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कृषि कानून गया, लेकिन पश्चिम यूपी में इन मुद्दों को लेकर गर्म है आंदोलन की सियासत!

कृषि कानून गया, लेकिन पश्चिम यूपी में इन मुद्दों को लेकर गर्म है आंदोलन की सियासत!

पश्चिम यूपी में लगे है जयंत चौधरी के वादों वाले पोस्‍टर. (Pic- News18)

पश्चिम यूपी में लगे है जयंत चौधरी के वादों वाले पोस्‍टर. (Pic- News18)

Uttar Pradesh Elections 2022: पहचान का मुद्दा ही अंत में ऐसा मुद्दा है जो पश्चिम उत्तर प्रदेश में सबसे ऊपर है. 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगों के बाद जाट बीजेपी के खेमे में इसलिए चले गए थे क्योंकि उनका मानना है कि सपा मुस्लिमों के पक्ष में तुष्टिकरण की राजनीति करती है. जयंत चौधरी ने भाई चारा सम्मेलन के जरिए इस दूरी को पाटने और दोनों संप्रदायों के बीच भरोसा जगाने की कोशिश भी की थी. लेकिन बीजेपी भी पहचान के मुद्दे को मजबूती प्रदान करने का कोई मौका छोड़ना नहीं चाहती है.

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नई दिल्‍ली. सरकार ने भले ही कृषि कानून वापस (Farm Laws Repeal) लेकर उत्‍तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के चुनावी माहौल में एक नई उर्जा भर दी हो, लेकिन पश्चिम उत्तर प्रदेश (West Uttar Pradesh) की हवाओं से अभी आंदोलन पूरी तरह से गया नहीं है. कम से कम मुजफ्फरनगर की सड़कों के किनारे राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के जयंत चौधरी के बैनर यही बयां कर रहे हैं. जिनसे पता चलता है कि किसान (Farmers Protest) कृषि कानून वापस लिए जाने भर से मानने वाले नहीं हैं, बिजली और डीजल के बढ़े हुए दाम अभी भी यहां पर किसानों के लिए बड़ा मुद्दा हैं. उनका मानना है कि गन्ने के दाम में राज्य सरकार ने जो मामूली बढ़ोतरी की घोषणा की थी, वह मंहगाई की भेंट चढ़ गया है.

जयंत चौधरी किसानों को यह बात याद दिलाए रखने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं, लेकिन पहचान का मुद्दा ही अंत में ऐसा मुद्दा है जो पश्चिम उत्तर प्रदेश में सबसे ऊपर है. जाट किसानों का प्रतिनिधित्व करने वाले कारुन्दा गांव के अवतार सिंह अपने ट्रैक्‍टर में गन्ने की फसल चढ़ाते हुए कहते हैं कि राष्ट्रीय लोक दल ने हमारी परेशानी को उठाया है, वह हमारे समुदाय की पार्टी है लेकिन जैसा कि सुना जा रहा है कि वह समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ हाथ मिलाने जा रही है, अगर ऐसा होता है तो हमें दोबारा सोचना पड़ेगा.

2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगों के बाद जाट बीजेपी के खेमे में इसलिए चले गए थे क्योंकि उनका मानना है कि सपा मुस्लिमों के पक्ष में तुष्टिकरण की राजनीति करती है. जयंत चौधरी ने भाई चारा सम्मेलन के जरिए इस दूरी को पाटने और दोनों संप्रदायों के बीच भरोसा जगाने की कोशिश भी की थी. लेकिन बीजेपी भी पहचान के मुद्दे को मजबूती प्रदान करने का कोई मौका छोड़ना नहीं चाहती है.

बीजेपी के राज्य सचिव, चंद्र मोहन, जिन्होंने पश्चिम यूपी को करीब से समझा है, उन्होंने News18 को बताया कि पश्चिम यूपी के किसान कभी भी दंगाइयों का समर्थन नहीं करेंगे, वह अच्छी तरह जानते हैं कि सपा ने क्या किया है. और उन्हें यह भी पता है कि पीएम मोदी और सीएम योगी ने उनके भले के कैसे ऐतिहासिक कदम उठाए हैं. वहीं दिल्ली के एक वरिष्ठ बीजेपी नेता कहते हैं कि रालोद का असर पश्चिम यूपी के तीन जिलों की 5-6 सीटों तक ही सीमित है. हकीकत यह है कि जाट कभी भी पूरी तरह से बीजेपी के साथ नहीं रहा है. कश्यप, सैनी, ब्राह्मण और प्रजापति समुदाय के किसान हैं जो हमेशा बीजेपी समर्थक रहे हैं. ऐसे किसान अभी भी अच्छी कानून व्यवस्था के चलते बीजेपी का समर्थन करते हैं.

वहीं तितावी, जहां हाल ही में चौधरी ने रैली की थी, वहां हुक्का गुड़गुड़ाते सुरेश सिंह और वीरपाल सिहं कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी का 2014 में हमने समर्थन किया था, उन्होंने कृषि कानून वापस लेकर अच्छा किया. इस बात की हमें खुशी भी है, लेकिन पश्चिम उत्तर प्रदेश के किसान जो वाकई में चाहते थे वो न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी थी. यहां के किसानों को गेंहू और चावल पर मुश्किल से एमएसपी मिल पाती है. क्या बीजेपी यह देगी?

बिजली का झटका
News18 ने कई किसानों से बात की. एक शिकायत सभी से सुनने को मिली. वह है बिजली के बिल की समस्या. उनका दावा था कि पुरानी सरकार के दौरान ट्यूबवेल का बिल 500 रुपये महीना आता था, जो अब बढ़कर 2000 रुपये महीना आ रहा है. कुछ का मानना है कि बिजली की आपूर्ति और कानून व्यवस्था में सुधार हुआ है. लेकिन बिजली के अधिक कीमत के बिलों ने परेशान किया हुआ है.

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चौधरी ने भी अपनी रैली में पुराने बिजली के बिलों की माफी का वादा किया है. इसी तरह कांग्रेस की प्रियंका गांधी ने भी किसानों से यही वादा किया है और उनके बैनर भी बिजली के बिलों को माफ करने और बिजली के दाम को कम करने का दावा कर रहे हैं. इसके साथ ही किसानों की शिकायत आवारा जानवरों का फसलों को नुकसान पहुंचाने से जुड़ी हुई थी. वह बताते हैं कि किस तरह उनकी पूरी की पूरी उड़द की फसल तबाह हो गई.

भारतीय किसान यूनियन के नेता नरेश टिकैत News18 से कहते हैं कि किसानों को डीजल पर सब्सिडी चाहिए. वो तेल के दामों का खर्चा उठाने में असमर्थ हैं. एक तरफ किसानों को गन्ना की बकाया राशि समय पर मिलने को लेकर बीजेपी पिछली सरकार से तुलना करके इसे अपने पक्ष में देखती है. वहीं चौधरी ने अपनी रैली में कहा कि बीजेपी सरकार जल्द ही 14 दिन के अंदर किसानों की बकाया राशि का भुगतान करने या समय पर भुगतान न होने पर हर्जाना देने संबंधी नियम को हटा सकती है. उधर बीजेपी के नेताओं का कहना है कि अपने चुनावी अभियान में वे किसानों की सारी शंकाएं दूर कर देंगे और उसकी शुरुआत इसी महीने पश्चिम यूपी में गृहमंत्री अमित शाह के दौरे से होगी.

बीजेपी का खेल अभी खत्म नहीं हुआ है
रालोद के नेता बीरपाल मलिक का कहना है कि चौधरी की रैली में आई भीड़ बताती है कि पश्चिम यूपी का मन बदल चुका है. वो कहते हैं कि जब गन्ने की फसल काटी जा रही है और गन्ना मिल में जा रहा है तो ऐसे में किसानों के आने की उम्मीद कम ही होती है लेकिन यहां पर किसानों का आना बताता है कि उन्होंने मन बना लिया है. लेकिन सपा के साथ रालोद का गठबंधन अभी तय नहीं हुआ है क्योंकि रालोद अपनी पसंद की सीट चाहती है जिसे लेकर कुछ तय नहीं हो पाया है. क्योंकि सपा भी पश्चिम यूपी में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहती है. यह वही क्षेत्र हैं, जहां 2014 में बीजेपी के जीत दर्ज करने से पहले बसपा की पकड़ मजबूत थी.

2019 में जब सपा, बसपा और रालोद ने गठबंधन किया तो चौधरी पुत्र-पिता दोनों ने ही अपनी पकड़ खो दी थी और वह अपनी सीट गंवा बैठे थे. कुछ किसानों का मानना है कि रालोद और कांग्रेस का गठबंधन 2022 विधानसभा चुनावों में ज्यादा असर दिखा सकता है. वैसे भी कांग्रेस भी वहीं मुद्दे उठा रही जो रालोद के हैं. लेकिन बीजेपी के पास अभी भी एक तिरुप का पत्ता बचा है- वो है पहचान.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब कैराना आए थे, तब उन्होंने एक पहले पलायन कर चुके हिंदु परिवार के घर खाना खाया था और लोगों को यह सोचने पर मजूबर कर दिया था कि बहुसंख्यक अभी भी उनके साथ ही हैं. बीजेपी नेता इस बात पर जोर देते हुए कहते हैं कि पश्चिम यूपी में जाटों की अपनी समस्या है. शिकायत उन्हें 2017 और 2019 में भी थी. लेकिन अंत में उन्हें आना बीजेपी के साथ ही पड़ेगा क्योंकि उनके पास कोई विकल्प नहीं है.

Tags: BJP, Rld, Uttar Pradesh Assembly Elections, Uttar Pradesh Elections

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