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लद्दाख में भारतीय वायुसेना की ताकत से परेशान चीन, रूस से ले रहा MI हेलिकॉप्टर

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारतीय वायुसेना ने पहले से ही अपने MI-17 V5 को तैनात कर रखा है. (photo: indianairforce.nic.in)
वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारतीय वायुसेना ने पहले से ही अपने MI-17 V5 को तैनात कर रखा है. (photo: indianairforce.nic.in)

India-China Tension: लद्दाख (Ladakh) में भारतीय वायुसेना (Indian Air force) से पिछड़ा चीन (China) अब अपने को और मजबूत करने में जुटा है. भारतीय वायुसेना के MI-17 हेलिकॉप्टरों से निपटने के लिए चीन, रूस (Russia) से MI हेलिकॉप्टर ले रहा है. चीन के खुद के बनाए जेड-10 एमई और जेड-20 हेलिकॉप्टर लद्दाख जैसे हाई एलटीट्यूड इलाके में नाकाम साबित हुए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 20, 2021, 7:52 PM IST
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नई दिल्ली. चीन (China) अपने को दुनिया के सबसे ताक़तवर देशों की सूची में सबसे पहले नंबर पर रखता है. तकनीकी तौर वो अपने को अव्वल मानता है, लेकिन भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) से अगर चीनी सेना की तुलना की जाए तो कतार में काफी पीछे खड़ा है. इस कमी को पूरा करने के लिए चीन ने रूस से 500 MI हेलिकॉप्टर खरीदने का करार किया है. खास तौर पर हाई एल्टीट्यूड वाले इलाकों में भारत का मुकाबला करने के लिए चीन इन हेलिकॉप्टरों की खरीद कर रहा है.

खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने रूस से MI हेलिकॉप्टर के तीन वेरिएंट MI-171E , MI-171SH और MI-171LT ले रहा है. इनमें से 140 की डिलीवरी पिछले साल हो चुकी है, जबकि बाकी बचे हेलिकॉप्टर अगले चार सालों में चीन को मिल जाएँगे. ऐसा नहीं है कि चीन के पास हेलिकॉप्टर बनाने की तकनीक नहीं है. दरअसल ड्रैगन ने चोरी की तकनीक से जो हेलिकॉप्टर बनाए हैं, वो ऊंचाई वाले क्षेत्रों में नाकाम हैं. चीन के खुद के बनाए Z-10एमई और Z-20 हेलिकॉप्टर ऊंचाई वाले इलाके में बिल्कुल कारगर नही हैं.

हाई एल्टीट्यड के लिए चीनी हेलिकॉप्टरों में दम नहीं!



चीन के बनाए हेलिकॉप्टरों की बात करें तो Z-10MI अटैक हेलिकॉप्टर है, Z-20 टेक्टिकल यूटिलिटी हेलिकॉप्टर है. इन दोनों हेलिकॉप्टरों की इंजन क्षमता इतनी नहीं है कि वो ऊंचाई वाले क्षेत्रों में काम कर सकें. कह सकते हैं चीनी हेलिकॉप्टर हाई एल्टीट्यूड के लायक ही नहीं हैं. Z-20 मल्टीफंक्शन कॉम्बैट हेलिकॉप्टर नहीं है. इसमें हथियार नहीं है और आर्मर प्रोटेक्शन भी नहीं है. हालांकि चीन अपने इन्हीं हेलिकॉप्टरों को अपने ऑल वेदर फ्रेंड यानि कि पाकिस्तान को ये कहकर बेचने की कोशिश कर रहा है कि ये दुनिया के सबसे बेहतर हेलिकॉप्टर हैं.

चीन को हेलिकॉप्टर देने वाले रूस के साथ भारत के रिश्ते पहले से ही मज़बूत हैं. भारतीय वायुसेना में ज्यादातर विमान, जिसमें हेलिकॉप्टर, फाइटर और मालवाहक विमान रूस निर्मित ही हैं, और जिस MI हेलिकॉप्टर से चीन अपनी वायुसेना की ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारतीय वायुसेना ने पहले से ही अपने MI-17 V5 को तैनात कर रखा है.
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