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हरियाणा पुलिस चुनावी ड्यूटी में व्‍यस्‍त और किसान बेधड़क जला रहे हैं पराली

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Updated: October 14, 2019, 2:27 PM IST
हरियाणा पुलिस चुनावी ड्यूटी में व्‍यस्‍त और किसान बेधड़क जला रहे हैं पराली
हरियाणा राज्‍य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, पिछले 15 दिन में ही 350 से ज्‍यादा जगहों पर पराली जलाने की सेटेलाइट इमेज मिली हैं.

हर साल पराली जलाए जाने (Stubble Burning) के कारण दिल्‍ली-एनसीआर, पंजाब और हरियाणा में एयर क्‍वालिटी (Air Quality) का स्‍तर बहुत खराब स्थिति में पहुंच जाता है. राष्‍ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) ने 2015 में राजस्‍थान, उत्‍तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने पर पाबंदी (Ban) लगा दी थी. एनजीटी ने पराली जलाने वाले किसानों पर जुर्माना (Penalty) लगाने की व्‍यवस्‍था शुरू कर दी थी. इस बार हरियाणा में चुनावी ड्यूटी (Election Duty) के कारण पुलिस ऐसे किसानों को नजरअंदाज कर रही है.

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  • Last Updated: October 14, 2019, 2:27 PM IST
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रौनक कुमार गुंजन

करनाल. हरियाणा के करनाल (Karnal) में सोहना गांव (Sohana village) के सुरेश और छह अन्‍य किसानों के खिलाफ पिछले मंगलवार पराली जलाने के लिए मामला (FIR) दर्ज किया गया है. हालांकि, बीते सप्‍ताह के दौरान सोहना के अलावा आसपास के कई गांव के किसानों ने भी खेत में पराली जलाई, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. यहां तक कि सुरेश ने भी अब तक कोई जुर्माना (Penalty) नहीं भरा है. दरअसल, हरियाणा पुलिस (Haryana Police) चुनावी ड्यूटी (Election Duty) में व्‍यस्‍त होने के कारण पराली जलाने वाले किसानों को नजरअंदाज कर रही है. हालांकि, राज्‍य पुलिस लापरवाही बरतने की बात से इनकार कर रही है. बता दें कि हरियाणा विधानसभा चुनाव (Assembly Eclection) के लिए 21 अक्‍टूबर को मतदान (Polling) होना है.

किसानों को खेत में पराली जलाने की मिल गई है खुली छूट
राष्‍ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) ने दिसंबर, 2015 में राजस्‍थान (Rajasthan), उत्‍तर प्रदेश (UP), हरियाणा (Haryana) और पंजाब (Punjab) में पराली जलाने (Stubble Burning) पर पाबंदी (Ban) लगा दी थी. पराली जलाना भारतीय दंड संहिता (IPC) और प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम, 1981 के तहत अपराध (Crime) है. News18 ने हरियाणा के अंबाला, कुरुक्षेत्र और करनाल जिलों का दौरा करने पर पाया कि इन इलाकों के किसानों के लिए अभी भी कुछ नहीं बदला है. ज्‍यादातर किसान पराली को खेत में ही जला रहे हैं. इस साल पुलिस की चुनाव में व्‍यस्‍तता के कारण उन्‍हें पराली जलाने की छूट मिल गई है.

इस साल दिन में भी पराली जला रहे हैं हरियाणा के किसान
किसान सुरेश का कहना है कि मैं ही खेतों में पराली नहीं जला रहा हूं. हर किसान यही कर रहा है. मुझे तो उपायुक्‍त (Deputy Commissioner) ने पराली जलाते हुए देख लिया और मेरे खिलाफ मामला दर्ज हो गया. कुरुक्षेत्र में एक किसान ने कहा कि मैं हमेशा शाम ढलने के बाद ही पराली जलाता हूं ताकि कोई मुझे ऐसा करते हुए न देख पाए. इस साल पुलिस पेट्रोलिंग (Police Patrolling) भी पिछले वर्षों के मुकाबले कम है. ऐसे में इस बार मैंने दिन में भी पराली जलाई है. करनाल को हिसार (Hisar) से जोड़ने वाले राजमार्ग (Highway) के दोनों तरफ के खेतों (Paddy Fields) में या तो पराली जलाई जा रही है या जलाई जा चुकी है.

पिछले साल हरियाणा में एक हेक्‍टेयर तक के खेत में पराली जलाने पर 2,500 रुपये का जुर्माना तय किया गया था. वहीं, एक हेक्‍टेयर से दो हेक्‍टेयर के खेत के लिए जुर्माना राशि 5,000 रुपये तय की गई थी.

