चीनी आक्रामकता के बीच भारत, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया की पहली संयुक्त बातचीत

चीनी आक्रामकता के बीच भारत, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया की पहली संयुक्त बातचीत
वीडियो कॉन्फरेंस से संपन्न हुई बैठक के दौरान भारत के विदेश सचिव हर्षवर्द्धन श्रृंगला (मध्य में).

भारत, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया (India, France & Australia) ने पहली बार संयुक्त वार्ता की है. वार्ता का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific Region) में सहयोग को बढ़ाना है. इस क्षेत्र में चीन की आक्रामकता को लेकर वैश्विक चिंता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 9, 2020, 8:42 PM IST
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नई दिल्ली. चीन की बढ़ती आक्रामकता (Chinese Aggression) के मद्देनजर भारत,फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया (India, France & Australia) ने पहली बार संयुक्त वार्ता की है. वार्ता का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific Region) में सहयोग को बढ़ाना है. गौरतलब है कि इस क्षेत्र में चीन की आक्रामकता को लेकर वैश्विक चिंता है. वीडियो कॉन्फरेंसिंग के जरिए हुई इस वार्ता में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश सचिव हर्षवर्द्धन श्रृंगला ने किया.

वार्ता का मुख्य उद्देश्य हिंद प्रशांत क्षेत्र में तीनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाना
विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य हिंद प्रशांत क्षेत्र में तीनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाना था. वार्ता के दौरान कोविड-19 महामारी के मद्देनजर आपसी सहयोग को लेकर भी चर्चा हुई.


फ्रांस ने भारत को एशिया में अपना अग्रणी सामरिक साझेदार करार दिया


गौरतलब है कि इससे पहले बुधवार को ही फ्रांस ने भारत को एशिया में अपना अग्रणी सामरिक साझेदार करार दिया और कहा कि उनकी रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ले की आसन्न यात्रा का मकसद भारत के साथ ‘दूरगामी’ प्रभाव वाले रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाना है. पार्ले गुरुवार को भारत आ रही हैं.

भारत और चीन के बीच चार महीने से जारी है सीमा विवाद
इस वक्त भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद को लेकर दुनियाभर की निगाहें दोनों देशों पर टिकी हुई हैं. चीन द्वारा सीमाओं के अतिक्रमण को लेकर भारत ने बिल्कुल स्पष्ट संदेश दिया है. भारत की तरफ से चीन को साफ किया जा चुका है कि द्विपक्षीय संबंधों के लिए सीमाओं पर शांति पहली प्राथमिकता है.

इस बीच बुधवार रात भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की मॉस्को में मुलाकात होगी. माना जा रहा है कि इस बातचीत में सीमा विवाद को लेकर कोई ठोस हल निकल सकता है. भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल में ही साफ किया था चीन के साथ हमारे संबंधों को सीमा विवाद से अलग करके नहीं देखा जा सकता.
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