रामविलास पासवान के आवास का भी पानी मिला खराब, BIS टेस्ट में सारे नमूने रहे फेल

केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य, एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान (फोटो-प्रतीकात्मक)

भारतीय मानक ब्यूरो (BSI) ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को बताया कि केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के आवास से लिये गये पीने के पानी का नमूना गंध व अल्यूमीनियम, कॉलीफॉर्म के मानक के अनुरूप नहीं था.

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    नई दिल्ली. केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान (Union Minister Ram Vilas Paswan) का घर 12 जनपथ में स्थित है. उनके आवास से लिये गये पीने के पानी का नमूना आईएसओ मानकों पर खरा नहीं उतरा. यह बात भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को बताई. बीआईएस ने बताया कि केंद्रीय मंत्री के आवास से लिया गया पीने के पानी का नमूना गंध व अल्यूमीनियम, कॉलीफॉर्म के मानक के अनुरूप नहीं था.

    सभी 11 नमूने हुए फेल
    बीआईएस की रिपोर्ट में दिल्ली में विभिन्न जगहों से लिए गए पीने के पानी (नल से आपूर्ति किया जाने वाला पानी) के सभी 11 नमूने आईएसओ के मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, देश की राजधानी में नगरपालिका/निगम/जलबोर्ड द्वारा लोगों के घरों में आने वाले पानी के नमूने लिए गए थे जिनकी जांच के लिए नेशनल एक्रीडेशन बोर्ड लेबोरेटरी भेजा गया था.

    नल में गंदे पानी का जिम्मेदार कौन
    पर्यावरण संबंधी मामलों की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने बीआईएस के वकील विपिन नायर से पूछा कि पीने के पानी की गुणवत्ता में सुधार के लिए कौन सा तरीका अपनाना चाहिए. नल क्षतिग्रस्त है, इसके लिए कौन से कदम उठाने की आवश्यकता है. गंदा पानी जलापूर्ति की पाइपलाइन में रिसकर जाता है. पाइप अगर पूरानी हो गई हो तो उसे बदलने का काम आपूर्ति केंद्र के अधिकारी का है जो अब भ्रष्ट हो सकते हैं.

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे भी उदाहरण हो सकते हैं जहां पानी साफ करने की देखरेख करने वाले अधिकारी सही पेयजल में सही से रासायन नहीं मिलाता हो. पानी के दूषित होने के कई स्रोत हो सकते हैं. इसके अलावा पानी के क्षेत्र में माफिया भी एक मुद्दा है. न्यायमूर्ति गुप्ता ने एक उदाहरण दिया जहां करीब 10 साल से पानी की पाइप लीक कर रही थी और माफिया इससे कमाई कर रहे थे.

    कोर्ट ने मांगा दिल्ली सरकार से जवाब
    कोर्ट ने दिल्ली सरकार और केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड से 15 दिनों के भीतर पानी के नमूनों पर एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. अदालत ने संबद्ध प्राधिकरणों से यह भी बताने को कहा कि क्या वे पानी के मौजूदा पाइप को बदलना चाहते हैं.

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