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फारुक अब्दुल्ला ने की भारत-पाकिस्तान में वार्ता की पैरवी, कहा- दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ जंग नहीं जीत सकते

फारुक अब्दुल्ला ने भारत-पाकिस्तान से नए संबंधों को लेकर गंभीर रहने को कहा. (फाइल फोटो)

फारुक अब्दुल्ला ने भारत-पाकिस्तान से नए संबंधों को लेकर गंभीर रहने को कहा. (फाइल फोटो)

Farooq Abdullah India Pakistan Dialogue: श्रीनगर से लोकसभा सदस्य फारुक अब्दुल्ला ने कहा कि दोनों देश विकास के लिए हाथ मिलाकर काफी कुछ पा सकते हैं.

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    श्रीनगर. नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारुक अब्दुल्ला ने रविवार को सतत एवं परिणामोन्मुखी भारत-पाकिस्तान वार्ता प्रक्रिया का आह्वान किया और कहा कि दोनों देशों को यह अहसास होना चाहिए कि वे एक-दूसरे के खिलाफ जंग नहीं जीत सकते. दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में दो अलग-अलग बैठकों के दौरान पार्टी पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए श्रीनगर से लोकसभा सदस्य अब्दुल्ला ने दोनों देशों से नए संबंधों को लेकर गंभीर रहने को कहा.


    उन्होंने दोनों देशों से यह सुनिश्चित करने को भी कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोग 'कभी ना समाप्त होने वाले अपने दुखों' से निजात पा सकें. साथ ही जोर दिया कि वार्ता का कोई विकल्प नहीं है. अब्दुल्ला ने कहा, 'मैंने हमेशा कहा है कि दोनों देशों को साथ मिलकर रहना होगा. यह उन पर है कि क्या वे दुश्मनों की तरह जीना चाहते हैं या विकास में सहायक मित्र एवं साझेदार की तरह. दोनों देश विकास के लिए हाथ मिलाकर काफी कुछ पा सकते हैं.'





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    इससे पहले, फारुक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यधारा के नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के एक महीने बाद कहा कि जमीनी स्तर पर 'उसके बाद कोई परिणाम' नहीं दिखे हैं. अब्दुल्ला ने नई दिल्ली में 24 जून को हुई बैठक में प्रधानमंत्री की ओर से की गई टिप्पणी के संदर्भ में यह बात कही कि वह जम्मू-कश्मीर के लोगों का दिल जीतना चाहते हैं और 'दिल्ली की दूरी' के साथ 'दिल की दूरी' मिटाना चाहते हैं.




    पूर्व में तीन बार मुख्यमंत्री रहे अब्दुल्ला ने यहां पीटीआई-भाषा से कहा, 'वह स्वागत योग्य बयान था, लेकिन लोगों के दिल जीतने के लिए जमीनी स्तर पर कोई प्रयास नहीं हुए. लोगों को हिरासत में लेना जारी है और असहमति को बर्दाश्त नहीं किया जा रहा. हम जमीन पर बदलाव होते हुए देखना चाहते हैं, अपने राज्य के टुकड़े होने, एक ही झटके में उसका विशेष दर्जा छीन लिए जाने के आघात से गुजरे लोगों को वापस जीतने की दिख सकने वाली कोशिश.'

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