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पिछले 15 दिन में दर्ज की गई हैं महज 58 एफआईआर
हरियाणा राज्‍य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के मुताबिक, पिछले 15 दिन में ही 350 से ज्‍यादा जगहों पर पराली जलाने की सेटेलाइट इमेज (Satellite Image) मिली हैं. वहीं, अब तक महज 58 मामलों में ही एफआईआर दर्ज की गई है. पिछले साल एक हेक्‍टेयर तक के खेत में पराली जलाने पर 2,500 रुपये का जुर्माना तय किया गया था. वहीं, एक हेक्‍टेयर से दो हेक्‍टेयर के खेत के लिए जुर्माना राशि 5,000 रुपये तय की गई थी. इसके अलावा पिछले साल पांच हेक्‍टेयर से ज्‍यादा के खेत में पराली जलाने पर 15,000 रुपये जुर्माना वसूला गया था. पिछले साल 6,000 से ज्‍यादा चालान काटकर 50.05 लाख रुपये की वसूली की गई थी.

सरकार की ओर से मुहैया कराई जा रही सुविधाएं हैं महंगी
कुरुक्षेत्र थाना प्रभारी का कहना है कि ज्‍यादातर अधिकारी चुनावी ड्यूटी में व्‍यस्‍त हैं. इसके बावजूद पराली जलाने वाले किसानों को जानबूझकर नहीं छोड़ा जा रहा है. हमें ऐसा करने का किसी की तरफ से निर्देश नहीं मिला है. करनाल के एक किसान सुरेंद्र सांगवान ने कहा कि कोई भी किसानों से खेतों में पराली नहीं जलाने की उम्‍मीद कैसे कर सकता है. कर्ज (Debt) में डूबा हुआ किसान राज्‍य सरकार की ओर से मुहैया कराई जा रही महंगी मशीनों का इस्‍तेमाल कैसे करेगा? इसमें खर्च होने वाले अतिरिक्‍त डीजल का बोझ कौन उठाएगा? बता दें कि आजकल किसान कंबाइन मशीन (Combine Machine) से कटाई करा रहे हैं. ये मशीन 12 से 14 इंच लंबी पराली छोड़ देती है. धान की कटाई के बाद अगली फसल (Crop) की बुआई के लिए किसानों को महज 15 से 20 दिन ही मिलते हैं. इसलिए वे पराली में आग लगा देते हैं.

हर साल अक्‍टूबर से बढ़ना शुरू हो जाता है वायु प्रदूषण
हर साल अक्‍टूबर से दिल्‍ली-एनसीआर, हरियाणा और पंजाब में वायु प्रदूषण (Air Pollution) का स्‍तर पराली जलाए जाने के कारण बुरी तरह से बढ़ना शुरू हो जाता है. इस समस्‍या से निपटने के लिए राज्‍य सरकार (State Government) ने हैप्‍पी सीडर्स (Happy Seeders) और सुपर एसएमएस (Super-SMS) सुविधा पर छूट शुरू की थी. इसके अलावा मशीनों को किराये पर देने की सुविधा भी शुरू की थी. हैप्‍पी सीडर्स गेहूं की बुआई में किसानों की मदद करते हैं. ये बुआई के साथ ही खेतों में खड़ी पराली को काटकर बोई गई फसल पर फैला देते हैं. इससे खेत में नमी भी बनी रहती है. वहीं, सुपर-एसएमएस में कंबाइन के साथ एक और मशीन जोड़ी जाती है. ये मशीन कटाई के बाद बची हुई पराली को पूरे खेत में बराबर-बराबर फेंक देती है. इससे सुपर सीडर्स को बुआई में आसानी होती है.

'पराली जलाने का कोई खर्च नहीं, मशीनों पर हजारों का खर्च'
किसानों को राज्‍य सरकार की ओर से उपलब्‍ध कराए जाने वाले दोनों ही तरीके महंगे लगते हैं और वे पराली में आग लगा देते हैं. किसान सांगवान कहते हैं कि पराली को जलाने में कोई खर्चा नहीं आता, जबकि दोनों तरीकों में हजारों रुपये का खर्च आता है. वह पूछते हैं कि ऐसे में दोनों तरीके किसानों के लिए व्‍यवहारिक कैसे हुए? अंबाला के धौरकारा गांव के किसान तेग सिंह पर भी पिछले साल 3,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था. वह कहते हैं कि कई दशकों से खेतों में ही पराली जलाने का चलन है. फिर क्‍यों पिछले पांच साल में इसे लेकर इतना शोर मचाया जा रहा है. प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने अच्‍छा कदम उठाया है, लेकिन इसके लिए किसानों को मुआवजा दिया जाना चाहिए.

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First published: October 14, 2019, 1:43 PM IST
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