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किसानों को बातचीत के लिए राजी करना हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती: अनिल घनवंत

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी की हुई पहली बैठक. (फोटो साभार-ANI)
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी की हुई पहली बैठक. (फोटो साभार-ANI)

Farmers Protest: अनिल घनवंत ने कहा, 'यह निर्णय लिया गया है कि किसानों के साथ पहली बैठक 21 जनवरी को होगी. फिजिकल मीटिंग उन संगठनों के साथ आयोजित की जाएगी जो हमें व्यक्तिगत रूप से मिलना चाहते हैं.'

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 19, 2021, 8:44 PM IST
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नई दिल्‍ली. किसान आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा बनाई गई समिति ने मंगलवार को पहली बैठक की. बैठक के बाद समिति के एक सदस्‍य अनिल घनवंत ने कहा कि कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति नए कृषि कानूनों पर किसानों, केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और सभी पक्षकारों के विचार जानेगी. समिति के सदस्य उच्चतम न्यायालय को सौंपी जाने वाली रिपोर्ट तैयार करते समय कृषि कानूनों पर अपने निजी विचारों को एक तरफ रखेंगे.

अनिल घनवंत ने कहा, 'यह निर्णय लिया गया है कि किसानों के साथ पहली बैठक 21 जनवरी को होगी. फिजिकल मीटिंग उन संगठनों के साथ आयोजित की जाएगी जो हमें व्यक्तिगत रूप से मिलना चाहते हैं. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग उन लोगों के साथ आयोजित की जाएगी जो हमारे पास नहीं आ सकते.' अनिल घनवंत ने कहा कि अगर सरकार हमारे साथ आना चाहती है, तो हम उसका स्वागत करते हैं. हम सरकार को भी सुनेंगे. सबसे बड़ी चुनौती आंदोलनकारी किसानों को समझाने और हमारे साथ बात करने की है, हम अपने स्तर पर पूरी कोशिश करेंगे.





कानून को वापस लेने के बजाय अन्‍य विकल्‍पों पर भी चर्चा करेंगे संगठन: तोमर
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने उम्मीद जताई कि प्रदर्शनकारी किसान संगठन दसवें दौर की वार्ता में नए कृषि कानूनों को वापस लेने के बजाय अन्य विकल्पों पर चर्चा करेंगे और उनसे अपील की कि दिल्ली में गणतंत्र दिवस के अवसर पर ट्रैक्टर रैली नहीं निकालें. 41 कृषि संगठनों के साथ दसवें दौर की वार्ता होने वाली है. अभी तक की वार्ता में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है क्योंकि आंदोलनकारी किसान संगठन जहां कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं वहीं सरकार ने इस तरह का कदम उठाने से इनकार कर दिया है.

तोमर ने यहां संवाददाताओं से कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अगली बैठक में किसान संगठन विकल्पों (कानूनों को वापस लेने के अलावा) पर चर्चा करेंगे ताकि किसी समाधान तक पहुंचा जा सके. गौरतलब है कि किसानों और सरकार के बीच मंगलवार को प्रस्तावित दसवें दौर की वार्ता अब एक दिन बाद बुधवार को होगी. उन्होंने कहा कि वर्तमान गतिरोध इसलिए जारी है कि किसान संगठन कानूनों के प्रावधान पर चर्चा नहीं कर रहे हैं. मंत्री ने कहा कि नए कृषि कानून किसान समुदाय के हित में हैं और कुछ ही राज्यों में इसका विरोध हो रहा है.

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उन्होंने कहा, 'अभी तक हमारे बीच नौ दौर की वार्ता हो चुकी है. मैंने हमेशा कहा है कि किसान संगठनों को कानून के प्रावधानों पर चर्चा करनी चाहिए. सरकार इस पर चर्चा कर रही है और अगर वे कानून के प्रावधानों में कोई समस्या बताते हैं तो सरकार खुले दिल से चर्चा करना चाहती है.' मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार पूरी तरह किसानों के प्रति समर्पित है. मोदी सरकार ने किसानों की दुर्दशा में सुधार लाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए पिछले छह वर्षों में कई कृषि योजनाओं की शुरुआत की है.

गणतंत्र दिवस पर आंदोलनकारी किसानों द्वारा दिल्ली में ट्रैक्टर रैली आयोजित करने की योजना पर तोमर ने कहा, 'मैं किसानों से अपील करना चाहता हूं कि 26 जनवरी हमारा गणतंत्र दिवस है और काफी बलिदानियों के बाद देश ने स्वतंत्रता हासिल की है और गणतंत्र दिवस की गरिमा प्रभावित नहीं हो, यह किसानों की भी जिम्मेदारी है. मुझे उम्मीद है कि वे अपने निर्णय पर पुनर्विचार करेंगे.' प्रदर्शनकारी किसान नेताओं ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में कहा कि किसानों को शांतिपूर्ण तरीके से ट्रैक्टर रैली निकालने का अधिकार है और कहा कि 26 जनवरी को प्रस्तावित कार्यक्रम में हजारों लोग हिस्सा लेंगे.
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