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Farm Laws: किसानों ने आम जनता से हाथ जोड़ कर मांगी माफी, कहा- हम मजबूर हैं

कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन जारी है. (AP Photo/Altaf Qadri)
कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन जारी है. (AP Photo/Altaf Qadri)

किसान आंदोलन (Farmers Protest) Highlights: किसानों के संगठन ने नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन के चलते बीते कई दिनों से कुछ प्रमुख सड़कें बंद होने से लोगों को हो रही असुविधा के लिये सोमवार को 'हाथ जोड़कर' माफी मांगी और कहा कि उन्हें 'मजबूरी में' प्रदर्शन करना पड़ रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 15, 2020, 5:45 AM IST
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Farmers Protest 19th Day Updates: मोदी सरकार के नए कृषि कानूनों (New Agriculture Laws 2020) की वापसी की मांग को लेकर किसानों के आंदोलन का सोमवार को 19वां दिन था. कृषि कानूनों के खिलाफ सोमावर को देशभर के किसान भूख हड़ताल पर थे. इस बीच बैठकों का दौर भी चला, सोमवार सुबह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ मुलाकात की. दूसरी ओर हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मिलने पहुंचे.

किसानों के संगठन ने नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन के चलते बीते कई दिनों से कुछ प्रमुख सड़कें बंद होने से लोगों को हो रही असुविधा के लिये सोमवार को 'हाथ जोड़कर' माफी मांगी और कहा कि उन्हें 'मजबूरी में' प्रदर्शन करना पड़ रहा है.  दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने अपनी ओर से खेद प्रकट करने के लिये हरियाणा-राजस्थान सीमा के निकट जयपुर-दिल्ली राजमार्ग पर यात्रियों को हिंदी में लिखे पर्चे बांटे. साथ ही उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी अमलीजामा पहनाने की अपनी मांग भी दोहराई.

 'सड़कें बंद कर लोगों को परेशान करना हमारा मकसद नहीं है'
संयुक्त किसान मोर्चा के पर्चों पर लिखा था, 'सड़कें बंद कर लोगों को परेशान करना हमारा मकसद नहीं है. हम मजबूरी के तहत यहां बैठें हैं. अगर हमारे आंदोलन से आपको असुविधा हुई हो तो हम उसके लिये हाथ जोड़कर माफी मांगते हैं.' किसान, विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा के किसान बीते करीब तीन हफ्तों से दिल्ली के सिंघू, टीकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर डटे हुए हैं, जिससे राष्ट्रीय राजधानी को हरियाणा और पंजाब से जोड़ने वाली मुख्य सड़कों पर जाम की समस्या खड़ी हो गई है.
आप पार्टी के कार्यकर्ताओं ने रखा एक दिन का उपवास


प्रदर्शनकारी किसानों के समर्थन में आम आदमी पार्टी के दफ्तर में एक दिन के अनशन में शामिल हुए केजरीवाल ने कहा कि नये कृषि कानून ‘महंगाई को लाइसेंस’ देने वाले हैं. किसान नेताओं ने सोमवार को केंद्र के नये कृषि कानूनों के खिलाफ एक दिन की भूख हड़ताल की और कहा कि बाद में शाम को सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन होंगे.

किसान विरोधी हैं कृषि कानून, महंगाई बेतहाशा बढ़ेगी
केजरीवाल ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह कानून कहता है कि लोग जितना चाहें, जमाखोरी कर सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘‘मैं पार्टियों से किसानों के मुद्दे पर गंदी राजनीति नहीं करने की अपील करता हूं. ये कानून किसान विरोधी और आम आदमी विरोधी हैं और कुछ पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए हैं. इन कानूनों से जमाखोरी के जरिये बहुत महंगाई बढ़ेगी.’’ केजरीवाल ने कहा कि ये ‘किसान विरोधी’ कानून न केवल किसानों के लिए विनाशकारी हैं बल्कि भारत के सभी नागरिकों के लिए भी बहुत खतरनाक हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘इन कानूनों के बाद रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ने लगेंगे. इन कानूनों ने महंगाई का लाइसेंस दिया है. हम कह सकते हैं कि इन कानूनों ने महंगाई को कानूनी जामा पहना दिया है.’’ केजरीवाल ने कहा, ‘‘हम जानते हैं कि कई कारोबारी अवैध तरीके से प्याज और अन्य जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी करते हैं. इससे महंगाई बढ़ती है.’’ उन्होंने कहा कि ये कानून कहते हैं कि बेहिसाब जमाखोरी की जा सकती है. केजरीवाल ने कहा, ‘‘हर धर्म में जमाखोरी पाप है और गैरकानूनी है. इस कानून से अगर जमाखोरी वैध हो जाएगी तो अमीर लोग और जमाखोरी शुरू कर देंगे और महंगाई बढ़ेगी.’’उन्होंने कहा कि इन कानूनों की वजह से गेहूं आने वाले सालों में चार गुना महंगा हो जाएगा.

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया जावड़ेकर के घर के बाहर प्रदर्शन
पुणे में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के आवास के बाहर किसानों के आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन करने वाले युवा कांग्रेस के 30 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया. युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की मांग कर रहे थे. कोठरूड थाने के वरिष्ठ निरीक्षक सुनील तांबे ने बताया कि हिरासत में लिए गए लोगों को बाद में रिहा कर दिया गया.

10 संगठनों ने किया कृषि कानूनों का समर्थन
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति के सदस्य तमिलनाडु, तेलंगाना, महाराष्ट्र, बिहार से आए थे. उन्होंने फार्म बिल का समर्थन किया और हमें उसी पर एक पत्र दिया. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए ऐसा किया है और वे इसका स्वागत और समर्थन करते हैं. तोमर ने आगे कहा कि हमने कहा है कि हम वार्ता के लिए तैयार हैं. यदि उनका (किसान यूनियनों का) प्रस्ताव आता है, तो सरकार निश्चित रूप से यह करेगी. हम चाहते हैं कि चर्चा को खंड द्वारा आयोजित किया जाए. वे हमारे प्रस्ताव पर अपनी राय देंगे, हम निश्चित रूप से आगे की बातचीत करेंगे.
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