग का दौर समाप्त होने के बाद जो अनुमान सामने आ रहे हैं, उनके मुताबिक उत्तर प्रदेश की अहम और त्रिकोणीय मुकाबले के कारण दिलचस्प धौरहरा सीट पर कौन आगे है और कौन पीछे? पढ़ें अनुमान और पूरा गणित.

News18Hindi
Updated: May 20, 2019, 9:06 PM IST
न्यूज़18-इप्सॉस एग्ज़िट पोल 2019 : धौरहरा में पिछली हार का बदला चुका पा रहे हैं जितिन प्रसाद?
धौरहरा में पिछली हार का बदला चुका पा रहे हैं जितिन प्रसाद?
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Updated: May 20, 2019, 9:06 PM IST
धौरहरा लोकसभा सीट कांग्रेस के बड़े नाम के साथ बड़े उलटफेर के कारण अहम हो जाती है. इस बार यहां मुकाबला इसलिए दिलचस्प है क्योंकि पिछले चुनाव में चौथे नंबर पर रहे कांग्रेस के जितिन प्रसाद जद्दोजहद के बाद फिर यहां प्रत्याशी हैं और भाजपा की रेखा वर्मा व गठबंधन के अरशद सिद्दीकी के मैदान में होने से मुकाबला त्रिकोणीय है. मतदान संपन्न होने के बाद न्यूज़18-इप्सॉस के एग्ज़िट पोल के मुताबिक इस सीट पर फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता. यहां कड़ा मुकाबला है और जितिन प्रसाद के साथ उलटफेर की आशंका है.

क्यों अहम है धौरहरा लोकसभा सीट


धौरहरा लोकसभा सीट का इतिहास बहुत पुराना न हो, लेकिन सीट की अहमियत है. इसकी एक वजह जितिन प्रसाद का यहां से खड़ा होना है, जो पिछली बार चौथे स्थान पर रहे थे. जितेंद्र प्रसाद के पुत्र जितिन को एक समय कांग्रेस में भविष्य के बड़े नेताओं में गिना जाता था. इस लोकसभा चुनाव के शुरूआती दौर में उनकी नाराज़गी की खबर रही और उनके बीजेपी से जुड़ने के कयास भी लगे लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं और जितिन प्रसाद ने इसे महज़ अफवाह करार दिया. अब वो ऐसी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जो 2008 परिसीमन के बाद शाहजहांपुर से अलग होकर बनी. 2009 में यहां पहली बार चुनाव हुआ था. कांग्रेस के जितिन प्रसाद जीते. अगले चुनाव में वो सीट बरकरार नहीं रख पाए. मोदी लहर में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. अब 2019 के चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन होने के साथ ही यहां की लड़ाई दिलचस्प हो गई है. पिछले लोकसभा चुनाव में यहां से बीजेपी की रेखा ने जीत दर्ज की. 2019 के चुनाव में कांग्रेस के जितिन प्रसाद यहां चौथे नंबर पर रहे थे, उन्हें सिर्फ 16 फीसदी ही वोट मिले थे. इस बार इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है. एसपी-बीएसपी-आरएलडी गठबंधन में यह सीट समाजवादी पार्टी के खाते में है.

2019 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर बीजेपी, कांग्रेस और एसपी-बीएसपी गठबंधन के बीच कांटे का मुकाबला माना जा रहा है. सीट की सीमाएं और आबादी धौरहरा लोकसभा सीट सीतापुर जिले के अंतर्गत आती है. 2014 के चुनाव के अनुसार यहां पर करीब 17 लाख मतदाता हैं. सीतापुर जिला देश के 250 सबसे पिछड़े जिलों में से एक है.

इस संसदीय क्षेत्र में कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं. ये हैं धौरहरा, कास्ता, मोहम्मदी, मोहाली और हरगांव. 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की थी. 2014 के चुनाव के आंकड़ों के अनुसार, यहां करीब 15,58,041 मतदाता हैं, जिनमें से 8.4 लाख पुरुष और 7 लाख से अधिक महिला मतदाता हैं. लोकसभा चुनाव 2014 के नतीजे 2014 के चुनाव में इस सीट पर मोदी लहर का असर साफ देखने को मिला.

बीजेपी की ओर से रेखा ने करीब 34 फीसदी वोट हासिल किए और बड़ी जीत दर्ज की. उनके सामने खड़े बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार दूसरे, समाजवादी पार्टी तीसरे और कांग्रेस की ओर से पूर्व सांसद जितिन प्रसाद चौथे नंबर पर रहे. रेखा वर्मा को 3 लाख 60 हजार से अधिक वोट मिले थे. दूसरे नंबर पर बसपा के दाऊद अहमद को 2,34,000 वोट मिले थे. जितिन प्रसाद को महज़ 16 प्रतिशत मत मिले. इसके पहले 2009 में जितिन प्रसाद ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी को एक लाख पचासी हजार से अधिक मतों से पराजित किया था. इस बार किसके बीच है मुकाबला अबकी बार सपा की ओर से अरशद इलियास सिद्दीकी चुनाव मैदान में हैं, भाजपा ने अपनी सांसद को रेखा वर्मा को फिर मौका दिया है.

रेखा वर्मा ने 2014 के चुनाव में ही चुनावी राजनीति में कदम रखा. चुनाव जीतने के बाद वह संसद की कमेटियों की सदस्य भी बनीं. मलखान सिंह भी हैं मैदान में कांग्रेस से जितिन प्रसाद तो प्रगतिशील समाज पार्टी से मलखान सिंह राजपूत मैदान में हैं. मलखान सिंह के आने से लोगों में उत्सुकता बढ़ी है. चंबल के बागियों में उनका नाम लिया जाता था. बाद में उन्होंने आत्मसमर्पण किया था. मुख्य मुकाबला बीजेपी, कांग्रेस और समाजवादी प्रत्याशी के बीच माना जा रहा है.​
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