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जिस कानून के तहत गिरफ्तार हैं फारूक, वो उन्हीं के पिता ने 'लकड़ी चोरों' के लिए बनाया था

भाषा
Updated: September 16, 2019, 8:39 PM IST
जिस कानून के तहत गिरफ्तार हैं फारूक, वो उन्हीं के पिता ने 'लकड़ी चोरों' के लिए बनाया था
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक फारूक अब्दुल्ला को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया है. पीएसए कानून को 1978 में फारूक अब्दुल्ला के पिता शेख अब्दुल्ला ने ही लागू किया था.

जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) से अनुच्छेद 370 (Article 370) हटाए जाने के बाद से ही फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah), उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah), महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) समेत राज्य के कई नेता नजरबंद हैं.

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  • Last Updated: September 16, 2019, 8:39 PM IST
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श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) से अनुच्छेद 370 (Article 370) हटाए जाने के बाद से ही फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah), उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah), महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) समेत राज्य के कई नेता नजरबंद हैं. लेकिन अब इन नेताओं को नजरबंद रखने के करीब एक महीने बाद फारूक अब्दुल्ला को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक फारूक अब्दुल्ला को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया है. पीएसए कानून को 1978 में फारूक अब्दुल्ला के पिता शेख अब्दुल्ला ने ही लागू किया था.

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला (Sheikh Abdullah) ने कभी नहीं सोचा होगा कि 1978 में उनके द्वारा लाए गए जन सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत एक दिन उनके बेटे फारूक अब्दुल्ला को ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा. इस कानून को राज्य में लकड़ी की तस्करी से निपटने के लिये लागू किया गया था.

शेख अब्दुल्ला लाए थे ये कानून
अधिकारियों ने सोमवार को कहा कि कठोर जन सुरक्षा कानून जम्मू-कश्मीर में लकड़ी की तस्करी को रोकने के लिये लागू किया गया था क्योंकि उस समय ऐसे अपराध में शामिल लोग मामूली हिरासत के बाद आसानी से छूट जाते थे. शेख अब्दुल्ला लकड़ी तस्करों के खिलाफ अधिनियम को एक निवारक के रूप में लाए थे जिसके तहत बिना किसी मुकदमे के दो साल तक जेल की सजा देने का प्रावधान किया गया.

अधिकारियों ने कहा कि 1990 के दशक की शुरुआत में जब राज्य में उग्रवाद भड़का तो यह अधिनियम पुलिस और सुरक्षा बलों के काम आया. 1990 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने राज्य में विवादास्पद सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम को लागू किया तो बड़े पैमाने पर पीएसए का इस्तेमाल पर लोगों को पकड़ने के लिये किया गया.

पिता के बनाए कानून में फंसे फारूक अब्दुल्ला
पुलिस ने तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके और पांच बार के सांसद फारूक अब्दुल्ला को चार दशक पुराने इस कानून के तहत हिरासत में ले लिया. पीएसए के तहत हिरासत की एक आधिकारिक समिति द्वारा समय समय पर समीक्षा की जाती है और इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है.
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2012 में कानून में संशोधन कर कुछ कड़े प्रावधानों में छूट दी गई. संशोधन के बाद, बिना किसी मुकदमे के पहली बार अपराधी या व्यक्ति को हिरासत में रखने की अवधि दो साल से घटाकर छह महीने कर दी गई. उन्होंने कहा कि हालांकि, यदि आवश्यक हो, तो हिरासत को दो वर्ष तक बढ़ाने के लिए अधिनियम में प्रावधान रखा गया है.

कांग्रेस ने किया विरोध
कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला को जन सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत हिरासत में लिए जाने की निंदा करते हुए कहा कि एक ‘राष्ट्रभक्त’ नेता के खिलाफ इस कानून का इस्तेमाल करना उचित नहीं है. पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यह देश का दुर्भाग्य है कि भारत की एकता एवं अखंडता की लड़ाई लड़ने वाले नेताओं को जेल में डाला जा रहा है.

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First published: September 16, 2019, 8:31 PM IST
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