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Explained: क्यों बेहद खास है स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर IAC-1 विक्रांत?

मौजूदा समय में सिर्फ पांच या छह देशों के पास विमानवाहक पोत बनाने की क्षमता है.  भारत अब इस खास क्लब में शामिल हो गया है (आईएनएस विक्रांत की फाइल फोटो)

मौजूदा समय में सिर्फ पांच या छह देशों के पास विमानवाहक पोत बनाने की क्षमता है. भारत अब इस खास क्लब में शामिल हो गया है (आईएनएस विक्रांत की फाइल फोटो)

IAC-1 Vikrant: मौजूदा समय में सिर्फ पांच या छह देशों के पास विमानवाहक पोत बनाने की क्षमता है. भारत अब इस खास क्लब में शामिल हो गया है. नौसेना के अनुसार, IAC-1 बोर्ड पर 76 प्रतिशत से अधिक चीजें और उपकरण स्वदेशी हैं

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    नई दिल्ली. भारत के पहले स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर ‘विक्रांत’ (IAC-1 Vikrant) का समुद्र में परीक्षण बुधवार को शुरू हो गया. ये देश में निर्मित सबसे बड़ा और विशालकाय युद्धपोत है. विक्रांत को अगले साल अगस्त तक नौसेना में शामिल करने की योजना है और इसके पहले ये एक बड़ी उपलब्धि है. भारतीय नौसेना ने इस अवसर को देश के लिए ‘गौरवान्वित करने वाला और ऐतिहासिक’ दिन बताया और कहा कि इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों में शुमार हो गया है, जिनके पास स्वदेश में डिजाइन करने, निर्माण करने और अत्याधुनिक विमानवाहक पोत तैयार करने की विशिष्ट क्षमता है.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के पहले स्वदेश निर्मित विमानवाहक पोत ‘विक्रांत’ को ‘मेक इन इंडिया’ का बेहतरीन नमूना बताया और इसके समुद्री परीक्षण की ‘ऐतिहासिक’ उपलब्धि पर नौसेना को बधाई दी.

    क्या है इस एयरक्राफ्ट कैरियर विक्रांत की खासियत आइए विस्तार से जानते हैं…

    क्या है IAC-1 विक्रांत?
    ये भारत में डिजाइन और निर्मित पहला विमानवाहक पोत है. विमानवाहक पोत एक राष्ट्र के लिए सबसे शक्तिशाली समुद्री संपत्तियों में से एक होता है. ये नौसेना की क्षमता को बढ़ाता है. एक्सपर्ट के मुताबिक ये एक राष्ट्र की ताकत और शक्ति को प्रोजेक्ट करने की क्षमता रखता है. भारत के पास अभी सिर्फ एक विमानवाहक जहाज ‘आईएनएस विक्रमादित्य’ है. भारतीय नौसेना, हिंद महासागर क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की चीन की बढ़ती कोशिशों के मद्देनजर अपनी संपूर्ण क्षमता महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने पर जोर दे रही है. हिंद महासागर, देश के रणनीतिक हितों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है.

    एक मेड-इन-इंडिया युद्धपोत के क्या मायने हैं?
    मौजूदा समय में सिर्फ पांच या छह देशों के पास विमानवाहक पोत बनाने की क्षमता है. भारत अब इस खास क्लब में शामिल हो गया है. विशेषज्ञों और नौसेना के अधिकारियों ने कहा कि भारत ने दुनिया के सबसे उन्नत और जटिल युद्धपोतों में से एक माने जाने वाले के निर्माण के लिए क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन किया है. भारत के पहले के विमान वाहक या तो ब्रिटेन या रूस द्वारा बनाए गए थे. देश के पहले के दो वाहक, आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विराट, क्रमशः 1961 और 1987 में नौसेना में शामिल होने से पहले मूल रूप से ब्रिटिश निर्मित एचएमएस हरक्यूलिस और एचएमएस हर्मीस थे.

    नौसेना के अनुसार, IAC-1 (Indigenous Aircraft Carrier -1) बोर्ड पर 76 प्रतिशत से अधिक चीजें और उपकरण स्वदेशी हैं इसमें 23000 टन स्टील, 2500 किमी इलेक्ट्रिक केबल, 150 किलोमीटर पाइप, 2000 वाल्व और कठोर पतवार वाली नावों, गैली उपकरण, एयरकंडीशनिंग और रेफ्रिजरेशन प्लांट और स्टीयरिंग गियर सहित तैयार उत्पादों की एक सीरीज़ शामिल है.

    इस प्रोजेक्ट पर कितना आया खर्चा?
    नौसेना ने कहा है कि 50 से अधिक भारतीय निर्माता सीधे परियोजना में शामिल थे और लगभग 2,000 भारतीयों को प्रतिदिन IAC-1 बोर्ड पर प्रत्यक्ष रोजगार मिला. 40,000 से अधिक अन्य अप्रत्यक्ष रूप से कार्यरत थे. नौसेना का अनुमान है कि लगभग 23,000 करोड़ रुपये की परियोजना लागत का लगभग 80-85 प्रतिशत भारतीय अर्थव्यवस्था में वापस लगाया गया है.

    इस युद्धपोत का नाम INS विक्रांत क्यों रखा जाएगा?
    आईएनएस विक्रांत, एक मैजेस्टिक-क्लास 19,500-टन का युद्धपोत, भारत के सबसे पसंदीदा पहले विमान वाहक का नाम था. 1997 में रिटायर होने से पहले इसने कई दशकों की सेवा कर देश का सम्मान बढ़ाया. भारत ने 1961 में यूनाइटेड किंगडम से विक्रांत का अधिग्रहण किया. विक्रांत ने पाकिस्तान के साथ 1971 के युद्ध में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिसके कारण बांग्लादेश का जन्म हुआ. विक्रांत को बंगाल की खाड़ी में तैनात किया गया था.

    नए विक्रांत में कौन से हथियार और उपकरण होंगे?
    नौसेना ने आधिकारिक तौर पर उन हथियारों और विमानों के विशिष्ट विवरण का खुलासा नहीं किया है जिन्हें आईएनएस विक्रांत ले जाएगा. हालांकि, नया युद्धपोत भारत के मौजूदा वाहक आईएनएस विक्रमादित्य से तुलनीय है, जो 44,500 टन का पोत है और लड़ाकू जेट और हेलीकॉप्टर दोनों सहित 34 विमान तक ले जा सकता है.

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