NRC में नाम दर्ज करवाने के लिए मुसलमानों से अधिक हिंदुओं ने दिए फर्जी दस्तावेज

भाषा
Updated: August 26, 2019, 7:56 AM IST
NRC में नाम दर्ज करवाने के लिए मुसलमानों से अधिक हिंदुओं ने दिए फर्जी दस्तावेज
असम के प्रमाणित नागरिकों की पहचान करने वाली एनआरसी की अंतिम सूची 31 अगस्त को प्रकाशित होगी.

असम (Assam) के प्रमाणित नागरिकों की पहचान करने वाली एनआरसी (NRC) की अंतिम सूची 31 अगस्त को प्रकाशित होगी. विशेष रूप से असम के लिए एनआरसी की प्रक्रिया उच्चतम न्यायालय (Supreme court) की देखरेख में चल रही है.

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असम (Assam) में चल रहे राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (National Register of Citizens) को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने वाले सूत्रों के मुताबिक एनआरसी (NRC) में नाम दर्ज करवाने के लिए मुसलमानों (Muslims) से अधिक हिंदुओं (Hindu) ने फर्जी दस्तावेज (fake documents) जमा कराए हैं.

असम के प्रमाणित नागरिकों की पहचान करने वाली एनआरसी की अंतिम सूची 31 अगस्त को प्रकाशित होगी. विशेष रूप से असम के लिए एनआरसी की प्रक्रिया उच्चतम न्यायालय की देखरेख में चल रही है. सूत्रों के मुताबिक, यह रोचक तथ्य है कि संदिग्ध हिंदू आवेदकों की ओर से बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया. उनकी ओर से जमा 50 फीसदी से अधिक दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किया गया. यह बहुत ही आश्चर्यजनक है क्योंकि ज्यादातर लोग यही सोचते हैं कि संदिग्ध अप्रवासी मुसलमान ही एनआरसी में नाम दर्ज कराने के लिए गलत हथकंडों में लिप्त हैं. कई संदिग्ध हिंदुओं की पहचान की गई है और अनुमान लगाया जा सकता है कि बड़ी संख्या में ऐसे अप्रवासी असम में मौजूद हैं.

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हाल में असम की भाजपा सरकार ने दावा किया था कि एनआरसी के मसौदे से मुसलमानों के मुकाबले हिंदुओं के नाम बाहर किए गए हैं. साथ ही उच्चतम न्यायालय की गोपनीयता बरतने के निर्देश को नजरअंदाज करते हुए विधानसभा में हटाए गए नामों की जिलेवार सूची पेश की थी. न्यायालय ने ऐसी सूचनाओं को सील बंद लिफाफे में जमा करने को कहा है.

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24 मार्च 1971 से पहले बांग्लादेश से भारत आए अप्रवासी कानूनी रूप से भारतीय नागरिकता का दावा कर सकते हैं.


राज्य सरकार ने असम पर किया था दावा
राज्य सरकार ने दावा किया कि आंकड़े बताते हैं कि भारत-बांग्लादेश सीमा से लगते जिलों के मुकाबले मूल निवासी बहुल्य जिलों में अधिक लोगों के नाम एनआरसी से बाहर किए गए हैं. ऐसे में एनआरसी में खामी है क्योंकि सीमावर्ती जिलों में अधिक मुस्लिम अप्रवासी होने की आशंका अधिक है.
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1985 में हुए असम समझौते की एक शर्त अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें बाहर निकालने की है.


1985 में असम को लेकर किया गया था समझौता
गौरतलब है कि 24 मार्च 1971 से पहले बांग्लादेश से भारत आए अप्रवासी कानूनी रूप से भारतीय नागरिकता का दावा कर सकते हैं. असम में दशकों से बड़ी संख्या में लोग बांग्लादेश से अवैध तरीके से आ रहे हैं, इसलिए 1985 में हुए असम समझौते की एक शर्त अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें बाहर निकालने की है.

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First published: August 26, 2019, 7:55 AM IST
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