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केंद्रीय मंत्री के बयान पर अधीर रंजन चौधरी का पलटवार- किसान के मुद्दे पर दखल देने की कोशिश कर रहा पाकिस्‍तान

किसान आंदोलन को लेकर अधीर रंजन चौधरी ने सरकार पर निशाना साधा है. (फोटो साभार-PTI)
किसान आंदोलन को लेकर अधीर रंजन चौधरी ने सरकार पर निशाना साधा है. (फोटो साभार-PTI)

Farm Laws: अधीर रंजन चौधरी के पत्र के जवाब में केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, 'बहुत से लोग जिनसे मैंने इस बारे में बात की है, उन्‍होंने सीधे बजट सत्र का सुझाव दिया है. क्योंकि दिल्ली में कोरोना वायरस महामारी के मामले अभी भी बढ़ रहे हैं.'

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 15, 2020, 7:11 PM IST
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नई दिल्‍ली. कृषि कानूनों (Farm Laws) पर किसान संगठनों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है. इसको लेकर सरकार विपक्ष के निशाने पर है. इस बीच, लोकसभा (Lok Sabha) में कांग्रेस के नेता और पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chowdhury) के एक पत्र पर सरकार ने जवाब दिया है. जिसमें अधीर रंजन चौधरी ने तुरंत संसद का शीतकालीन सत्र बुलाने का अनुरोध किया था. हालांकि सरकार के जवाब पर चौधरी ने फिर पलटवार किया है. उन्‍होंने कहा, 'मुझे लगता है कि सरकार नहीं चाहती किसी भी हालत में सदन चले. सदन चलते ही किसानों के मुद्दे सामने आ जाएंगे.' उन्‍होंने कहा, 'किसान का मुद्दा गंभीर बन चुका है. इसमें पाकिस्तान भी दखल देने की कोशिश कर रहा है. इन सब को देखते हुए मैंने यह गुहार लगाई थी कि संसद का सत्र बुलाया जाए और किसानों के मुद्दों के ऊपर चर्चा कर हल निकाला जाए.'

दरअसल, अधीर रंजन चौधरी के पत्र के जवाब में केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, 'बहुत से लोग जिनसे मैंने इस बारे में बात की है, उन्‍होंने सीधे बजट सत्र का सुझाव दिया है. क्योंकि दिल्ली में कोरोना वायरस महामारी के मामले अभी भी बढ़ रहे हैं.' उन्‍होंने कहा, 'कई नेताओं ने मुझे सलाह दी है कि हम सीधे बजट सत्र बुला सकते हैं. क्‍योंकि हमने हाल ही में एक सत्र पूरा किया है.' उन्‍होंने कहा, 'मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूं कि उन्होंने सितंबर सत्र के पहले निष्कर्ष के लिए क्यों नहीं पूछा और अब एक और सत्र की मांग कर रहे हैं.'

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नहीं होगा संसद का शीतकालीन सत्र, सरकार ने जनवरी में बजट सत्र की बैठक बुलाने का सुझाव दिया
सरकार ने कहा है कि कोविड-19 महामारी के कारण इस साल संसद का शीतकालीन सत्र नहीं होगा और इसके मद्देनजर अगले साल जनवरी में बजट सत्र की बैठक आहूत करना उपयुक्त रहेगा. लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी को लिखे एक पत्र में केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, 'सर्दियों का महीना कोविड-19 के प्रबंधन के लिहाज से बेहद अहम है क्योंकि इसी दौरान कोरोना के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है, खासकर दिल्ली में. अभी हम दिसंबर मध्य में हैं और कोरोना का टीका जल्द आने की उम्मीद है.' जोशी ने कहा कि उन्होंने विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से संपर्क स्थापित किया और उन्होंने भी महामारी पर चिंता जताते हुए शीतकालीन सत्र से बचने की सलाह दी.

जोशी ने पत्र में लिखा, 'सरकार संसद के आगामी सत्र की बैठक जल्द बुलाना चाहती है. कोरोना महामारी से पैदा हुई अभूतपूर्व स्थिति को ध्यान में रखते हुए बजट सत्र की बैठक 2021 की जनवरी में बुलाना उपयुक्त होगा.' ज्ञात हो कि कोरोना महामारी के चलते इस साल संसद का मानसून सत्र देरी से आरंभ हुआ था. जोशी ने इस सत्र की उत्पादकता को लेकर सभी दलों के सहयोग की सराहना की. संसद का शीतकालीन सत्र सामान्यत: नवंबर के आखिरी या दिसंबर के पहले सप्ताह में आरंभ होता है. संवैधानिक व्यवस्थाओं के मुताबिक संसद के दो सत्रों की बैठक के बीच छह महीने से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए. बहरहाल, संसद के एक साल में तीन- बजट, मानसून और शीतकालीन सत्र की बैठक बुलाए जाने की परंपरा रही है.
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