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मेडिकल कोर्सेस में आरक्षण के क्या हैं मायने, कैसे होगा लागू, जानें सब कुछ

इसके जरिए देश भर के ओबीसी और ईडब्ल्यूएस छात्रों को किसी भी राज्य में सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे. (सांकेतिक तस्वीर)

इसके जरिए देश भर के ओबीसी और ईडब्ल्यूएस छात्रों को किसी भी राज्य में सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे. (सांकेतिक तस्वीर)

सरकार के सूत्रों के मुताबिक चिकित्सा अभ्यर्थियों की ओर से चिकित्सा शिक्षा के अखिल भारतीय कोटे में ओबीसी आरक्षण देने की लंबे समय से मांग की जा रही है. देश की विभिन्न अदालतों में कई मुकदमे भी हुए हैं लेकिन यह मामला लंबे समय से लंबित था.

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    नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने गुरुवार को अंडरग्रेजुएट और पीजी कोर्स के मेडिकल/डेंटल कोर्सेज में एडमिशन के लिए ओबीसी वर्ग में 27% और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए 10 फीसदी आरक्षण देने का ऐलान किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अखिल भारतीय चिकित्सा शिक्षा कोटे में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) आरक्षण के मुद्दे की समीक्षा की और संबंधित मंत्रालयों को इसे प्राथमिकता के आधार पर हल करने का निर्देश दिया था.

    सरकार के सूत्रों के मुताबिक चिकित्सा अभ्यर्थियों की ओर से चिकित्सा शिक्षा के अखिल भारतीय कोटे में ओबीसी आरक्षण देने की लंबे समय से मांग की जा रही है. देश की विभिन्न अदालतों में कई मुकदमे भी हुए हैं लेकिन यह मामला लंबे समय से लंबित है.

    सरकार के इस फैसले से ओबीसी और ईडब्लूएस समुदाय पर क्या असर पड़ेगा-

    >> अखिल भारतीय कोटा जिसमें भारत सरकार ने आरक्षण दिया है वह देश भर के सरकारी मेडिकल कॉलेज की सभी उपलब्ध सीटों के 15 फीसदी पर लागू होगा और पीजी की उपलब्ध 50 फीसदी सीटों पर लागू होगा.

    >> इन कॉलेजों में अन्य 85 फीसदी यूजी सीटें और 50 फीसदी पीजी सीटें संबंधित राज्यों की सरकार की ओर से राज्यों के उम्मीदवारों के लिए होंगी.

    >>आखिल भारतीय कोटा स्कीम 1986 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से शुरू की गई थी. इसका उद्देश्य किसी भी राज्य के छात्रों को दूसरे राज्य में स्थित एक अच्छे मेडिकल कॉलेज में अध्ययन करने की इच्छा रखने के लिए डोमिसाइल-फ्री योग्यता आधारित अवसर प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी.

    >>इसलिए सरकार का फैसला इस कॉलेजों की बची हुई 15 फीसदी यूजी सीटों और 50 फीसदी पीजी सीटों पर होने वाले दाखिलों को प्रभावित करेगा.

    >>अब इसके जरिए देश भर के ओबीसी और ईडब्ल्यूएस छात्रों को किसी भी राज्य में सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे.

    >>2007 में सुप्रीम कोर्ट ने आखिल भारतीय कोटा स्कीम के तहत अनुसूचित जाति को 15 फीसदी आरक्षण और अनुसूचित जनजाति को 7.5 फीसदी आरक्षण दिया था.

    >>जब 2007 में केंद्रीय शिक्षा संस्थान (शिक्षा में आरक्षण) अध्यादेश पारित किया गया था तब इसमें कि ओबीसी वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण दिया गया था. जब इसे सभी केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में लागू किया गया तब ये फायदा राज्य मेडिकल और डेंटल कॉलेज की अखिल भारतीय सीटों तक नहीं पहुंच सका.

    >>ये फैसला पूरे देश के ओबीसी समुदाय के छात्रों को अखिल भारतीय कोटे के तहत सभी राज्यों में आवेदन करने का मौका देगा. ओबीसी की केंद्रीय सूची में शामिल समुदाय इसके तहत आवेदन करने के लिए पात्र होंगे.

    >>भारत में एमबीबीएस सीटों में 56 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. 2014 में देश में 54,348 सीटें थीं जो कि
    2020 में बढ़कर 84,649 हो गई हैं. वहीं देश में पीजी सीटों में 80 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. 2014 में यह मात्र 30,191 थीं जबकि 2020 में यह बढ़कर 54,275 हो गईं.

    >>देश में पिछले 6 सालों में 179 नए मेडिकल कॉलेज बन जाने से एमबीबीएस और पीजी की सीटों में क्रमशः 56 और 80 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. सरकार का दावा है कि यह फैसला करीब 1500 ओबीसी छात्रों को एमबीबीएस और 2500 छात्रों को पीजी दाखिले में मदद करेगा. करीब 550 ईडब्यूएस छात्र एमबीबीएस और करीब 1000 ईडब्लूएस छात्र पीजी आवेदन में मदद मिलेगी.

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