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ब्रिटिश शासन में भी वापस हुए हैं कृषि कानून- राज्‍यसभा में गुलाम नबी आजाद ने सुनाया किस्‍सा

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सरकार को जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए सदन में एक विधेयक लाना चाहिए   (Pic- ANI)
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सरकार को जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए सदन में एक विधेयक लाना चाहिए (Pic- ANI)

Farmers Protest: विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से आग्रह किया कि सरकार इन तीनों कृषि कानूनों को वापस ले.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 3, 2021, 6:32 PM IST
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नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार के कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ किसानों की ओर से किए जा रहे आंदोलन (Farmers Protest) के बीच बुधवार को संसद के बजट सत्र के तहत राज्‍यसभा (Rajya Sabha) में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई. इस दौरान विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से आग्रह किया कि सरकार इन तीनों कृषि कानूनों को वापस ले. इस दौरान गुलाम नबी आजाद ने राज्‍यसभा में यह भी कहा कि ब्रिटिश काल में भी कृषि कानून वापस लिए गए हैं. वह विपक्ष की ओर से बोल रहे थे.

गुलाम नबी आजाद ने राज्‍यसभा में अपने भाषण की शुरुआत वर्ष 1900 के जिक्र से शुरू की. उन्होंने ब्रिटिश काल का जिक्र करते हुए राज्‍यसभा में कहा कि किसानों की ताकत के आगे सरकार को हर बार झुकना पड़ा है. 1900 से 1906 के बीच अंग्रेज सरकार तीन कानून लेकर आई थी. कानून में प्रावधान किया गया था कि जमीन के मालिकाना हक से किसानों को वंचित रखा जाएगा और जमीन की असल मालिक ब्रिटिश सरकार होगी. उन्‍होंने कहा कि इस कानून में प्रावधान था कि किसानों का अपने घर और पेड़ पर भी हक नहीं बचेगा.





गुलाम नबी आजाद ने राज्‍यसभा में कहा कि ब्रिटिश सरकार के इस कानून पर खूब हंगामा हुआ. इसके खिलाफ 1907 में आंदोलन शुरू हुआ था. किसानों के इस आंदोलन का नेतृत्‍व सरदार अजीत सिंह और अन्य लोग कर रहे थे. सरदार अजीत सिंह शहीद भगत सिंह के बड़े भाई थे. इस दौरान पूरे पंजाब में धरना-प्रदर्शन किए गए.

उन्‍होंने यह भी कहा कि आंदोलन के समय 'पगड़ी संभाल जट्टा, पगड़ी संभाल जट्टा...' गीत बना. इस गीत ने किसानों और अन्‍य लोगों में जोश भरा. लाला लाजपत राय ने भी इस बड़े आंदोलन का समर्थन किया था. ब्रिटिश सरकार ने हालांकि बाद में इसमें संशोधन किया था. लेकिन किसानों के भड़कने के बाद उन्‍हें इसे वापस लेना पड़ा था.
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