Assembly Banner 2021

किसान संगठनों ने ECAA के क्रियान्वयन की संसदीय समिति की मांग की आलोचना की

किसान आंदोलन (फ़ाइल फोटो)

किसान आंदोलन (फ़ाइल फोटो)

Farmer Protest: एसकेएम ने कहा, ‘‘हम किसानों, श्रमिकों एवं आम नागरिकों से अपील करते हैं कि वे तीनों कानूनों को रद्द करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य के कानूनी अधिकार के लिए अपना संघर्ष तेज करें.’’

  • Share this:
नई दिल्ली. किसान संगठनों (Farmer Organizations) ने आवश्यक वस्तु संशोधन कानून (ईसीएए) के तत्काल क्रियान्वयन की एक संसदीय समिति (Parliamentary Committee) की मांग की रविवार को आलोचना की. ईसीएए उन तीन कानूनों में से एक है, जिनके खिलाफ किसान दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं. संसदीय समिति ने सरकार से ईसीएए का क्रियान्वयन करने को कहा है. इस समिति में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और आप समेत विपक्षी दलों के सदस्य भी शामिल हैं. ये दल केंद्र द्वारा हाल में लागू किए गए तीन नए कृषि कानूनों को रद्द किए जाने की मांग कर रहे हैं.

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने एक बयान में कहा, ‘‘यह गरीब लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा और किसानों की फसलों की खरीदारी बढ़ाने की मांग के प्रति असंवेदनशील है.’’ एसकेएम ने कहा, ‘‘हम किसानों, श्रमिकों एवं आम नागरिकों से अपील करते हैं कि वे तीनों कानूनों को रद्द करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य के कानूनी अधिकार के लिए अपना संघर्ष तेज करें.’’ उसने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ ‘किसान महापंचायतों’ को मिले अभूतपूर्व समर्थन से स्पष्ट है कि 26 मार्च को प्रस्तावित ‘भारत बंद’ सफल रहेगा.

Youtube Video




ये भी पढ़ें- मोदी सरकार होली मनाने के लिए दे रही 10,000 रुपये एडवांस,जानें कैसे उठाएं फायदा
उसने कहा कि आपात सेवाओं को छोड़कर सभी सेवाएं उस दिन सुबह छह से शाम छह बजे तक निलंबित रहेंगी.

संयुक्त किसान मोर्चा ने लगाया ये आरोप
इससे पहले संयुक्त किसान मोर्चा ने आरोप लगाया कि यह अधिनियम निजी क्षेत्र को ‘असीमित मात्रा में जमाखोरी और कालाबाजारी करने’ की छूट देता है. इस मोर्चे में 40 से अधिक किसान संगठन शामिल हैं. संयुक्त किसान मोर्चा ने एक बयान जारी कर आरोप लगाया, ‘‘यह अधिनियम निजी क्षेत्र को असीमित मात्रा में जमाखोरी और कालाबाजारी करने की अनुमति देता है. इसके लागू होने से देश में जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) और इसका पूरा ढांचा खत्म हो जाएगा.’’

उसने कहा, ‘‘यह बहुत ही शर्मनाक है कि किसान आंदोलन के समर्थन का दावा कर रही कई पार्टियों ने इस अधिनियम को लागू करने की पैरवी की है. हम समिति से अपील करते हैं कि वह अपनी अनुशंसाएं वापस ले.’’



(Disclaimer: यह खबर सीधे सिंडीकेट फीड से पब्लिश हुई है. इसे News18Hindi टीम ने संपादित नहीं किया है.)
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज