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Farmers Protest: किसान आंदोलन की 'आग' बुझाने के लिए बीजेपी ने तेज़ की पर्दे के पीछे से मुहिम- रिपोर्ट

शनिवार को देश भर में चक्का जाम का आयोजन किया गया था (फोटो-AP)
शनिवार को देश भर में चक्का जाम का आयोजन किया गया था (फोटो-AP)

Farmer Protest: प्रदर्शनकारी किसान संगठनों ने कहा है कि वे सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन केंद्र को एक नया प्रस्ताव लेकर आना चाहिए क्योंकि विवादास्पद कृषि कानूनों (Farm Laws) को एक से डेढ़ साल तक के लिए निलंबित रखने का मौजूदा प्रस्ताव उन्हें स्वीकार नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 7, 2021, 11:31 AM IST
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नई दिल्ली. केंद्र के नये कृषि कानूनों (New Farm Laws) को रद्द करने की मांग को लेकर किसान संगठनों ने शनिवार को तीन घंटे का ‘चक्का जाम’ किया था. कुछ राज्यों को छोड़ कर इस विरोध प्रदर्शन का ज्यादा असर नहीं दिखा. ऐसे में बीजेपी किसान आंदोलन (Farmers Protest) की 'आग' बुझाने के लिए पर्दे के पीछे से मुहिम तेज़ कर दी है. इस बीच प्रदर्शनकारी किसान संगठनों ने कहा है कि वे सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन केंद्र को एक नया प्रस्ताव लेकर आना चाहिए क्योंकि विवादास्पद कृषि कानूनों को एक से डेढ़ साल तक के लिए निलंबित रखने का मौजूदा प्रस्ताव उन्हें स्वीकार नहीं है.

अंग्रेजी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी के एक नेता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि उन्हें किसानों के आंदोलन की आग को ठंडा करने का एक मौका मिल गया है. उन्होंने कहा, 'किसानों का चक्का जाम लगभग फेल रहा. पंजाब और हरियाणा के कुछ इलाकों में ही इसका असर देखने को मिला. जाहिर है इस चक्का जाम की आड़ में कुछ प्रदर्शनकारियों को फोटो खिंचवाने का मौका मिल गया. किसान नेता देश भर में ट्रैफिक को रोक नहीं पाए. हमें लगता है कि हम किसानों को कुछ प्रोफेशनल प्रदर्शनकारियों से अलग करने में कामयाब हो जाएंगे.'

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विपक्षी दलों पर उकसाने का आरोप
बीजेपी के नेताओं का ये भी कहना है कि उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों में बहुत ही कम इलाकों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिले. मीडिया रिपोर्ट्स के मुतबिक दिल्ली की सीमा पर डटे किसान इस बात से भी नाराज़ है कि विपक्षी पार्टियां उनके प्रदर्शन को अपना बता रही है. इस बीच बीजेपी के नेताओं का कहना है कि सरकार तीनों कानूनों पर बातचीत के लिए तैयार है. बीजेपी ने एक बार फिर से दोहराया है कि विपक्षी दल के नेता किसानों को बरगलाने की कोशिश कर रहे हैं.




'खून से खेती'
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा था कि कृषि कानूनों को लेकर विरोध केवल एक राज्य तक ही सीमित है और किसानों को उकसाया जा रहा है. कृषि मंत्री ने दावा किया कि किसान संगठन, विपक्षी दल तीनों नए कृषि कानूनों में एक भी खामी बताने में नाकाम रहे. वहीं  कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को एक में जवाब में तोमर ने कहा कि पानी से खेती होती है. खून से खेती कांग्रेस करती है, भाजपा नहीं.
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