Exit Polls: ये 11 राजनीतिक संकेत दे रहे हैं एग्जिट पोल्स

Lok Sabha Election 2019 Exit Polls: यदि वास्तविक रिजल्ट में भी भाजपा को बहुमत मिलता है तो देश की राजनीतिक स्थितियां बहुत बदल जाएंगी. वह बदली हुईं राजनीतिक स्थितियां क्या होंगी, आइए आपको बताते हैं एग्जिट पोल के 11 संकेत क्या हैं-

News18Hindi
Updated: May 21, 2019, 2:36 PM IST
Exit Polls: ये 11 राजनीतिक संकेत दे रहे हैं एग्जिट पोल्स
Exit Polls: ये 11 राजनीतिक संकेत दे रहे हैं एग्जिट पोल्स.
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Updated: May 21, 2019, 2:36 PM IST
Lok Sabha Election 2019 Exit Polls: 2019 के लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण की वोटिंग रविवार को समाप्त हो गई. वोटिंग समाप्त होते ही अनेक न्यूज एजेंसियों और न्यूज चैनलों ने अपने एग्जिट पोल जारी कर दिए जिनमें फिर से बीजेपी की सरकार बनने का इशारा किया गया है. यदि वास्तविक रिजल्ट में भी भाजपा को बहुमत मिलता है तो देश की राजनीतिक स्थितियां बहुत बदल जाएंगी. वह बदली हुईं राजनीतिक स्थितियां क्या होंगी, आइए आपको बताते हैं एग्जिट पोल के 11 संकेत क्या हैं -

1)  जारी है मोदी मैजिक


एग्जिट पोल यह इशारा करता है कि 2014 से शुरू हुआ मोदी मैजिक अभी जारी है. 2019 में भी नरेंद्र मोदी सबसे मजबूत नेता बनकर सामने आए हैं. यदि वास्तविक रिजल्ट ऐसा ही रहता है तो राजनीति में मोदी का दबदबा अगले पांच वर्ष तक बने रहने की संभावना है. विपक्ष का कोई भी नेता उन्हें चुनौती देता नजर नहीं आ रहा है.

2)  एयर स्ट्राइक से उभरे राष्ट्रवाद ने दिखाया कमाल

मोदी सरकार ने पुलवामा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की थी. उसके बाद से देश में राष्ट्रवाद एक बड़ा मुद्दा बन गया. एयर स्ट्राइक के बाद लोगों में इस सरकार के प्रति राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में भरोसा मजबूत हुआ है.

3)  मोदी सरकार की योजनाओं का भी हुआ है कुछ असर
यदि वास्तविक रिजल्ट ऐसा ही रहता है तो देश में यह संदेश जाएगा कि मोदी सरकार की कुछ योजनाओं का भी असर हुआ है. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत गरीब परिवारों को एलपीजी गैस का कनेक्शन देना हो या आयुष्मान भारत योजना (ABY) या PM-JAY के तहत देश के 10 करोड़ गरीब परिवारों के करीब 50 करोड़ लोगों को 5 लाख रुपए का स्वास्थ्य सुरक्षा कवर दिया जा रहा है. मोदीकेयर के नाम से मशहूर आयुष्मान भारत योजना (ABY) 25 सितंबर से शुरू हो चुकी है.
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4) राहुल-प्रियंका पर फिर उठेंगे सवाल
अगर एग्जिट पोल की तरह ही असली नतीजे आए तो जाहिर है कि राहुल गांधी के नेतृत्व पर इस बार बड़े सवाल उठेंगे. साथ ही साथ प्रियंका गांधी भी सक्रिय राजनीति में खुलकर पदार्पण कर चुकी हैं इसलिए यूपी या पूर्वी यूपी में हार के कारण पूर्वी यूपी की प्रभारी प्रियंका गांधी पर भी सवाल उठेंगे कि उनके आने से भी कांग्रेस की सीटें नहीं बढ़ पाईं.

