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BBMC-पुलिस दोनों ने नहीं ली झुग्गियां ढहाने की जिम्मेदारी, जज ने पूछा- 'क्या बाहरी ताकतों ने किया ऐसा?'

News18Hindi
Updated: January 22, 2020, 9:27 PM IST
BBMC-पुलिस दोनों ने नहीं ली झुग्गियां ढहाने की जिम्मेदारी, जज ने पूछा- 'क्या बाहरी ताकतों ने किया ऐसा?'
करियाम्मना अग्रहारा इलाके में ढ़हाई जा रही झुग्गियों की फाइल फोटो (फोटो- फहद खालिद)

पुलिस और BBMP दोनों ही इसकी जिम्मेदारी लेने से पीछे हट रहे हैं, जिसके बाद जस्टिस श्रीनिवास ओका (Justice Shreeniwas Oka) ने राज्य से इसका दोष खुद पर लेने को कहा है क्योंकि यह सब कुछ स्थानीय मराथल्ली पुलिस (Local Marathalli Police) के पास से आए एक पत्र के बाद शुरू हुआ.

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  • Last Updated: January 22, 2020, 9:27 PM IST
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(स्टेसी परेरिया)

बेंगलुरु. कर्नाटक (Karnataka) के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) ने बुधवार को बेंगलुरु पुलिस और बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) दोनों के बेंगलुरु में 100 झुग्गियों को ढहाए जाने की जिम्मेदारी लेने से पीछे हटने के बाद दोनों को आमने-सामने खड़ा किया.

कर्नाटक (Karnataka) के मुख्य न्यायाधीश अभय श्रीनिवास ओका ने पूछा, "क्या यह कोई बाहरी ताकती थी जिसने ये ढहाए जाने का काम किया?" इस दौरान वे करियाम्मा अग्रहारा (Kariyammana Agrahara) इलाके में 18 जनवरी को 100 से भी ज्यादा 'कच्चे' घरों को तोड़े जाने और सैकड़ों लोगों को बेघर किए जाने के खिलाफ दाखिल की गई जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रहे थे.

'क्या राज्य लेगा इन झुग्गियों को ढहाए जाने की जिम्मेदारी?'

पुलिस और BBMP दोनों ही इसकी जिम्मेदारी लेने से पीछे हटे हैं, जिसके चलते जस्टिस श्रीनिवास ओका पूछने पर मजबूर हो गए कि क्या राज्य इसकी जिम्मेदारी लेगा क्योंकि यह सब कुछ स्थानीय मराथल्ली पुलिस के पास से आए एक पत्र के बाद शुरू हुआ.

पुलिस ने ढहाने का काम किया और आरोप लगाया कि जमीन पर रहने वाले 'गैरकानूनी बांग्लादेशी प्रवासी' (Illegal Bangladeshi Migrants) हैं. पुलिस ने ही यह भी दावा किया कि इस जमीन को खाली कराने के लिए जमीन के मालिक को एक नोटिस इसे खाली करने के लिए भेजा गया.

'कार्रवाई में एक समुदाय के खिलाफ भेदभाव': PILPIL को पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) ने दाखिल किया है. जिसने तर्क दिया है कि BBMP और पुलिस की कार्रवाई एक सामूहिक आपराधिकता का काम था क्योंकि इसमें एक समुदाय के खिलाफ भेदभाव किया गया था. और यह संविधान के अनुच्छेद 14,19 (d) (e).

न्यायाधीश ने कहा, "पहले सरकार को पुलिस (Police) से आए पत्र को वापस लेना होगा. पुलिस को इस तरह की कार्रवाई करने का हक कैसे है? क्या वे पूरे शहर की सभी गैरकानूनी इमारतों के साथ ऐसा करेंगे?"

इस मामले में 30 जनवरी को अगली सुनवाई होनी है.

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First published: January 22, 2020, 9:27 PM IST
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