Monsoon Session: राज्यसभा में भारी हंगामे के बीच दो प्रमुख कृषि विधेयक पारित

राज्‍य सभा में कांग्रेस ने किया कृषि विधेयक का विरोध.
राज्‍य सभा में कांग्रेस ने किया कृषि विधेयक का विरोध.

Parliament Monsoon Session Highlights: कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ने रविवार सुबह कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020 और कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020 बिल को राज्यसभा में पेश करते हुए कहा था कि कृषि सुधार से जुड़े ये कानून किसानों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 20, 2020, 11:43 PM IST
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नई दिल्ली. विपक्षी सदस्यों के भारी हंगामे के बीच राज्यसभा (Rajyasabha) ने रविवार को दो प्रमुख कृषि विधेयकों (Farm Bills) को पारित कर दिया. हंगामे के दौरान विपक्षी सदस्यों ने पीठासीन अधिकारी के आसन की ओर रुख करते हुए उनकी ओर नियम पुस्तिका को उछाला, सरकारी कागजातों को फाड़ डाला और मत विभाजन की अपनी मांग को लेकर उन पर दबाव बनाने का प्रयास किया. उच्च सदन में हुए हंगामे के कारण थोड़े समय के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.

उच्च सदन ने रविवार को कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 को मंजूरी दे दी. ये विधेयक लोकसभा पहले ही पारित कर चुकी है. इस प्रकार इन विधेयकों को संसद की मंजूरी मिल गई है जिन्हें अधिसूचित किये जाने से पहले अब राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जायेगा.

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ऐसे शुरू हुई समस्या
समस्या तब शुरू हुई जब सदन की बैठक का समय विधेयक को पारित करने के लिए निर्धारित समय से आगे बढ़ा दिया गया. विपक्षी सदस्यों, का मानना था कि इस तरह का फैसला केवल सर्वसम्मति से ही लिया जा सकता है और वे सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सभापति के आसन के सामने इकट्ठा हो गये. उन्होंने सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाया.

हंगामे के कारण कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को संक्षेप में अपनी बात रखनी पड़ी तथा उप सभापति हरिवंश ने विधेयकों को परित कराने की प्रक्रिया शुरु कर दी.

विपक्ष ने ध्वनिमत से नकारे प्रस्ताव
विपक्ष द्वारा व्यापक जांच के लिए लाये गये चार प्रस्तावों को ध्वनिमत से नकार दिया गया. लेकिन कांग्रेस, तृणमूल, माकपा और द्रमुक सदस्यों ने इस मुद्दे पर मत विभाजन की मांग की. उप सभापति हरिवंश ने उनकी मांग को ठुकराते हुए कहा कि मत विभाजन तभी हो सकता है जब सदस्य अपनी सीट पर हों. तृणमूल नेता डेरेक ओ ब्रायन ने आसन की ओर बढ़ते हुए नियम पुस्तिका उप सभापति की ओर उछाल दी.

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सदन में खडे मार्शलों ने इस कोशिश को नाकाम करते हुए उछाली गई पुस्तिका को रोक लिया. माइक्रोफोन को खींच निकालने का भी प्रयास किया गया लेकिन मार्शलों ने ऐसा होने से रोक दिया.

नेताओं ने कागजों को फाड़कर हवा में उछाला
द्रमुक नेता तिरुचि शिवा, जिन्होंने ओ'ब्रायन के साथ और कांग्रेस के के सी वेणुगोपाल और माकपा के के के रागेश के साथ मिलकर विधेयकों को प्रवर समिति को भेजने का प्रस्ताव किया था, उन्होंने कागजात फाड़कर हवा में उछाल दिए.

उप सभापति हरिवंश ने सदस्यों को अपने स्थानों पर वापस जाने और कोविड-19 के कारण भौतिक दूरी बनाने की आवश्यकता को ध्यान में रखकर आसन के समीप नहीं आने के लिए कहा था लेकिन उन्होंने हंगामा थमता न देख पहले लाइव कार्यवाही के ऑडियो को बंद करवा दिया और फिर कार्यवाही को 15 मिनट के लिए स्थगित कर दिया.

जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो विपक्षी दलों ने नारे लगाए लेकिन वे हरिवंश को ध्वनि मत से विधेयक को पारित करने के लिए रखने से रोक नहीं पाये. विपक्षी दलों द्वारा लाये गये संशोधनों को खारिज करते हुए दोनों विधेयकों को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया.
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