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Kisan Andolan: प्रदर्शन कर रहे किसानों ने लोहड़ी पर नए कृषि कानूनों की प्रतियां जलाईं

Farmers Protest: दिल्ली-हरियाणा सीमा पर कतार में लकड़ियां एकत्र कर जलाई गईं और उसके चारों तरफ घूमते हुए किसानों ने नए कृषि कानूनों की प्रतियां जलाईं. इस दौरान प्रदर्शनकारी किसानों ने नारे लगाए, गीत गाए और अपने आंदोलन की जीत की प्रार्थना की.

  • News18Hindi
  • | January 13, 2021, 23:00 IST
    LAST UPDATED A YEAR AGO
    17:45 (IST)
     किसानों ने लोहड़ी पर कृषि कानूनों की प्रतियां जलाईं
    14:52 (IST)
    कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों ने लोहड़ी पर तीन कानूनों की प्रतियां जलाई.

    13:23 (IST)
    किसान आंदोलन में किसानों की मौत को लेकर राहुल गांधी ने फिर से ट्वीट कर सरकार पर निशाना साधा है. राहुल ने लिखा- '60 से ज़्यादा अन्नदाता की शहादत से मोदी सरकार शर्मिंदा नहीं हुई, लेकिन ट्रैक्टर रैली से इन्हें शर्मिंदगी हो रही है!'

    12:42 (IST)
    कमेटी में भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान, अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान के डायरेक्टर डॉ. प्रमोद कुमार जोशी, कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी और महाराष्ट्र के शेतकारी संगठन के अध्यक्ष अनिल घनवट हैं। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली बेंच ने कमेटी को 10 दिन में काम शुरू करने के आदेश दिए हैं.

    11:22 (IST)

    इस सबंध में जानकारी देते किसानों ने बताया कि किसान सुच्चा सिंह (गुरदासपुर के गांव खोखर निवासी) संघर्ष में हिस्सा लेने के लिए पहुंच था. उसने कहा था कि उससे किसानों का दुख देखा नहीं जा रहा और लगता है कि इसी वजह से उस ने अपनी शहादत दी है.

    11:21 (IST)
    पठानकोट-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पड़ते लदपालवा टोल प्लाजा के समीप एक किसान ने कृषि कानूनों के विरोध में जहर निगल लिया. इसके चलते किसान को इलाज के लिए निजी अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई. किसान की मौत के बाद अन्‍य किसानों ने अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया.

    नई दिल्ली. दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बुधवार को लोहड़ी (Lohri) के मौके पर प्रदर्शन स्थलों पर नए कृषि कानूनों (Farm Laws) की प्रतियां जलाईं. संयुक्त किसान मोर्चा के परमजीत सिंह ने कहा कि अकेले सिंघू बॉर्डर (Singhu Border) पर ही कृषि कानूनों की एक लाख प्रतियां जलाई गईं. वसंत की शुरुआत में पंजाब, हरियाणा समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में लोहड़ी का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन लोग लकड़ियां इकट्ठी करके जलाते हैं और सुख एवं समृद्धि की कामना करते हैं.

    हरियाणा के करनाल जिले से आए 65 वर्षीय गुरप्रीत सिंह संधू ने कहा, ' उत्सव इंतजार कर सकते हैं. केंद्र की ओर से जिस दिन इन काले कानूनों को वापस लेने की हमारी मांग को मान लिया जाएगा, हम उसी दिन सभी त्योहारों को मनाएंगे.' दिल्ली-हरियाणा सीमा पर कतार में लकड़ियां एकत्र कर जलाई गईं और उसके चारों तरफ घूमते हुए किसानों ने नए कृषि कानूनों की प्रतियां जलाईं. इस दौरान प्रदर्शनकारी किसानों ने नारे लगाए, गीत गाए और अपने आंदोलन की जीत की प्रार्थना की.

    ये भी पढ़ें- देश के 10 राज्यों में बर्ड फ्लू की पुष्टि, केंद्र का निर्देश- अफवाहों से बचने के लिए एडवायजरी जारी करें राज्य

    पंजाब के बरनाला जिले से आए 34 वर्षीय किसान राजबीर सिंह ने कहा, ' यह लोहड़ी संघर्षों से भरी है. इस बार घर में हर साल मनाई जाने वाली लोहड़ी के दौरान होने वाले नृत्य और गीत जैसा उत्साह नहीं है. हालांकि, मैं यहां प्रदर्शन में शामिल होकर खुश हूं और अपने किसान परिवार के साथ उत्सव मना रहा हूं.' उन्होंने कहा, 'आज, हमनें प्रतियां जलाई हैं और कल, केंद्र इन्हें जलाएगा. उन्हें ऐसा करना पड़ेगा, हम उन्हें ऐसा करने को मजबूर कर देंगे.'

    28 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर डटे हैं किसान
    इस बीच, किसान आंदोलन कार्यालय में भी योगेंद्र यादव, गुरनाम सिंह चढूनी समेत अन्य किसान नेताओं ने भी कृषि कानूनों की प्रतियां जलाईं.

    हजारों किसान केन्द्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ 28 नवम्बर, 2020 से दिल्ली की सीमाओं पर डटे हैं.

    इस साल सितम्बर में अमल में आए तीनों कानूनों को केन्द्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में बड़े सुधारों के तौर पर पेश किया है. उसका कहना है कि इन कानूनों के आने से बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाएगी और किसान अपनी उपज देश में कहीं भी बेच सकेंगे.

    ये भी पढ़ें- 17 माह में तीसरी बार येडियुरप्पा सरकार का कैबिनेट विस्तार, फिर भी असंतोष कायम

    दूसरी तरफ, प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों का कहना है कि इन कानूनों से एमएसपी का सुरक्षा कवच और मंडियां भी खत्म हो जाएंगी तथा खेती बड़े कॉरपोरेट समूहों के हाथ में चली जाएगी.
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