Explained: कोवैक्सिन को मंजूरी देने से पहले आज WHO की बैठक में क्‍या होगा?

77.8 फीसदी प्रभावी है कोवैक्सिन. (File pic)

कोवैक्सिन (Covaxin) देश की पहली वैक्‍सीन (Corona Vaccine) है जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) के पास आपातकाल में इस्‍तेमाल की मंजूरी के लिए मूल्‍यांकन के लिए भेजा गया है.

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    नई दिल्‍ली. भारत की स्‍वदेशी कोरोना वैक्‍सीन कोवैक्सिन (Covaxin) की अब तक 2.5 करोड़ डोज लगाई जा चुकी हैं. यह 77.8 फीसदी तक प्रभावी बताई गई है. इसके साथ ही यह देश की पहली वैक्‍सीन (Corona Vaccine) है जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) के पास आपातकाल में इस्‍तेमाल की मंजूरी के लिए मूल्‍यांकन के लिए भेजा गया है. इस संबंध में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत बायोटेक (Bharat Biotech) की कोवैक्सिन के लिए रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) प्रस्ताव को स्वीकार लिया है. अब टीके को मंजूरी के संबंध में दस्तावेज सौंपे जाने के पहले 23 जून को डब्ल्यूएचओ के साथ बैठक होनी है. अगर इसे डब्‍ल्‍यूएचओ की ओर से मंजूरी मिलती है तो यह बड़ी सफलता होगी. ऐसे में कोवैक्सिन लगवाने वाले लोग विदेश यात्रा कर सकेंगे.

    [q]क्‍यों अहम है WHO के साथ आज की बैठक?[/q]
    [ans]विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया भर में कुल सात वैक्‍सीन निर्माताओं के लिए आपातकालीन इस्‍तेमाल की अनुमति दी है. इनमें से तीन ऑक्सफोर्ड-एस्ट्रेजेनेका वैक्सीन का उत्पादन करने वालों के लिए हैं, जो विभिन्न राष्ट्रीय स्तर के नियामकों से जुड़े प्रस्‍तुतियों के साथ हैं. इनमें से एक सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया भी है. अन्य वैक्सीन निर्माता फाइजर-बायोएनटेक, मॉडर्ना, जेनसेन और चीनी सिनोफार्म हैं.

    जब भारत ने आपातकालीन उपयोग के लिए विदेशी कोरोना टीकों के लिए शीघ्र मंजूरी की पेशकश की तो कहा था कि डब्ल्यूएचओ द्वारा अंतरिम उपयोग के लिए जिन टीकों को मंजूरी दी गई है, उनके भारत में लॉन्च होने का स्वागत है. डब्ल्यूएचओ के अलावा कहा गया था कि अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और जापानी नियामकों द्वारा स्वीकृत टीकों के लिए भी भारत में टीकाकरण के लिए आवेदन किया जा सकता है. कोवैक्सिन को भारत में आपातकालीन इस्‍तेमाल की अनुमति मिली हुई है, लेकिन इससे इसके उपयोग को लेकर होने वाले विवाद और अनिश्चितता को रोका नहीं जा सका है.

    महत्वपूर्ण बात यह है कि डब्ल्यूएचओ की मंजूरी भारत बायोटेक को अन्य देशों और निर्माताओं के समक्ष अपनी वैक्‍सीन या तकनीक को विश्व स्तर पर बढ़ावा देने के लिए अधिक आसानी से पेश करने की राह दिखाएगी. डब्ल्यूएचओ के अनुसार इमरजेंसी इस्‍तेमाल की सूची देशों को कोविड -19 टीकों के आयात और प्रशासन के लिए अपने स्वयं के नियामक अनुमोदन में तेजी लाने की अनुमति देता है. कोवैक्स एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन है जो गरीब देशों के लिए समान वैक्सीन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है.[/ans]

    [q]भारत में कोवैक्सिन को मंजूरी की प्रक्रिया क्‍या थी?[/q]
    [ans]भारत में ड्रग्‍स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने जनवरी में पहले और दूसरे चरण के आधार पर कोवैक्सिन के आपातकालीन इस्‍तेमाल की मंजूरी दी थी. मंजूरी देते हुए अधिकारियों ने कहा था कि अनुमति आपातकालीन स्थिति में प्रतिबंधित उपयोग के लिए सार्वजनिक हित में एहतियात के तौर पर दी जाती है.

    वैक्सीन की मंजूरी के लिए समीक्षा किए जाने से पहले आमतौर पर क्‍लीनिकल ट्रायल के तीन चरण शामिल होते हैं. भारत बायोटेक ने इस साल मार्च में अपने तीसरे चरण के परीक्षणों के अंतरिम परिणामों की घोषणा की थी और डब्ल्यूएचओ के साथ अपनी बैठक से कुछ दिन पहले 25,800 व्यक्तियों से जुड़े परीक्षणों से अंतिम डाटा साझा किया. इसमें कोवैक्सिन के 77.8 फीसदी प्रभावी होने का दावा किया गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि तीसरे ट्रायल के आंकड़ों की समीक्षा विशेषज्ञों द्वारा की जा रही है.

    हाल ही में यूएस ड्रग रेगुलेटर ने सलाह दी थी कि कोवैक्सिन को उस देश में पूर्ण स्वीकृति लेनी चाहिए, न कि आपातकालीन इस्‍तेमाल की अनुमति. इसे अमेरिका में वैक्सीन को तेजी से लॉन्च करने की दिशा में एक झटके के रूप में देखा गया था, जिसे पहले से ही घरेलू टीकाकरण की जरूरतों को पूरा करने के लिए टीकों के अच्छे भंडार के रूप में देखा जा रहा है.[/ans]

    [q]क्‍या है WHO की आपात इस्तेमाल सूचीबद्ध प्रक्रिया?[/q]
    [ans]डब्ल्यूएचओ के दिशा-निर्देश के मुताबिक आपात इस्तेमाल सूचीबद्ध (ईयूएल) ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत लोक स्वास्थ्य संकट के समय नए या गैर लाइसेंस प्राप्त उत्पादों के इस्तेमाल की मंजूरी दी जाती है. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक औषधि के दस्तावेज सौंपे जाने से पहले की बैठक में सलाह और मशविरा का अवसर दिया जाता है. आवेदनकर्ता को डब्ल्यूएचओ के मूल्यांकन करने वालों से मुलाकात का भी मौका मिलता है जो कि उस उत्पाद की समीक्षा में शामिल होंगे. डब्ल्यूएचओ ने दस्तावेज सौंपे जाने से पहले की इस बैठक के बारे में बताया है कि दस्तावेज सौंपे जाने से पहले की बैठक में आंकड़ों या अध्ययन रिपोर्ट की विस्तृत समीक्षा नहीं की जाती. बैठक का महत्वपूर्ण पहलू उत्पाद के बारे में एक समग्र संक्षिप्त विवरण पेश करना है.[/ans]

    [q]कोवैक्सिन को कैसे बनाया गया है?[/q]
    [ans]कोरोना वैक्‍सीन कोवैक्सिन को भारत का पहला स्वदेशी कोविड-19 वैक्सीन होने का गौरव प्राप्त है और इसे भारत बायोटेक द्वारा भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) के सहयोग से विकसित किया गया था. भारत बायोटेक ने कहा है कि वैक्सीन में "मृत वायरस है, जो लोगों को संक्रमित करने में असमर्थ है, लेकिन फिर भी यह प्रतिरक्षा प्रणाली को एक रक्षात्मक प्रतिक्रिया विकसित करने का निर्देश देता है.[/ans]

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