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फेसबुक विवाद: बीजेपी सांसद राज्यवर्धन सिंह ने लिखा लोकसभा स्पीकर को पत्र, कहा- थरूर ने किया निमयों का उल्लंघन

बीजेपी सांसद का कहना है कि थरूर ने नियमों का उल्लंघन किया है.

बीजेपी सांसद का कहना है कि थरूर ने नियमों का उल्लंघन किया है.

Facebook controversy : राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने पत्र में कहा, 'कमेटी के सदस्य किसी के सम्मान करने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन कमेटी के नियमों का शशि थरूर ने उल्लंघन किया. कमेटी सदस्यों से बिना चर्चा के नोटिस भेजा गया.'

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 20, 2020, 2:38 PM IST
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नई दिल्ली. राजनीतिक गलियारों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक को लेकर विवाद (Facebook Controversy) बढ़ता जा रहा है. कांग्रेस सांसद और आईटी स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष शशि थरूर (Shashi Tharoor) के खिलाफ कमेटी के सदस्य और बीजेपी सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ (Rajyavardhan Singh Rathore) ने लोकसभा स्पीकर (Lok Sabha speaker) को एक पत्र लिखा है. अपने पत्र में राज्यवर्धन सिंह ने कहा है कि शशि थरुर ने संसदीय कमेटी के नियमों का उल्लंघन किया है.

राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने पत्र में कहा, 'कमेटी के सदस्य किसी के सम्मान करने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन कमेटी के नियमों का शशि थरूर ने उल्लंघन किया. कमेटी सदस्यों से बिना चर्चा के नोटिस भेजा गया.' उन्होंने आगे कहा, कमेटी सदस्यों को बताए बिना मीडिया में मामले को लीक किया ग़या जो नियमों के खिलाफ है. राठौड़ की तरफ से लोकसभा स्पीकर को ये पत्र ऐसे समय में लिखा गया है जब कमेटी के चेयमैन शशि थरूर और सदस्य निशिकांत दुबे एक-दूसरे के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दे चुके हैं.

क्या कहा था शशि थरूर ने?
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसद की स्थायी समिति के समक्ष फेसबुक अधिकारियों को तलब करने की बात कही थी. थरूर इस समिति के अध्यक्ष हैं. थरूर ने ट्वीट किया था कि संसद की स्थायी समिति निश्चित रूप से इन रिपोर्टों के बारे में फेसबुक का जवाब जानना चाहती है. समिति यह जानना चाहती है कि भारत में हेट स्पीच को लेकर उनका क्या रुख है. थरूर ने कहा है कि हमारी संसदीय समिति सामान्य मामलों में नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा और सामाजिक/ऑनलाइन न्यूज मीडिया प्लेटफार्मों के दुरुपयोग को रोकने के तहत बयान पर विचार करेगी. यह विषय समिति के अधिकार क्षेत्र में है और पिछले दिनों फेसबुक को तलब किया गया था.
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ विवाद


पूरा विवाद अमेरिकी अखबार 'वाल स्ट्रीट जर्नल' की ओर से प्रकाशित रिपोर्ट के बाद आरंभ हुआ. इस रिपोर्ट में फेसबुक के अनाम सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि फेसबुक के वरिष्ठ भारतीय नीति अधिकारी ने कथित तौर पर सांप्रदायिक आरोपों वाली पोस्ट डालने के मामले में तेलंगाना के एक भाजपा विधायक पर स्थायी पाबंदी को रोकने संबंधी आंतरिक पत्र में दखलंदाजी की थी. अब कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल द्वारा जुकरबर्ग को ईमेल के माध्यम से पत्र भेजा गया है.

फेसबुक ने दी मामले पर सफाई
फेसबुक ने इस तरह के आरोपों के बीच सफाई देते हुए कहा था कि उसके मंच पर ऐसे भाषणों और सामग्री पर अंकुश लगाया जाता है, जिनसे हिंसा फैलने की आशंका रहती है. इसके साथ ही कंपनी ने कहा कि उसकी ये नीतियां वैश्विक स्तर पर लागू की जाती हैं और इसमें यह नहीं देखा जाता कि यह किस राजनीतिक दल से संबंधित मामला है.
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