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किसान आंदोलन: RSS से जुड़े संगठन ने कहा- MSP पर रुख स्‍पष्‍ट करे सरकार, तय कीमत से कम में खरीदारी अपराध घोषित हो

किसानों से एमएसपी पर सुनिश्चित खरीद के लिए कानून बने: भारतीय किसान संघ (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर- AP)
किसानों से एमएसपी पर सुनिश्चित खरीद के लिए कानून बने: भारतीय किसान संघ (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर- AP)

Minimum Support Price: किसानों का कहना है कि देश की किसी भी मंडी में किसानों को फसल का उचित रेट नहीं मिल रहा है. किसानों को MSP की गारंटी देने के लिए देश में एक नया कानून बनना चाहिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 4, 2020, 10:46 PM IST
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(सुहास मुंशी)

नई दिल्‍ली. कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ किसानों का आंदोलन बढ़ता ही जा रहा है. लगातार नौंवे दिन शुक्रवार को भी प्रदर्शन (Farmers Protest) जारी है. इस बीच किसान आंदोलन पर अपनी चुप्‍पी तोड़ते हुए आरएसएस से जुड़े भारतीय किसान संघ (BKS) ने शुक्रवार को कहा कि वह सरकारी और निजी क्षेत्र की मंडियों में न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (MSP) की गारंटी के पक्ष में है. साथ ही उसने एमएसपी से कम मूल्‍य पर अनाज की खरीद पर एक आपराधिक कानून बनाने की मांग की है. तमाम किसान संगठन कृषि कानूनों की पूर्ण वापसी की मांग को लेकर दिल्‍ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. आंदोलनकारियों की मुख्य मांगों में MSP की लीगल गारंटी की मांग शामिल है.

किसानों का कहना है कि देश की किसी भी मंडी में किसानों को फसल का उचित रेट नहीं मिल रहा है. किसानों को MSP की गारंटी देने के लिए देश में एक नया कानून बनना चाहिए. बीकेएस ने यह भी मांग की कि सरकार मौजूदा प्रावधान के बजाय किसानों और निजी खरीदारों के बीच विवाद के मामलों को सुनने के लिए विशेष कृषि अदालतें स्थापित करे. जिसके माध्‍यम से इस तरह के विवादों को स्थानीय एसडीएम को निर्देशित किया जाना चाहिए.



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भारतीय किसान संघ के महासचिव बद्री नारायण चौधरी ने शुक्रवार को कहा, 'इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई किसान अपनी उपज को कहां बेचता है. हमारा उद्देश्‍य है कि किसानों को हमेशा फसलों का उचित मूल्‍य मिलना चाहिए. एमएसपी से नीचे की खदीर पर एक आपराधिक कानून बनाया जाना चाहिए.' बद्री नारायण चौधरी ने कहा कि भारतीय किसान संघ ऐसा पहला संगठन था जिसने तीनों कृषि बिलों के विरोध में आवाज उठाते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू की थी. उन्‍होंने कहा कि बीकेएस ने देशभर के लगभग 3,000 तहसीलों में विरोध प्रदर्शन किया और किसानों के साथ 20 हजार ग्राम समिति के माध्‍यम से कृषि बिलों पर परामर्श किया.

चौधरी ने आरोप लगाते हुए कहा कि बीकेएस ने मौजूदा आंदोलन से दूर रहने का विकल्‍प इसलिए चुना था क्‍योंकि आंदोलन हिंसक हो गया था.
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