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बैंकॉक में पीएम मोदी ने क्यों नहीं किया RCEP समझौता, विदेश मंत्री ने बताई ये वजह

News18Hindi
Updated: November 14, 2019, 11:26 PM IST
बैंकॉक में पीएम मोदी ने क्यों नहीं किया RCEP समझौता, विदेश मंत्री ने बताई ये वजह
आरसीईपी से जुड़ी वार्ता साल 2012 में आसियान की ओर से शुरू की गई थी. Photo.AP

विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने कहा, इस समझौते से जुड़ने से पहले हमारी निगाहें हर कैल्कुलेशन पर थी. इससे क्या हमें फायदे होंगे और क्या नुकसान होंगे. हमने इसके लिए आखिरी समय तक बातचीत की. इसके बाद इसमें शामिल नहीं होने का फैसला लिया गया.

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  • Last Updated: November 14, 2019, 11:26 PM IST
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नई दिल्ली. बैंकॉक (Bangkok) में भारत ने आरसीईपी (RCEP) समझौते पर साइन करने से आखिरी समय पर इनकार कर दिया था. पहले कहा जा रहा था कि भारत इस इस समझौते में शामिल हो सकता है, लेकिन बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने इससे इनकार कर दिया. इस मुद्दे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) में भारत के न जुड़ने पर कहा कि कोई बुरा समझौता करने से अच्छा है कोई समझौता न किया जाए. विदेश मंत्री ने कहा, इस समझौते से जुड़ने से पहले हमारी निगाहें हर कैल्कुलेशन पर थी. इससे क्या हमें फायदे होंगे और क्या नुकसान होंगे. हमने इसके लिए आखिरी समय तक बातचीत की. इसके बाद इसमें शामिल नहीं होने का फैसला लिया गया.

बता दें कि आरसीईपी (RCEP) से जुड़ी वार्ता साल 2012 में आसियान (Asian) की ओर से शुरू की गई थी. इसके सदस्यों में 10 आसियान देश, चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं. आरसीईपी समझौते में 3.5 अरब जनसंख्या शामिल है, जो दुनिया की कुल जनसंख्या का 48 प्रतिशत है. भारत ने अभी हाल में इससे जुड़ने से इनकार कर दिया था.

'हमारा जोर संप्रभुता पर'
विदेश मंत्री ने कहा, इस समझौते में शामिल न होने का ये अर्थ नहीं है कि हमने अपनी लुक एट ईस्ट पॉलिसी (Look at east Policy) को बदल दिया है. राजधानी दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर (External affairs Minister S. Jaishankar) ने कहा, हमारा जोर संप्रभुता पर है. लेकिन इसका अर्थ ये नहीं है कि हम अपने आपको पड़ोसी देशों में मानवाधिकारों का समर्थन करने से रोक रहे हैं.

विदेश मंत्री ने कहा, भारत को विभिन्न एजेंडों पर कई सहयोगियों के साथ काम करने के दृष्टिकोण का पालन करने की आवश्यकता है. जाहिर है सभी की अपने महत्व और प्राथमिकताएं होंगी. लेकिन आज सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के फॉर्मूले पर विदेश नीति को आगे बढ़ाने की जरूरत है.

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First published: November 14, 2019, 10:30 PM IST
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