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10 दिनों की हड़ताल पर 8 राज्यों के किसान, महंगी हो सकती हैं दूध-सब्जियां

News18Hindi
Updated: June 1, 2018, 2:07 PM IST
10 दिनों की हड़ताल पर 8 राज्यों के किसान, महंगी हो सकती हैं दूध-सब्जियां
हड़ताल का असर मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा और छत्तीसगढ़ में देखा जा सकता है.

किसानों की मुख्य मांगों में कर्जमाफी, न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाना और अपनी फसलों का अधिकतम दाम शामिल है.

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8 राज्यों की किसान यूनियन ने शुक्रवार को 10 दिनों की बड़ी हड़ताल का ऐलान किया है. हड़ताल के तहत दूध सब्जियों की सप्लाई बंद कर दी गई है. किसान यूनियन ने ये हड़ताल मध्य प्रदेश के मंदसौर किसान आंदोलन के एक साल पूरे होने पर बुलाया है. पिछले साल मंदसौर में पुलिस की गोलीबारी में 6 किसानों की मौत हो गई थी.  हड़ताल का असर मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा और छत्तीसगढ़ में देखा जा सकता है.

न्यूज18 ने कई किसानों से बातचीत की, जिससे पता चला है कि इस बार किसान हड़ताल के नाम पर सड़कों पर नहीं उतरेंगे बल्कि वो बाज़ारों में दूध और सब्जियों की सप्लाई को रोक देंगे. किसानों के मुताबिक शहर के लोग चाहें तो सीधे गांवों से अपनी जरूरत का सामान खरीद सकते हैं.

किसानों की मुख्य मांगों में कर्जमाफी, न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाना और अपनी फसलों का अधिकतम दाम शामिल हैं. 11 मई को भोपाल के गांधी आश्रम वर्धा में किसानों के करीब सौ संगठनों ने मुलाकात की थी. ये बैठक राष्ट्रीय किसान महासंघ ने आयोजित की थी. इसी बैठक के दौरान 10 दिनों के आंदोलन को लेकर चर्चा की गई थी.

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महाराष्ट्र के किसान आंदोलन में भाग लेने वाले स्वाभिमान संगठन और आरएसएस की भारतीय किसान संघ ने इस 10 दिन के आंदोलन में हिस्सा नहीं लिया है. स्थानीय किसान नेता अनिल यादव ने बताया कि पुलिस ने किसानों से 24000 रुपये का बॉन्ड साइन करवाया है ताकि वो हिंसात्मक न हो. पुलिस को भी आंसू गैस छोड़ने को लेकर ट्रेंड किया गया है. अतिरिक्त पुलिस बल को भी पूरी तैयारी से तैनात किया गया है. अनिल ने आगे बताया "हम साधारण किसान है जो अपनी मूलभूत अधिकारों की मांग कर रहे हैं. हमें पुलिस या प्रशासन से कोई जंग नहीं लड़नी."

अनिल को पुलिस ने पिछले साल हुए मंदसौर किसान आंदोलन में गिरप्तार कर लिया था. उन्होंने बताया मुझे गलती से गिरफ्तार कर लिया गया था. हमने जो मांगे पिछले साल उठाई थी वो अभी भी अनसुनी हैं.

एक और किसान नेता ने बताया कि अगर हिंसा भड़की, तो हमने जेल जाने का फैसला कर लिया है. जहां हम लोकल पुलिस स्टेशन तक मार्च करेंगे और अपनी एकता को साबित करेंगे. हम आगे गांधी पथ पर मौन भी रखेंगे.

किसानों से दूध और सब्जियों को बर्बाद न करने के लिए कहा गया है, लेकिन कुछ प्रदर्शनकारियों ने मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में आदेश को नहीं माना है.

महाराष्ट्र के अहमदनगर में दूध को बर्बाद करते हुए किसान (फोटो/NEWS18)


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अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने इस हफ्ते राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की थी. मुलाकात में पार्लियामेंट के मॉनसून सेशन में किसानों के मुद्दों को उठाने की अपील की गई थी.

प्रदर्शनकारी कियानों के मुताबिक  पिछले साल किसान आंदोलन में हिंसा भड़कने का मुख्य कारण व्यवस्था में लापरवाही और बातचीत की कमी थी. इस साल प्रदर्शनकारियों को सोशल मीडिया के जरिए शांतिपूर्ण आंदोलन का संदेश पहुंचाया जा रहा है.





बुधवार को सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मंदसौर में किसानों के साथ एक रात बिताई. सीएम ने कांग्रेस पर किसान आंदोलन में विरोध भड़काने का भी आरोप लगाया. इससे पहले सीएम ने भोपाल में बैंकर्स से मुलाकात कर ये आश्वस्त किया कि राज्य सरकार से किसानों की फसलों की पेमेंट टाइम पर हो सके. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी 6 जून को मंदसौर जाएंगे.

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First published: June 1, 2018, 12:10 PM IST
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