अपना शहर चुनें

States

प्रदर्शनकारी किसानों ने ‘निर्णायक लड़ाई’ का संकल्प लिया, प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर हमला बोला

किसानों का प्रदर्शन जारी है. (फाइल फोटो)
किसानों का प्रदर्शन जारी है. (फाइल फोटो)

Farmers Protest: किसानों के 30 से अधिक संगठनों की रविवार को हुई बैठक में किसानों के बुराड़ी मैदान पहुंचने पर तीन दिसंबर की तय तारीख से पहले वार्ता की केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पेशकश पर बातचीत की गई, लेकिन हजारों प्रदर्शनकारियों ने इस प्रस्ताव को स्वीकारने से इनकार कर दिया और सर्दी में एक और रात सिंघू तथा टीकरी बार्डरों पर डटे रहने की बात कही.

  • Share this:
नई दिल्ली. किसान नेताओं ने केंद्र की अपील को दरकिनार करते हुए सोमवार को कहा कि वे नए कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ ‘‘निर्णायक लड़ाई’’ के लिए दिल्ली आए हैं और मांगें पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. वहीं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने कानूनों का बचाव किया और विपक्षी दलों पर हमला बोलते हुए कहा कि वे सरकार के फैसले पर भ्रम फैला रहे हैं. उधर, विपक्षी दलों ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है और कहा है कि केंद्र को किसानों के ‘‘लोकतांत्रिक संघर्ष का सम्मान’’ करना चाहिए तथा संबंधित कानूनों को निरस्त करना चाहिए. प्रदर्शनकारी किसानों के एक प्रतिनिधि ने सिंघू बॉर्डर पर संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जब तक किसानों की मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा.

भारतीय किसान यूनियन (दकौंडा) के महासचिव जगमोहन सिंह ने कहा, ‘‘हम अपनी मांगों से समझौता नहीं कर सकते.’’ उन्होंने कहा कि यदि सत्तारूढ़ पार्टी उनकी चिंता पर विचार नहीं करती तो उसे ‘‘भारी कीमत’’ चुकानी होगी. किसानों के प्रतिनिधि ने कहा, ‘‘हम यहां निर्णायक लड़ाई के लिए आए हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम दिल्ली की सीमाओं पर डटे रहेंगे और यहां से अपनी रणनीति बनाएंगे. हम प्रधानमंत्री से यह कहने के लिए दिल्ली आए हैं कि वह किसानों के ‘मन की बात’ सुनें, अन्यथा सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी को भारी कीमत चुकानी होगी....’’

प्रदर्शनकारियों पर अब तक दर्ज किए गए हैं 31 केस
वहीं, भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि आंदोलन को ‘‘दबाने’’ के लिए अब तक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लगभग 31 मामले दर्ज किए गए हैं. चढूनी ने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं हो जातीं, किसानों का प्रदर्शन जारी रहेगा. उन्होंने दावा किया कि नए कृषि कानूनों से देश के कृषि व्यवसाय पर कॉरपोरेट घरानों का एकाधिकार हो जाएगा.




ये भी पढ़ें- रिमोट-कंट्रोल मशीनगन से की गई ईरानी साइंटिस्ट फखरीजादेह की हत्या

भारतीय किसान यूनियन उत्तर प्रदेश के महासचिव हरेंद्र नेहरा ने कहा कि नए कृषि कानूनों को वापस लिए जाने तक वे राष्ट्रीय राजधानी के पास यूपी गेट पर बैठे रहेंगे. वहीं, यूपी गेट पर बैठे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा, ‘‘यदि हमारी मांगें नहीं मानी जाती हैं तो अगले गणतंत्र दिवस तक आंदोलन जारी रखने के लिए हमारे पास पर्याप्त राशन है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम बात करने के लिए दिल्ली के बुराड़ी में संत निरंकारी मैदान नहीं जाएंगे. हम सरकार से अपनी शर्तों पर राष्ट्रीय राजधानी के रामलीला मैदान में बात करेंगे.’’

