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चुनावी राज्यों में किसान नेता बढ़ाएंगे भाजपा की परेशानी, जानिए क्या है पूरा प्लान

सिंघू बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान योगेन्द्र यादव. (ANI/2 March 2021)

सिंघू बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान योगेन्द्र यादव. (ANI/2 March 2021)

Farm Laws: तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने और एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी देने की मांग के साथ हजारों किसान कई दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं.

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नई दिल्ली. कृषि कानूनों के खिलाफ देश भर में आंदोलन कर रहे किसान संगठनों ने चुनावी राज्यों में भाजपानीत केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है. मंगलवार को सिंघु बॉर्डर पर आयोजित एक आम बैठक में संयुक्त किसान मोर्चा ने यह फैसला लिया. भारतीय किसान संघ (बीकेयू) के नेता बलबीर एस राजेवाल ने कहा, 'पश्चिम बंगाल और केरल में जहां चुनाव हो रहे हैं हम वहां अपना दल भेजेंगे. हम किसी भी पार्टी का समर्थन नहीं कर रहे हैं, लेकिन लोगों से अपील करते हैं कि उन उम्मीदवारों को वोट करें जो भाजपा को हरा सकते हैं. हम लोगों को यह बताएंगे कि किसानों के प्रति मोदी सरकार का रवैया कैसा है?'


किसान नेताओं ने कहा कि 8 मार्च को संयुक्त किसान मोर्चा 'महिला किसान दिवस' के रूप में मनाएगा.  इस दिन देश भर के संयुक्त किसान मोर्चे के सभी धरना स्थल पर 8 मार्च को महिलाओं द्वारा संचालित होंगे. यहां तक कि महिलाएं ही मंच प्रबंधन करेंगी और वक्ता होंगी. इसके लिए एसकेएम ने उस दिन महिला संगठनों और अन्य लोगों को आमंत्रित किया है ताकि वे किसान आंदोलन के समर्थन में इस तरह के कार्यक्रम करें और देश में महिला किसानों के योगदान को सबके सामने रखें.


संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि 6 मार्च 2021 को दिल्ली बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन शुरू होने के 100 दिन पूरे हो जाएंगे और उस दिन दिल्ली व दिल्ली सीमाओं के विभिन्न प्रदर्शन स्थलों को जोड़ने वाले केएमपी एक्सप्रेसवे पर 5 घंटे की नाकाबंदी होगी, जो कि सुबह 11 से शाम 4 बजे के बीच किया जाएगा. इस दौरान यहां टोल प्लाजा को टोल फीस जमा करने से भी मुक्त किया जाएगा. वहीं, शेष भारत में आंदोलन को समर्थन और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए घरों और कार्यालयों पर काले झंडे लहराए जाएंगे. संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रदर्शनकारियों को उस दिन काली पट्टी बांधने के लिए भी आह्वान किया है.


बैठक में यह भी तय किया गया कि केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर 15 मार्च 2021 को 'निजीकरण विरोधी दिवस' का समर्थन करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे. एसकेएम इस दिन को 'कॉरपोरेट विरोधी' दिवस के रूप में देखते हुए ट्रेड यूनियनों के इस आह्वान का समर्थन करेगा, और एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा.


चुनावी राज्यों में भाजपा के खिलाफ रणनीति
बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि जिन राज्यों में अभी चुनाव होने वाले हैं, उन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की किसान-विरोधी, गरीब-विरोधी नीतियों को दंडित करने के लिए संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) जनता से एक अपील करेगी. एसकेएम के प्रतिनिधि भी इस उद्देश्य के लिए इन राज्यों का दौरा करेंगे और विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे.


किसानों का एमएसपी दिलाओ अभियान


इसके साथ ही SKM पूरे भारत में एक "MSP दिलाओ अभियान" शुरू करेगा. अभियान के तहत, विभिन्न बाजारों में किसानों की फसलों की कीमत की वास्तविकता को दिखाया जाएगा, जो मोदी सरकार व एमएसपी के झूठे दावों और वादों को उजागर करेगा. यह अभियान दक्षिण भारतीय राज्यों कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में शुरू किया जाएगा. पूरे देश में किसानों को भी इस अभियान में शामिल किया जाएगा.




गौरतलब है कि तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने और फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी देने की मांग के साथ पंजाब, हरियाणा और देश के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों किसान कई दिनों से राष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं.


क्या है मामला
कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर सरकार ने सितंबर में तीनों कृषि कानूनों को लागू किया था. सरकार ने कहा था कि इन कानूनों के बाद बिचौलिए की भूमिका खत्म हो जाएगी और किसानों को देश में कहीं पर भी अपने उत्पाद को बेचने की अनुमति होगी. वहीं, किसान तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं. प्रदर्शन कर रहे किसानों का दावा है कि ये कानून उद्योग जगत को फायदा पहुंचाने के लिए लाए गए हैं और इनसे मंडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था खत्म हो जाएगी.


(इनपुट एएनआई से भी)

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