5) मोदी के खिलाफ एकजुट नहीं हो पाया विपक्ष
2019 के चुनाव से पहले विपक्षी एकता की कई बार पुरजोर कोशिश कई नेताओं ने की थी, लेकिन चुनाव आते-आते यूपी के महागठबंधन से कांग्रेस को बाहर कर दिया गया, इससे विपक्षी एकता धराशायी हो गई. यदि नतीजे ऐसे ही आए तो आने वाले समय में विपक्ष में और बिखराव हो सकता है. कर्नाटक में यदि कांग्रेस-जेडीएस अलग-अलग हो जाते हैं तो वहां बीजेपी को सेंध लगाने में कामयाबी मिल सकती है.

6) टूट सकते हैं पुराने गठबंधन
यदि एग्जिट पोल के जैसे ही वास्तविक नतीजे आते हैं तो भाजपानीत गठबंधन नए सिरे से बन सकता है और उसमें भाजपा का दबदबा पहले से बढ़ जाएगा. हार के कारण कांग्रेस का गठबंधन बिखर सकता है या नए दल यूपीए गठबंधन में शामिल हो सकते हैं.

7)  भारतीय राजनीति में 21वीं सदी के सबसे बड़े चाणक्य होंगे अमित शाह
यदि अधिकांश एग्जिट पोल के अनुसार भाजपा को अकेले दम पर बहुमत मिलता है तो अमित शाह 21वीं सदी में अब तक के सबसे बड़े चाणक्य मान लिए जाएंगे. ऐसे में पार्टी के भीतर जो लोग यह उम्मीद कर रहे थे कि अगर कमजोर नतीजे आए तो पार्टी के अंदरुनी समीकरण बदलेंगे, वे नेता मायूस हो जाएंगे.

8)  भाजपा की शर्तें मानेंगे एनडीए के सहयोगी दल
अगर वास्तविक नतीजे ऐसे ही आते हैं तो एनडीए के सहयोगी दल तो सरकार में होंगे ही लेकिन उनकी प्रासंगिकता पहले से कम हो सकती है. वे अपनी शर्तें नरेंद्र मोदी और भाजपा पर नहीं थोप पाएंगे बल्कि वे बीजेपी की शर्तों पर ही एनडीए में रह सकेंगे.

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9) बढ़ेगा क्षेत्रीय दलों से टकराव
यदि एग्जिट पोल नतीजों में बदल गए तो यह हो सकता है कि बीजेपी और क्षेत्रीय दलों के टकराव में कमी आए और वे बीजेपी के साथ नजदीकी बढ़ाएं लेकिन पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में क्या होगा, इसका फैसला टीएमसी को कितनी सीटें मिलती हैं उसके आधार पर ममता बनर्जी ले सकती हैं.

10) कांग्रेस की प्रदेश सरकारों पर संकट
अगर नतीजे एग्जिट पोल जैसे ही रहे तो कांग्रेस की ऐसी सरकारों पर संकट आ सकता है, जो कम बहुमत या फिर सहयोगी दलों के सहारे सत्ता में हैं. राजस्थान और मध्यप्रदेश में यही स्थिति हो सकती है. वैसे मध्यप्रदेश में तो कांग्रेस के पास अपना बहुमत ही नहीं है और कर्नाटक में कांग्रेस जेडीएस के सहारे सत्ता में है.

11) ओडिशा और पश्चिम बंगाल में बढ़ेगा भाजपा का दबदबा
एग्जिट पोल से ये संकेत मिले हैं कि बीजेपी का आधार सिर्फ ओडिशा और पश्चिम बंगाल में बढ़ रहा है लेकिन हिन्दी बेल्ट में उसने बाकी दलों को बैकफुट पर धकेल दिया है. ऐसे में हिन्दी बेल्ट में बीजेपी के विरोधी दल बेहद कमजोर होते नजर आ रहे हैं.
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