प्रख्यात नृत्य कलाकार उस्ताद देबू का निधन, कई नामचीन हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि

उस्ताद देबू कथक, कथकली और मार्शल आर्ट के फ्यूजन से नृत्य की अलग विधा के जानकार थे. (PTI)

73 वर्षीय उस्ताद देबू (Ustad Debu) पिछले काफी समय से ब्लड कैंसर (Blood Cancer) से संबंधित बीमारी लिम्फोमा से जूझ रहे थे. यह रोग तब पैदा होता है जब लिम्फोसाइट्स कहे जाने वाले सफेद रक्त कण अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगते हैं.

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    मुंबई. कथक और कथकली को मिला कर एक अनूठी नृत्य शैली पेश करने लिए मशहूर नर्तक उस्ताद देबू (Ustad Debu) का गुरुवार को मुंबई (Mumbai) में निधन हो गया. 73 वर्षीय देबू पिछले काफी समय से ब्लड कैंसर (Blood Cancer) से संबंधित बीमारी लिम्फोमा से जूझ रहे थे. यह रोग तब पैदा होता है जब लिम्फोसाइट्स कहे जाने वाले सफेद रक्त कण अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगते हैं.

    भारतीय शास्त्रीय नृत्य कथक और कथकली में पारंगत देबू ने दोनों नृत्य विधाओं को मिलाकर अनूठी नृत्य शैली पेश करने लिए ख्याति बटोरी. उनके परिवार ने सोशल मीडिया पर उनके निधन की सूचना देते हुए बताया, 10 दिसंबर को तड़के वह दुनिया छोड़कर चले गए. मुंबई में अपने घर पर उन्होंने आखिरी सांस ली. कुछ समय से वह बीमार चल रहे थे.

    परिवार ने बताया, वह अपने पीछे अविस्मरणीय प्रस्तुतियों की विरासत छोड़ गए हैं. कला के प्रति अपने समर्पण के कारण उन्होंने हजारों दोस्तों, प्रशंसकों के दिलों में जगह बनाई. परिवार, दोस्त, देश-दुनिया में शास्त्रीय और आधुनिक नृत्य बिरादरी के लिए उनका जाना अपूरणीय क्षति है. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे. हमें उनकी कमी महसूस होगी. अभिनेता अनुपम खेर ने भी ट्विटर पर देबू को श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनकी कला को हमेशा याद किया जाएगा.

    उन्होंने ट्वीट किया, आधुनिक नृत्य शैली ने अपने पुरोधा को खो दिया है और भारत ने अपनी एक सांस्कृतिक निधि को गंवा दिया है. वहीं फिल्मकार नंदिता दास ने लिखा, सुनकर झटका लगा. बचपन से ही उनकी प्रशंसक रही हूं. इस साल हमने अपने बहुत से चहेते लोगों को खो दिया है. इसके अलावा संगीतकार एहसान नूरानी, कास्टिंग निर्देशक टी. जोसेफ ने भी देबू के निधन पर शोक जताया है.

    साल 2007 में ‘पद्मश्री’ से नवाजा गया
    देबू ने परंपरागत एवं आधुनिक शैली को मिलाकर नृत्य की एक नई विधा तैयार की. उनका जन्म गुजरात के नवसारी में 13 जुलाई, 1947 को हुआ था. देबू ने युवावस्था में गुरु प्रह्लाद दास से कथक सीखा. बाद में उन्होंने गुरु ई के पाणिकर से कथकली का प्रशिक्षण लिया.अपनी प्रयोगधर्मी शैली में उन्होंने 70 से ज्यादा देशों में एकल, सामूहिक और युगल नृत्य की प्रस्तुतियां दीं. नृत्य के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें 1995 में ‘संगीत नाटक अकादमी’ पुरस्कार दिया गया था. वह 2007 में ‘पद्मश्री’ से भी सम्मानित किए गए.

    कई फिल्मों में की थी कोरियोग्राफी
    देबू ने मणिरत्नम, विशाल भारद्वाज जैसे फिल्मकारों की फिल्मों और मशहूर चित्रकार एम एफ हुसैन की फिल्म मीनाक्षी : ए टेल ऑफ थ्री सिटीज के लिए कोरियोग्राफी की थी. उन्होंने साल 2002 में अस्ताद देबू फाउंडेशन की स्थापना की थी, जो दिव्यांगों समेत कमजोर वर्गों को रचनात्मक प्रशिक्षण प्रदान करती है. आधुनियक नृत्य कला में योगदान के लिये साल 1995 में उन्हें मिले साहित्य नाटक अकादमी पुरस्कार के उद्धरण में लिखा था, 'देबू के रंगमंच की शैली के नृत्य के लिये याद किया जाएगा, जिसमें भारतीय तथा पश्चिमी शैली का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है.'

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