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कोरोनाः क्यों जरूरतमंदों को पहले दी जा रही वैक्सीन, जानें स्वास्थ्य मंत्रालय की दलील

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण. (ANI Twitter/6 April 2021)

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण. (ANI Twitter/6 April 2021)

Coronavirus In India: राजेश भूषण ने कहा कि टीकाकरण का मौजूदा चरण गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए है और इसके लिए सप्लाई-डिमांड मॉडल को अपनाया जा रहा है.

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नई दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) को मंगलवार को अपने एक बयान के चलते काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. दरअसल मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने कहा था कि टीकाकरण (Coronavirus Vaccination) का उद्देश्य उन लोगों को वैक्सीन की खुराक नहीं देना है, जो टीका लगवाना चाहते हैं, बल्कि उन लोगों को टीका लगाना है, जिन्हें इसकी जरूरत है. स्वास्थ्य सचिव के बयान पर हंगामा मचने के बाद ANI ने मंत्रालय से पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा. इसके जवाब में राजेश भूषण ने कहा कि ये भ्रांति है कि सरकार टीकाकरण कार्यक्रम को नियंत्रित कर रही है, टीकाकरण का मौजूदा चरण गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए है और इसके लिए सप्लाई-डिमांड मॉडल को अपनाया जा रहा है. पढ़िए पूरे मामले पर एएनआई की ओर से भेजे गए सवालों पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव के जवाब...

राजेश भूषण ने जरूरतमंदों को वैक्सीन देने के अपने बयान पर कहा कि सबसे पहले टीकाकरण की रणनीति को समझना चाहिए. टीकाकरण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संक्रमण के गंभीर खतरे का सामना कर रहे लोगों में मृत्यु दर को कम करना है. हमने दूसरे उम्र वर्ग के मुकाबले इन्हें क्यों प्राथमिकता दी? क्योंकि इस चरण में वैक्सीन की सप्लाई सीमित (लगभग जुलाई तक) होगी. लिहाजा लोगों को उम्र वर्ग के आधार पर प्राथमिकता देनी होगी और दुनिया भर में यही मानक तरीका है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का भी यही सुझाव है. उन्होंने कहा, "प्राथमिकता के साथ हम डॉयनामिक डिमांड सप्लाई मॉडल को भी फॉलो कर रहे हैं, ताकि यह तय किया जा सके कि कब किस उम्र वर्ग के लोगों के लिए टीकाकरण कार्यक्रम को खोलना है. इसके लिए हम लगातार वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों से बात कर रहे हैं, ताकि उत्पादन को बढ़ाया जा सके."

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वैक्सीन की सप्लाई पर है नजर
उन्होंने कहा, "तथ्य ये है कि कई मंत्रालयों की टीम सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक का दौरा कर चुकी है, ताकि उनकी जरूरतों का समझा जा सके और उनकी मदद की जाए. ये मदद वित्तीय स्तर की हो सकती है, नई सुविधाओं की स्थापना हो सकती है या फिर रैपिड अप्रूवल." उन्होंने कहा कि हमें विश्वास है कि आने वाले दिनों में वैक्सीन का उत्पादन बढ़ेगा और टीकाकरण कार्यक्रम भी स्थिर होगा. इसलिए वैक्सीन की सप्लाई पर लगातार नजर रखी जा रही है, जिसके बाद ही अगले उम्र वर्ग के लोगों के लिए टीकाकरण कार्यक्रम खोलने पर विचार किया जा सकेगा.

टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाने पर जोर
उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में कोरोना वायरस टीकाकरण कार्यक्रम की रफ्तार बढ़ाने पर जोर है, लेकिन हमें इस बात के लिए भी तारीफ करनी होगी कि अब तक टीकाकरण कार्यक्रम काफी तेजी से चला है, जिसके लिए स्वास्थ्यकर्मियों के सहयोग की तारीफ की जानी चाहिए. भूषण ने कहा कि हर दिन 43 लाख लोगों को वैक्सीन का टीका दिया जा रहा है. इसके व्यापक स्तर को समझें तो एक दिन में पूरे न्यूजीलैंड को टीका लगाने जैसा है. इस बात में कोई शक नहीं है कि हमें और तेजी के साथ टीकाकरण करना चाहिए लेकिन हमें गर्व है कि अब तक हमने शानदार काम किया है.

दूसरे टीकों को अनुमति ना देने की बात गलत
देश में टीकाकरण के लिए दूसरे टीकों को अनुमति ना देने के आरोपों पर राजेश भूषण ने कहा कि ये सच नहीं है और हकीकत इसका उल्टा है. उन्होंने कहा कि भारत सरकार लगातार अन्य वैक्सीन निर्माताओं के साथ काम कर रही है. कंपनियों को मदद और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सपोर्ट के लिए लगातार बात चल रही है. हालांकि हमें ये स्वीकार करना होगा कि हर व्यवस्था की एक प्रक्रिया होती है, जिसका पालन किया जाना चाहिए. ये प्रक्रिया अफसरशाही की वजह से नहीं अटक रही है, जैसा कि कुछ लोग व्यक्तिगत स्तर पर ये आरोप लगा रहे हैं. इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि जब हम एक स्वस्थ व्यक्ति को टीका लगाते हैं तो उसकी हर मिनट की डिटेल रखते हैं, जैसे कि रिस्क प्रोफाइल, साइड इफेक्ट और लॉजिस्टिक्स की जरूरतों को भी.

स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि ये भ्रांति है कि टीकाकरण कार्यक्रम को सरकार नियंत्रित कर रही है, जबकि सरकार लगातार निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम कर रही है. कई सारी मीटिंगों में राज्य सरकारों से कहा गया है कि टीकाकरण कार्यक्रम में किसी भी तरह की बाधा को खत्म करें और प्राइवेट सेक्टर के साथ मिलकर काम करें.
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