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Farmers Protest: कौन है मो धालिवाल, जिसका ग्रेटा थनबर्ग की टूलकिट से जुड़ रहा नाम

मो धालीवाल (फोटो- फेसबुक)
मो धालीवाल (फोटो- फेसबुक)

Farmers Protest: पुलिस का कहना है कि इस ‘टूलकिट’ का मकसद भारत सरकार के खिलाफ सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जंग छेड़ना है. पुलिस का ये भी कहना है कि इस टूलकिट को खालिस्तान के एक ग्रुप ने तैयार किया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 7, 2021, 1:15 PM IST
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नई दिल्ली. पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन की दिशा में काम करने वाली स्वीडन की ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) के ट्वीट से भारत में हंगामा मचा है. उन्होंने एक टूलकिट शेयर कर किसानों (Farmer Protest) को समर्थन देने का ऐलान किया था. आमतौर पर टूलकिट एक तरह की गाइडलाइन है जिसके जरिए ये बताया जाता है कि किसी काम को कैसे किया जाए. थनबर्ग ने इस टूलकिट के जरिए लोगों को ये बताने की कोशिश की थी कि आखिर आंदोलन को समर्थन देने के लिए क्या कुछ और कैसे करना है. हालांकि उन्होंने बाद में इस टूलकिट को ट्विटर से हटा दिया. बता दें कि दिल्ली पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज की है.

दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आरंभिक छानबीन में इस दस्तावेज का जुड़ाव ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ नामक खालिस्तानी समर्थक समूह से होने का पता चला है. पुलिस का कहना है कि इस ‘टूलकिट’ का मकसद भारत सरकार के खिलाफ सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जंग छेड़ना है. पुलिस का ये भी कहना है कि इस टूलकिट को खालिस्तान के एक ग्रुप ने तैयार किया था. कहा जा रहा है कि इस ग्रुप से कनाडा में जन्मे एक सिख मो धालीवाल का नाम सामने आ रहा है. ये भी कहा जा रहा है कि इस टूलकिट के पीछे धालीवाल का ही मुख्य तौर पर हाथ था.

कौन है धालीवाल?
मो धालीवाल पोयटिक जस्टिस फाउंडेशन (PJF) के फाउंडर हैं. इसी PJF पर शक है कि उसने ये टूलकिट तैयार की जो ग्रेटा थनबर्ग ने ट्वीट की थी. इसके अलावा धलीवाल स्काईरॉकेट नाम की एक क्रिएटिव एजेंसी के फाउंडर भी हैं. ये एजेंसी कनाडा में है. कंपनी की वेबसाइट पर लिखा है कि धालीवाल डायरेक्टर ऑफ स्ट्रैटेजी हैं.
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खुद को बताता है खालिस्तानी
धालीवाल खुद को खालिस्‍तानी बताता है. 17 सितंबर 2020 को अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्‍ट में धालीवाल लिखता है कि वो एक खालिस्‍तानी है. उसने लिखा है, 'आप शायद मेरे बारे में ये नहीं जानते होंगे. क्‍यों? क्‍योंकि खालिस्‍ताान एक विचार है. खालिस्‍तान एक जीता-जागता, सांस लेता आंदोलन है.' पोस्‍ट में उसने ये भी लिखा कि वो 1984 में छह साल का था.

धालीवाल का वायरल वीडियो
सोशल मीडिया पर किसान आंदोलन को हवा देने वाले एक खालिस्तानी समूह का वीडियो सामने आया है. इसमें धालीवाल कह रहा है कि अगर कल कृषि कानून वापस भी हो जाएं तो ये हमारे लिए जीत नहीं होगी. हालांकि न्यूज़ 18 इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है.
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