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Coronavirus: डेल्टा वेरिएंट का खतरा, केंद्र ने राज्यों से जीनोम सीक्वेंसिंग और हर जिले में सैंपल साइट बनाने को कहा

Coronavirus: डेल्टा वेरिएंट का खतरा, केंद्र ने राज्यों से जीनोम सीक्वेंसिंग और हर जिले में सैंपल साइट बनाने को कहा

डेल्टा वेरिएंट से व्याप्त खतरे को थामने के लिए राज्यों ने जांच केंद्रों के साथ आरटी-पीसीआर लैब और अस्थायी हेल्थ केयर फैसिलिटीज तैयार की हैं. (File pic)

डेल्टा वेरिएंट से व्याप्त खतरे को थामने के लिए राज्यों ने जांच केंद्रों के साथ आरटी-पीसीआर लैब और अस्थायी हेल्थ केयर फैसिलिटीज तैयार की हैं. (File pic)

Delta+ variant Genome Sequencing: भारत में 30 जून तक डेल्टा प्लस वेरिएंट के 56 मामले थे और कई राज्यों में इस तरह के मामले रिपोर्ट किए जा रहे हैं.

नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) के डेल्टा वेरिएंट (Delta Varinat) से जुड़े संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि जीनोम सीक्वेंसिंग (Genome Sequencing) के लिए निर्धारित संख्या में सैंपल भेजा जाए और जरूरत हो तो सैंपल साइट की संख्या भी बढ़ाई जाए और जिस व्यक्ति का भी सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजा गया है, उसकी क्लिनिकल डिटेल और जांच नतीजों के बारे में केंद्र को अपडेट किया जाए. न्यूज18 को इस बारे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से राज्यों को लिखा गया पत्र मिला है. पत्र में स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) की अतिरिक्त सचिव आरती आहुजा ने कहा है कि "अप्रैल और मई में देश के कई जिलों में डेल्टा वेरिएंट के मामलों में इजाफा देखा गया है." 18 जून को लिखे अपने पत्र में आहुजा ने वियतनाम जैसे देशों में उभर रहे कोरोना के अन्य वेरिएंट्स को लेकर भी चेताया और कहा है कि इससे भारत को खतरा हो सकता है.

केंद्र सरकार ने 7 जुलाई को कहा था कि देश के 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के 174 जिलों में मिले कोरोना के अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा वेरिएंट चिंतित करने वाले हैं. कोविड का डेल्टा वेरिएंट सबसे पहले महाराष्ट्र में मिला था और इसकी वजह से महाराष्ट्र के कई जिलों में कोरोना संक्रमण के मामले अचानक से बढ़ गए थे. ये वेरिएंट अब देश के कई राज्यों में मिल रहा है. केंद्र सरकार का मानना है कि कोविड की तीसरी लहर को रोकने में डेल्टा और डेल्टा प्लस वेरिएंट सबसे बड़ी चुनौती हैं. भारत में 30 जून तक डेल्टा प्लस वेरिएंट के 56 मामले थे और कई राज्यों में इस तरह के मामले रिपोर्ट किए जा रहे हैं.

डेल्टा वेरिएंट से व्याप्त खतरे को थामने के लिए राज्यों ने जांच केंद्रों के साथ आरटी-पीसीआर लैब और अस्थायी हेल्थ केयर फैसिलिटीज तैयार की हैं. इन केंद्रों में आरटी-पीसीआर पॉजिटिव सैंपल को पूरी जीनोम सीक्वेंसिंग के INSACOG के लैब में भेजा जाता है. देश में अभी 28 INSACOG लैब सक्रिय हैं. केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि अगर जरूरत है तो सभी जिलों में सैंपल साइट की संख्या बढ़ाई जाए और हर साइट से प्रत्येक 15 दिन में 15 सैंपल INSACOG को जरूर भेजा जाए. कहा गया है कि राज्य सरकारें यह सुनिश्चित करें कि एक निर्धारित संख्या में सैंपल भेजा जाए.

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केंद्र सरकार ने अपने पत्र में एक प्रो-फॉर्मा संलग्न करते हुए कहा है, "सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए क्लिनिकल-एपिडेमायलॉजिकल सहसंबंध भी बहुत महत्वपूर्ण हैं. इसलिए, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए नमूने से संबंधित व्यक्ति की क्लिनिकल और जांच से जुड़ी डिटेल अपडेट और शेयर की जाए.''

7 जुलाई को केंद्र ने कहा था कि कोरोना के 'वेरिएंट ऑफ कंसर्न' के सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र के जिलों, दिल्ली, पंजाब, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और गुजरात से आ रहे हैं. शुरूआत में जीनोम सर्विलांस का फोकस अंतरराष्ट्रीय यात्रियों में पाए गए वेरिएंट्स और उनसे जुड़े संपर्कों पर था, इसमें आरटी-पीसीआर के पॉजिटिव सैंपल की 3 से 5 फीसदी जीनोम सीक्वेंसिंग होती थी.

बाद में अप्रैल 2021 में केंद्र सरकार ने अपनी सर्विलांस स्ट्रैटजी में बदलाव किया और राज्यों में कई सारे सैंपल साइट स्थापित किए गए ताकि पूरे भूभाग को प्रतिनिधित्व मिल सके. यह भी तय किया गया कि प्रत्येक सैंपल साइट से निर्धारित संख्या में सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे जाएं.

Tags: Coronavirus, COVID 19, Delta Variant, Delta Varinat, Genome Sequencing

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