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संसदीय समिति के सामने पेश हुए फेसबुक इंडिया चीफ, बजरंग दल से जुड़े दावों पर दी सफाई

सांकेतिकत तस्वीर
सांकेतिकत तस्वीर

फेसबुक इंडिया (Facebook India) के प्रमुख अजित मोहन संसद की समिति के समक्ष पेश हुए और उनसे बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने को लेकर अनिच्छा से संबंधित रिपोर्ट पर सवाल किया गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 17, 2020, 5:38 PM IST
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नई दिल्ली. फेसबुक इंडिया (Facebook India) के प्रमुख अजित मोहन बुधवार को संसद की एक समिति के समक्ष पेश हुए और उनसे कर्मचारियों की सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर बजरंग दल (Bajrang Dal) पर प्रतिबंध लगाने को लेकर सोशल मीडिया दिग्गज की अनिच्छा से संबंधित रिपोर्ट पर सवाल किया गया.

मोहन बुधवार को कांग्रेस नेता शशि थरूर की अध्यक्षता वाली सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसद की स्थायी समिति के समक्ष पेश हुए. समिति ने उन्हें नागरिक डाटा सुरक्षा के मुद्दे पर तलब किया था. मोहन के साथ फेसबुक के लोक नीति निदेशक शिवनाथ ठुकराल भी थे.

सूत्रों ने बताया कि थरूर के साथ कांग्रेस नेता कार्ति चिरंबरम ने मोहन से बजरंग दल पर प्रतिबंध से जुड़ी वाल स्ट्रीट जर्नल की हाल की रिपोर्ट के बारे में सवाल किया. वाल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में कहा गया है कि बजरंग दल पर प्रतिबंध की बात से जुड़े आंतरिक मूल्यांकन के बावजूद फेसबुक ने वित्तीय कारणों और अपने कर्मचारियों की सुरक्षा चिंताओं के कारण उस पर लगाम नहीं लगाया.




बजरंग दल की सामग्री में ऐसा कुछ नहीं जिससे प्रतिबंध लगाने की जरूरत हो : फेसबुक इंडिया प्रमुख
अजित मोहन ने बुधवार को संसद की एक समिति को बताया कि सोशल मीडिया कंपनी की तथ्य अन्वेषण टीम को ऐसी कोई सामग्री नहीं मिली, जिससे बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की जरूरत हो. सूत्रों ने यह जानकारी दी.

मोहन के साथ फेसबुक के लोक नीति निदेशक शिवनाथ ठुकराल भी थे.  उन्होंने बताया कि इन सवालों के जवाब में मोहन ने समिति के सदस्यों को बताया कि कंपनी की तथ्य अन्वेषण टीम को ऐसी कोई सामग्री नहीं मिली, जिससे बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की जरूरत हो.

वाल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में कहा गया है कि बजरंग दल पर प्रतिबंध की बात से जुड़े आंतरिक मूल्यांकन के बावजूद फेसबुक ने वित्तीय कारणों और अपने कर्मचारियों की सुरक्षा चिंताओं के कारण उस पर लगाम नहीं लगायी. सूत्रों ने बताया कि भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने पूछा कि अगर बजरंग दल को लेकर सोशल मीडिया नीतियों के उल्लंघन की बात नहीं पायी गई है कि तब फेसबुक ने वाल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट को खारिज कर उन्हें फर्जी क्यों नहीं बताया.
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