किसानों ने सड़क पर लगाया है अस्थायी
भारतीय किसान यूनियन के उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष राजबीर सिंह ने कहा कि यूनियन से जुड़े किसानों ने सड़क पर एक अस्थायी तंबू लगाया है और इसे टिकैत के आवास में परिवर्तित किया गया है. मुद्दे का कोई हल न निकलते देख कई केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा नेताओं ने किसानों से आग्रह किया कि वे कृषि सुधारों के बारे में ‘‘गलतफहमी’’ के शिकार न हों और नए कानूनों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तथा मंडियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

वहीं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नए कृषि कानूनों के मुद्दे पर विपक्षी दलों पर हमला करते हुए आज कहा कि ‘‘छल का इतिहास रखने वाले लोग’’ नए ‘‘ट्रेंड’’ के तहत पिछले कुछ समय से सरकार के फैसले पर भ्रम फैला रहे हैं.

पीएम मोदी ने विपक्ष पर बोला हमला
प्रधानमंत्री ने अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी के खजूरी गांव में ‘छह लेन मार्ग चौड़ीकरण’ के लोकार्पण अवसर पर संबोधन में कहा, 'पहले सरकार का कोई फैसला अगर किसी को पसंद नहीं आता था तो उसका विरोध होता था लेकिन बीते कुछ समय से हमें नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है. अब विरोध का आधार फैसला नहीं, बल्कि भ्रम और आशंकाएं फैलाकर उनको आधार बनाया जा रहा है.' उन्होंने कहा, 'दुष्प्रचार किया जाता है कि फैसला तो ठीक है लेकिन पता नहीं इससे आगे चलकर क्या-क्या होगा. फिर कहते हैं कि ऐसा होगा जो अभी हुआ ही नहीं है. जो कभी होगा ही नहीं उसको लेकर समाज में भ्रम फैलाया जाता है. ऐतिहासिक कृषि सुधारों के मामले में भी जानबूझकर यही खेल खेला जा रहा है. हमें याद रखना है कि ये वही लोग हैं जिन्होंने दशकों तक किसानों के साथ लगातार छल किया है.' प्रधानमंत्री ने कहा, 'हम गंगाजल जैसी पवित्र नीयत से काम कर रहे हैं. आशंकाओं के आधार पर भ्रम फैलाने वालों की सच्चाई लगातार देश के सामने आ रही है. जब एक विषय पर इनका झूठ किसान समझ जाते हैं तो ये दूसरे विषय पर झूठ फैलाने में लग जाते हैं. चौबीसों घंटे उनका यही काम है. देश के किसान इस बात को भली-भांति समझते हैं.' उन्होंने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा, 'जिन किसान परिवारों की अब भी कुछ चिंता है, कुछ सवाल हैं तो उनका जवाब भी सरकार निरंतर दे रही है, समाधान करने का भरपूर प्रयास कर रही है. आज जिन किसानों को कृषि सुधारों को लेकर कुछ शंकाएं हैं, वो भी भविष्य में इन सुधारों का लाभ पाकर अपनी आय बढ़ाएंगे, यह मेरा पक्का विश्वास है.' मोदी ने पिछली कांग्रेस नीत सरकारों पर प्रहार करते हुए कहा, 'एमएसपी तो घोषित होता था लेकिन एमएसपी पर खरीद बहुत कम की जाती थी. सालों तक एमएसपी को लेकर छल किया गया है. किसानों के नाम पर बड़े-बड़े कर्ज माफी के पैकेज घोषित किए जाते थे लेकिन वे छोटे और सीमांत किसानों तक पहुंचते ही नहीं थे. किसानों के नाम पर बड़ी-बड़ी योजनाएं घोषित होती थीं लेकिन वह खुद मानते थे कि एक रुपये में से सिर्फ 15 पैसे ही किसान तक पहुंचते हैं.' उन्होंने किसी पार्टी का नाम लिए बगैर आरोप लगाया, 'पहले वोट के लिए वादा और फिर छल, यही खेल लंबे समय तक देश में चलता रहा. जब इतिहास छल का रहा हो, तब दो बातें बड़ी स्वाभाविक हैं. पहली यह कि किसान अगर सरकारों की बातों से कई बार आशंकित रहता है तो उसके पीछे दशकों का लंबा हल्का इतिहास है. दूसरी बात यह कि जिन्होंने वादे तोड़े, छल किया, उनके लिए यह झूठ फैलाना एक प्रकार से आदत बन गई है, लेकिन जब इस सरकार का ट्रैक रिकॉर्ड देखोगे तो सच आपके सामने खुलकर आ जाएगा.'

ये भी पढ़ें- किसान आंदोलन: दूसरे राज्यों से दिल्ली में सब्जियों, फलों की आपूर्ति प्रभावित

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमने वादा किया था कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुरूप किसानों को लागत का डेढ़ गुना एमएसपी देंगे. यह वादा सिर्फ कागज पर नहीं, बल्कि हमने पूरा किया और इतना ही नहीं किसान के बैंक खाते तक पैसे पहुंचाने का प्रबंध किया.’’ मोदी ने कहा, 'सफल प्रकल्प ही काफी नहीं होता. किसानों को बड़े और व्यापक बाजार का लाभ भी मिलना चाहिए. हमारा देश दुनिया के बड़े बाजार हमारे किसानों को उपलब्ध कराता है, इसलिए विकल्प के माध्यम से किसानों को सशक्त करने का रास्ता अपनाया गया है किसान हित में किए गए कृषि सुधार ऐसे ही विकल्प किसानों को देते हैं.' उन्होंने कहा, 'अगर कोई पुराने सिस्टम से ही लेन-देन को ठीक समझता है तो उसपर भी इस कानून में कहां कोई रोक लगाई गई है? नए कृषि सुधारों से किसानों को नए विकल्प और नए कानूनी संरक्षण ही तो दिए गए हैं.'

मोदी ने कहा, 'पहले तो मंडी के बाहर हुए लेन-देन ही गैरकानूनी माने जाते थे. ऐसे में छोटे किसानों के साथ अक्सर धोखा होता था, विवाद होते थे क्योंकि छोटा किसान तो मंडी पहुंच ही नहीं पाता था. अब ऐसा नहीं है. अब छोटे से छोटा किसान भी मंडी से बाहर हुए हर सौदे को लेकर कानूनी कार्यवाही कर सकता है, यानी किसान को अब नए विकल्प भी मिले हैं और उसे धोखे से बचाने के लिए कानूनी संरक्षण भी मिला है.' उन्होंने नए कृषि कानूनों के तहत न्यूतनम समर्थन मूल्य (एमएसपी) खत्म किए जाने की साजिश के विपक्ष के आरोप पर कहा, 'अगर हमें मंडियों और एमएसपी को ही हटाना होता तो हम इनपर इतना निवेश ही क्यों करते. हमारी सरकार मंडियों को मजबूत बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है.’’

कांग्रेस ने किसानों के लिए शुरू किया अभियान
उधर, कांग्रेस ने किसानों के समर्थन में सोशल मीडिया पर अभियान शुरू कर दिया और कहा कि उसके सदस्य प्रदर्शनकारियों की सहायता करेंगे. वहीं, द्रमुक और इसके सहयोगी दलों ने भी बयान जारी किया.

ये भी पढ़ें- किसानों के हक में हो फैसला, नहीं तो सहयोगी बने रहना मुश्किल: हनुमान बेनीवाल

कांग्रेस के ‘स्पीक अप फॉर फार्मर्स’ नामक सोशल मीडिया अभियान के तहत एक वीडियो जारी राहुल गांधी ने कहा, ‘‘देश का किसान काले कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ ठंड में, अपना घर-खेत छोड़कर दिल्ली तक आ पहुंचा है. सत्य और असत्य की लड़ाई में आप किसके साथ खड़े हैं - अन्नदाता किसान या प्रधानमंत्री के पूंजीपति मित्र?’’

उन्होंने कहा, ‘‘देशभक्ति देश की शक्ति की रक्षा होती है. देश की शक्ति किसान है. सवाल यह है कि आज किसान सड़कों पर क्यों है? वह सैकड़ों किलोमीटर चलकर दिल्ली की तरफ क्यों आ रहा है? नरेन्द्र मोदी जी कहते हैं कि तीन कानून किसान के हित में है. अगर ये कानून किसान के हित में है तो किसान इनका गुस्सा क्यों है, वह खुश क्यों नहीं है?’’

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, ‘‘ये कानून मोदी जी के दो-तीन मित्रों के लिए है, किसान से चोरी करने के कानून हैं.’’

राहुल गांधी ने कहा, ‘‘हमें किसान की शक्ति के साथ खड़ा होना पड़ेगा. ये किसान जहां भी हैं उनके साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आम जनता को खड़ा होना चाहिए. इनको भोजन देना चाहिए. इनकी मदद करनी चाहिए.’’

विपक्ष ने की केंद्र के रुख की निंदा
द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन, टीएनसीसी प्रमुख के एस अलागिरि, एमडीएमके महासचिव वाइको, माकपा के राज्य सचिव के. बालकृष्णन, भाकपा के राज्य सचिव आर मुथारसन तथा अन्य ने संयुक्त बयान जारी कर केंद्र के रुख की निन्दा की.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविनद केजरीवाल ने दिल्ली के लोगों से अपील की कि वे प्रदर्शनकारियों की मदद करें और केंद्र से आग्रह किया कि वह किसानों के साथ जल्द से जल्द बात करे.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उम्मीद जताई कि केंद्र किसानों के साथ बातचीत में एमएसपी के बारे में उनके डर को दूर करने में सफल होगा.

हनुमान बेनीवाल ने की कानून वापस लेने की मांग
राजस्थान के नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने केंद्र से तीनों कृषि कानूनों को तत्काल वापस लेने तथा स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने की अपील की.

भाजपा नेता एवं केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कई ट्वीट कर कहा, ‘‘नए कृषि कानून कृषि उत्पाद बाजार समिति (एपीएएमसी) मंडियों को समाप्त नहीं करते हैं. मंडियां पहले की तरह ही चलती रहेंगी. नए कानून ने किसानों को अपनी फसल कहीं भी बेचने की आज़ादी दी है. जो भी किसानों को सबसे अच्छा दाम देगा, वो फसल खरीद पायेगा चाहे वो मंडी में हो या मंडी के बाहर.’’

प्रसाद ने कहा, ‘‘कृषि विधेयक के संबंध में कई भ्रम फैलाए जा रहे हैं ,जैसे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं देने के लिए कृषि विधेयक एक साजिश है, बल्कि सच्चाई यह है कि कृषि विधेयकों का न्यूनतम समर्थन मूल्य से कोई लेना- देना नहीं है, एमएसपी मूल्य मिलता रहा है और मिलता रहेगा.’’

उन्होंने जोर देकर कहा, ‘‘नए कृषि कानून के अंतर्गत बड़ी कंपनियां ‘कॉन्ट्रैक्ट’ के नाम पर किसानों का शोषण नहीं कर पाएंगी. किसान बिना किसी जुर्माने के किसी भी समय ‘कॉन्ट्रैक्ट’ से बाहर निकल सकता है. ‘कॉन्ट्रैक्ट’ से किसानों को निर्धारित दाम पाने की गारंटी भी मिलेगी.’’

ये भी पढ़ें- विरोध के बीच MSP पर धान की बंपर खरीद, 30 लाख किसानों को मिला सीधा फायदा

केंद्रीय मंत्रियों ने बताया सरकार का रुख
पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, "कृषि कानूनों के बारे में गलत धारणाएं नहीं रखें. पंजाब के किसानों ने मंडी में पिछले साल की तुलना में अधिक धान बेचा है और अधिक एमएसपी पर, एमएसपी कायम है और मंडी भी. और सरकारी खरीद भी हो रही है.’’

भाजपा नेता अनुराग ठाकुर ने कहा कि कृषि क्षेत्र में सुधार से किसानों के लिए लाभ और अवसरों में वृद्धि के नए अवसर खुल रहे हैं.

वहीं, आप के पूर्व नेता एवं अखिल भारतीय संघर्ष समन्वय समिति के राष्ट्रीय कार्यकारी समूह के सदस्य योगेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि किसानों के आंदोलन के बारे में पांच झूठ फैलाए जा रहे हैं, जिनमें यह झूठ भी शामिल है कि आंदोलन में केवल पंजाब के किसान शामिल हैं.

स्वराज इंडिया के प्रमुख यादव ने कहा कि विभिन्न राज्यों के किसानों के इस ‘‘ऐतिहासिक आंदोलन’’ के ‘‘ऐतिहासिक परिणाम’’ निकलेंगे.

यूपी गेट के अलावा किसान पिछले पांच दिन से दिल्ली के सिंघू और टीकरी बॉर्डरों पर डटे हुए हैं. प्रदर्शनकारी किसानों में ज्यादातर पंजाब से हैं.

गौरतलब है कि केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किसान संगठनों से बुराड़ी मैदान पहुंचने की अपील की थी और कहा था कि वहां पहुंचते ही केन्द्रीय मंत्रियों का एक उच्चस्तरीय दल उनसे बातचीत करेगा.

किसानों के 30 से अधिक संगठनों की रविवार को हुई बैठक में किसानों के बुराड़ी मैदान पहुंचने पर तीन दिसंबर की तय तारीख से पहले वार्ता की केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पेशकश पर बातचीत की गई, लेकिन हजारों प्रदर्शनकारियों ने इस प्रस्ताव को स्वीकारने से इनकार कर दिया और सर्दी में एक और रात सिंघू तथा टीकरी बार्डरों पर डटे रहने की बात कही.

उनके प्रतिनिधियों ने कहा था कि उन्हें शाह की यह शर्त स्वीकार नहीं है कि वे प्रदर्शन स्थल बदल दें. उन्होंने दावा किया था कि बुराड़ी मैदान एक ‘खुली जेल’ है.

केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ने के बीच उत्तर प्रदेश से लगते दिल्ली-गाजियाबाद बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा मजबूत कर दी है और कंक्रीट के अवरोधक लगा दिए हैं.

राष्ट्रीय राजधानी को दूसरे हिस्सों से जोड़ने वाले कई अन्य राजमार्गों को भी अवरुद्ध करने की किसानों की चेतावनी के बीच सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

सिंघू और टीकरी बॉर्डर दोनों जगह शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन जारी है तथा पिछले दो दिन से किसी अप्रिय घटना की कोई खबर नहीं मिली है, लेकिन पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से और किसानों के पहुंचने से गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ गई है.

दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि यूपी गेट के पास गाजीपुर बॉर्डर पर स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है. उन्होंने कहा, ‘‘प्रदर्शनकारी किसानों को राष्ट्रीय राजधानी में घुसने से रोकने के लिए सीमेंट के अवरोधक लगाए गए हैं.’’ पुलिस ने हालांकि कहा कि दिल्ली-गाजियाबाद बॉर्डर को सील नहीं किया गया है.

पांच दिन से टीकरी बॉर्डर पर प्रदर्शन में शामिल सुखविंदर सिंह ने कहा कि किसान दिल्ली की सीमाओं पर अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे क्योंकि वे बुराड़ी मैदान नहीं जाना चाहते. सिंह ने कहा, ‘‘कम से कम छह महीने तक रहने के लिए हमारे पास पर्याप्त राशन है. हम बुराड़ी नहीं जाना चाहते. यदि हम यहां से जाएंगे तो केवल जंतर-मंतर जाएंगे. हम कहीं और जगह प्रदर्शन नहीं करेंगे.’’ उन्होंने कहा कि वे केंद्र से बातचीत को तैयार हैं, लेकिन यदि बातचीत से कोई समाधान नहीं निकलता है तो वे दिल्ली की तरफ जा रहे सभी मार्गों को अवरुद्ध कर देंगे. सिंह ने कहा, ‘‘हम यहां (टीकरी बॉर्डर) से तब तक नहीं जाएंगे जब तक कि हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं. हम ठंड का सामना करने को तैयार हैं, हम आगे किसी भी चुनौती का सामना करने को तैयार हैं.’’

सिंघू बॉर्डर पर एक चिकित्सा शिविर भी लगाया गया है, जो दो डॉक्टरों द्वारा संचालित किया जा रहा है.

गुरुग्राम से पहुंचीं डॉक्टर सारिका वर्मा ने कहा, ‘‘हम आज यहां आए हैं. हम अपने स्तर पर किसानों की मदद कर रहे हैं. हमारे पास रक्तचाप संबंधी दवाएं, पैरासिटामोल, क्रोसिन और अन्य दवाएं हैं.’’

वर्मा ने कहा, ‘‘किसान कोविड-19 के बारे में अधिक जागरूक नहीं हैं. उनमें से अनेक ने मास्क नहीं पहन रखा है जिससे मानव जीवन को खतरा पैदा होता है. हम खासकर उन लोगों को मास्क बांट रहे हैं, जो बुजुर्ग हैं या जिनको खांसी है.’’

दूसरे डॉक्टर करण जुनेजा ने कहा कि उन्होंने 300 किसानों को साधारण दवाएं बांटी हैं और प्रदर्शन स्थल पर कोविड-19 संबंधी जांच किए जाने की आवश्यकता है. प्रदर्शन के कारण दिल्ली में यातायात प्रभावित हो रहा है.



दिल्ली यातायात पुलिस ने सोमवार सुबह लोगों को सिंघू और टीकरी बॉर्डर के बंद रहने की जानकारी देते हुए कहा कि वे अन्य मार्गों का इस्तेमाल करें. इसने ट्वीट किया, ‘‘ सिंघू बॉर्डर अब भी दोनों ओर से बंद है. कृपया दूसरे मार्ग से जाएं. मुकरबा चौक और जीटीके रोड पर यातायात परिवर्तित किया गया है. भयंकर जाम लगा है. कृपया सिग्नेचर ब्रिज से रोहिणी और रोहिणी से सिग्नेचर ब्रिज, जीटीके रोड, एनएच-44 और सिंघू बॉर्डर तक बाहरी रिंग रोड मार्ग पर जाने से बचें.’’

इसने अन्य एक ट्वीट में कहा, ‘‘ टीकरी बॉर्डर पर भी यातायात बंद है. हरियाणा के लिए सीमावर्ती झाड़ौदा, ढांसा, दौराला झटीकरा, बडूसरी, कापसहेड़ा, राजोकरी एनएच-8, बिजवासन / बजघेरा, पालम विहार और डूंडाहेड़ा बॉर्डर खुले हैं.’’

वहीं, चिकित्सा विशेषज्ञों ने किसानों के प्रदर्शन के चलते कोविड-19 के गंभीर प्रसार की आशंका जताई है. इसके जवाब में किसानों ने कहा कि उनके लिए कोरोना वायरस के मुकाबले नए कृषि कानून अधिक खतरनाक हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज