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Kisan Andolan: तोमर से मिले हरियाणा के किसान, 8 जनवरी को बैठक में SYL मुद्दा उठाने की रखी मांग

Kisan Andolan 43 Day: किसान संगठन तीनों कृषि सुधार संबंधी कानूनों को वापस लिये जाने की अपनी मांग पर अड़े हुए है, वहीं सरकार लगातार नए कानून के फायदे गिनाने में लगी हुई है.
Kisan Andolan 43 Day: किसान संगठन तीनों कृषि सुधार संबंधी कानूनों को वापस लिये जाने की अपनी मांग पर अड़े हुए है, वहीं सरकार लगातार नए कानून के फायदे गिनाने में लगी हुई है.

Kisan Andolan 43 Day: किसान संगठन तीनों कृषि सुधार संबंधी कानूनों को वापस लिये जाने की अपनी मांग पर अड़े हुए है, वहीं सरकार लगातार नए कानून के फायदे गिनाने में लगी हुई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 11, 2021, 1:05 PM IST
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नई दिल्ली. मोदी सरकार के नए कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के आंदोलन का गुरुवार को 43वां दिन है. 8 जनवरी को केन्द्र सरकार के साथ आठवें दौर की बातचीत होने जा रही है. लेकिन, इससे पहले सरकार पर दबाव बनाने के लिए किसानों ने गुरुवार को अपना शक्ति प्रदर्शन किया. किसानों की तरफ से सिंघु, टिकरी, गाजीपुर और शाहजहांपुर (हरियाणा-राजस्थान सीमा) से कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेस-वे के लिए ट्रैक्टर मार्च निकाला गया. ट्रैक्टर रैली के चलते गुरुवार को ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे पर आम लोगों की आवाजाही बंद कर दी गई.

इस बीच प्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन पर चिंता जाहिर की है. कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि क्या किसान आंदोलन में कोरोना को लेकर क्या नियमों का पालन किया जा सकता है. हमें डर है कि कहीं इस आंदोलन का हाल तबलीगी जमात जैसा न हो जाए. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) एसए बोबड़े ने कहा कि हमें नहीं पता कि किसान कोविड से सुरक्षित हैं या नहीं. आप भीड़ को लेकर गाइडलाइन बनाइए.

किसान संगठन तीनों कृषि सुधार संबंधी कानूनों को वापस लिये जाने की अपनी मांग पर अड़े हुए है, वहीं सरकार लगातार नए कानून के फायदे गिनाने में लगी हुई है. इससे पहले, सातवें दौर की किसान संगठनों के साथ बातचीत के बाद केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि 8 जनवरी को आगामी बैठक में समाधान निकलेगा, लेकिन ताली दोनों हाथों से बजती है.



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इसी बीच हरियाणा के किसानों के एक समूह ने गुरुवार को बृहस्पतिवार को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की और प्रदर्शनकारी किसान संघों के साथ शुक्रवार होने वाली आठवें दौर की वार्ता में उन्हें भी शामिल करने का अनुरोध किया. वे सतलुज यमुना संपर्क (एसवाईएल) नहर का लंबे समय से लंबित मुद्दा उठाना चाहते हैं. इसके अलावा, जाने-माने धार्मिक नेता पंजाब के नानकसर गुरुद्वारा के प्रमुख बाबा लखा ने भी तोमर से यहां अलग से मुलाकात की और किसानों के प्रदर्शनों से संबंधित मुद्दों लेकर चर्चा की.



हरियाणा युवा किसान संघर्ष समिति (एचवाईकेएसएस) के सदस्य तोमर से मिले हैं. इस संगठन के प्रमुख पूर्व विधायक नरेश यादव अतेली हैं. इसकी तवज्जो एसवाईएल मुद्दे पर थी.

पैदल 130 किमी का सफर करके आए हैं किसान
बीस किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल महेंद्रगढ़ जिले के अतेली शहर से 130 किलोमीटर तक सफर पैदल तय करके राष्ट्रीय राजधानी पहुंचा है. वे 30 दिसंबर को रवाना हुए थे.

पत्रकारों से बातचीत करते हुए अतेली ने कहा, " मैंने मंत्री से कहा कि आप आठ जनवरी की बैठक के लिए किसान नेताओं को आमंत्रित कर रहे हैं. कृपया हमारे 11 सदस्यों को भी आमंत्रित करें. हम भी किसान हैं और एसवाईएल नहर का मुद्दा उठाना चाहते हैं."

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उन्होंने कहा कि एसवाईएल का मुद्दा 45 साल पुराना है जबकि नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन हालिया है. सरकार को पंजाब के साथ एसवाईएल नहर का मुद्दा निपटाने को प्राथमिकता देनी चाहिए.

अतेली ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का आदेश भी हरियाणा के पक्ष में आया है और अगर नहर का काम पूरा हो गया होता तो राज्य को लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि के लिए पानी मिल गया होता.

एचवाईकेएसएस के प्रमुख ने कहा कि मुद्दे को केंद्रीय जनशक्ति मंत्रालय के साथ भी उठाया गया है.

उन्होंने कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे प्रदर्शन से लोगों को परेशानी हो रही है, क्योंकि इससे यातायात जाम हो गया है.
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