अपना शहर चुनें

States

Kisan Andolan: दोनों पक्ष समाधान चाहते हैं लेकिन अलग विचारधारा वालों की वजह से दिक्कतें- सरकार

किसान कानून वापस लिए जाने की मांग पर अड़े हुए हैं. (फोटो: AP)
किसान कानून वापस लिए जाने की मांग पर अड़े हुए हैं. (फोटो: AP)

Kisan Andolan: गृहमंत्री अमित शाह ने किसानों की आमदनी बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है, मगर किसान संगठनों को कहना है कि कृषि कानूनों की वापसी से कम उन्हें कुछ नहीं चाहिए.

  • Share this:
नई दिल्ली. तीन कृषि कानूनों (Farm Laws) को लेकर सरकार और किसान संगठनों (Farmer Unions) के बीच बुधवार को होने वाली 10वें दौर की वार्ता से दो दिन पहले सरकार ने सोमवार को कहा कि दोनों पक्ष मामले का जल्द समाधान चाहते हैं लेकिन अलग विचारधारा के लोगों की संलिप्तता की वजह से इसमें देरी हो रही है. सरकार ने यह दावा किया कि नये कृषि कानून किसानों के हित में हैं और कहा कि जब भी कोई अच्छा कदम उठाया जाता है तो इसमें अड़चनें आती हैं. सरकार ने कहा कि मामले को सुलझाने में देरी इसलिए हो रही है क्योंकि किसान नेता अपने हिसाब से समाधान चाहते हैं.

सरकार और प्रदर्शनकारी 41 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच बुधवार को वार्ता प्रस्तावित है. कोर्ट द्वारा इस मामले को सुलझाने के मकसद से गठित समिति मंगलवार को अपनी पहली बैठक करेगी. केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री परषोत्तम रूपाला ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘जब किसान हमसे सीधी बात करते हैं तो अलग बात होती है लेकिन जब इसमें नेता शामिल हो जाते हैं, अड़चनें सामने आती हैं. अगर किसानों से सीधी वार्ता होती तो जल्दी समाधान हो सकता था.’’

ये भी पढ़ें- चीन और WHO सक्रियता दिखाते तो कोरोना महामारी नहीं बनता



उन्होंने कहा कि चूंकि विभिन्न विचारधारा के लोग इस आंदोलन में प्रवेश कर गए हैं, इसलिए वे अपने तरीके से समाधान चाहते हैं. उन्होंने कहा, ‘‘दोनों पक्ष समाधान चाहते हैं लेकिन दोनों के अलग-अलग विचार हैं. इसलिए विलंब हो रहा है. कोई न कोई समाधान जरूर निकलेगा.’’
50 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं किसान
ज्ञात हो कि पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों के किसान दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर पिछले लगभग 50 दिनों से तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं.

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने इस बीच डिजिटल माध्यम से एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दोहराया कि तीनों कृषि कानून किसानों के लिए लाभकारी होंगे. उन्होंने कहा, ‘‘पिछली सरकारें भी ये कानून लागू करना चाहती थीं लेकिन दबाव के कारण वे ऐसा नहीं कर सकीं. मोदी सरकार ने कड़े निर्णय लिए और ये कानून लेकर आई. जब भी कोई अच्छी चीज होती है तो अड़चने भी आती हैं.’’

10वें दौर की वार्ता से पहले मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, असम, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के 270 कृषि उत्पादक संघों के एक प्रतिनिधिमंडल ने रूपाला से मुलाकात की और तीनों कानूनों को वापस न लेने की अपील की. दूसरे कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी भी इस बैठक में उपस्थित थे.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज