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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बोले किसान नेता-हमने कोई कमेटी नहीं मांगी थी

कृषि कानून का विरोध कर रहे किसान पिछले डेढ़ महीने से दिल्ली के बॉर्डर पर बैठे हुए हैं.
कृषि कानून का विरोध कर रहे किसान पिछले डेढ़ महीने से दिल्ली के बॉर्डर पर बैठे हुए हैं.

Farm Laws: सुप्रीम कोर्ट ने तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों के अमल पर मंगलवार को अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी. साथ ही कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले किसानों और सरकार के बीच जारी गतिरोध दूर करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित कर दी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 12, 2021, 6:27 PM IST
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नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने मंगलवार को दिल्ली की सीमाओं (Delhi Borders) पर किसानों के आंदोलन (Farmer Protest) से उत्पन्न स्थिति का समाधान खोजने के प्रयास में तीनों विवादास्पद कानूनों (Farm Laws) के अमल पर रोक लगाने के साथ ही किसानों की शंकाओं और शिकायतों पर विचार करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित कर दी. समिति के गठन को लेकर किसान नेताओं का कहना है कि जब तक सरकार कानून वापस नहीं ले लेती तब तक वे प्रदर्शन वापस नहीं लेंगे. इसके साथ ही उनका कहना है कि प्रदर्शन को कहीं और शिफ्ट नहीं किया जाएगा.

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि हमने कोई कमेटी नहीं मांगी थी, हम कानून वापस लेने की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शन को हम कहीं शिफ्ट नहीं करेंगे. सरकार कानून वापस ले उसके बाद ही हम घर जाएंगे. टिकैत ने कहा कि जितेंद्र मान सिंह कौन है, ये हमारे संगठन का नहीं है, हम इन्हें नहीं जानते हैं. हम बैठक करेंगे फिर देखते हैं, कानून वापसी से कम कुछ भी नहीं चाहिए.

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प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने मंगलवार को विभिन्न पक्षों को सुनने के बाद कहा कि इन कानूनों के अमल पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगायी जाती है. पीठ ने साथ ही एक समिति के गठन की भी घोषणा की. इस समिति में भारतीय किसान यूनियन के भूपिंदर सिंह मान, शेतकारी संगठन के अनिल घनवंत, डॉ. प्रमोद जोशी और कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी को शामिल किया गया है.


किसानों को समिति का सहयोग करने का अनुरोध
वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के दौरान पीठ ने सख्त लहजे में कहा कि कोई भी ताकत उसे इस तरह की समिति गठित करने से रोक नही सकती है. साथ ही पीठ ने आंदोलनरत किसान संगठनों से इस समिति के साथ सहयोग करने का अनुरोध भी किया.

न्यायालय द्वारा नियुक्त की जाने वाली समिति के समक्ष आंदोलनरत किसान संगठनों के शामिल नहीं होने संबंधी खबरों के परिप्रेक्ष्य में शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि जो वास्तव में इस समस्या का समाधान चाहते हैं वे समिति के साथ सहयोग करेंगे.

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पीठ ने कहा कि हम देश के नागरिकों की जान माल की हिफाजत को लेकर चिंतित हैं और हम इस समस्या को हल करने का प्रयास कर रहे हैं.

न्यायालय ने सुनवाई के दौरान न्यायपालिका और राजनीति में अंतर को भी स्पष्ट किया और किसानों से कहा कि यह राजनीति नहीं है. किसानों को इस समिति के साथ सहयोग करना चाहिए.

ये तीन कृषि कानून हैं-- कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार, कानून, 2020, कृषक उत्पाद व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) कानून, 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविद की संस्तुति मिलने के बाद से ही इन कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर किसान आंदोलनरत हैं.
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