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सिंघु बॉर्डर पर आंदोलन में भीड़ पर नजर रखने को किसानों ने लगाए सीसीटीवी

किसानों ने लगवाए सीसीटीवी. (File pic AP)
किसानों ने लगवाए सीसीटीवी. (File pic AP)

Farmer Protest: किसान यूनियनों का कहना है कि आंदोलन को शांतिपूर्वक बनाए रखने और अराजकतत्‍वों को दूर रखने के लिए ये सीसीटीवी लगवाए गए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 27, 2020, 10:23 AM IST
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नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार की ओर से लाए गए 3 कृषि कानूनों (Farm Laws) को विरोध करने के लिए 26 नवंबर को करीब 3000 से अधिक किसान दिल्‍ली के सिंघु बॉर्डर (Singhu Border) पर आए थे. ये किसान पंजाब और हरियाणा से अपने ट्रैक्‍टर ट्रॉली (Farmer Protest) से आए थे. इसमें शामिल एक ट्रक पर दो दिन बाद ही छोटा सा स्‍टेज बना दिया गया था. इस पर लोग भाषण देते थे. अब यह ही स्‍टेज दो मंजिला पंडाल में बदल गया है. मतलब यह है कि अब आंदोलन स्‍थल पर बड़ी संख्‍या में भीड़ आ रही है. इस देखते हुए किसानों ने निगरानी के लिए स्‍थल पर 8 सीसीटीवी कैमरे लगवाए हैं.

किसान यूनियनों का कहना है कि आंदोलन को शांतिपूर्वक बनाए रखने और अराजकतत्‍वों को दूर रखने के लिए ये सीसीटीवी लगवाए गए हैं. सीसीटीवी विभाग का प्रबंधन देखने वाले गुरदीप सिंह का कहना है कि ये कैमरे हमें आंदोलन स्‍थल का विहंगम दृश्य उपलब्ध कराते हैं क्योंकि अब तक बहुत सारे लोग आ चुके हैं. हमें उन घटनाओं के बारे में पता चलता है, जहां गलत मकसद वाले लोग समस्याएं पैदा करने की कोशिश करते हैं. इस तरह हम जो कुछ भी हो रहा है उसका रिकॉर्ड रख सकते हैं और किसी भी असामाजिक गतिविधि के लिए हमें दोषी ठहराने वाले किसी भी बयानबाजी का हम मुकाबला कर सकते हैं.

बता दें कि किसान संगठनों ने शनिवार को सरकार के साथ बातचीत फिर से शुरू करने का फैसला किया और अगले दौर की वार्ता के लिए 29 दिसंबर की तारीख का प्रस्ताव दिया, ताकि नए कानूनों को लेकर बना गतिरोध दूर हो सके. संगठनों ने साथ ही यह स्पष्ट किया कि कानूनों को निरस्त करने के तौर-तरीके के साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए गारंटी का मुद्दा एजेंडा में शामिल होना चाहिए.

कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे 40 किसान यूनियनों के मुख्य संगठन संयुक्त किसान मोर्चा की एक बैठक में यह फैसला किया गया. इस फैसले से एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोर दिया था कि उनकी सरकार अपने कटु आलोचकों समेत सभी से बातचीत के लिये तैयार है, लेकिन यह बातचीत तर्कसंगत, तथ्यों और मुद्दों पर आधारित होनी चाहिए.
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