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मुस्लिम होने की वजह से उमर खालिद को फंसाया जा रहा: पिता

मुस्लिम होने की वजह से उमर खालिद को फंसाया जा रहा: पिता

देशद्रोह के आरोप में फरार चल रहे जेएनयू के छात्र उमर खालिद के पिता सैय्यद कासिम इलियास का कहना है कि मुस्लिम होने की वजह से उनके बेटे को इस मामले में फंसाया जा रहा है।

    नई दिल्ली। देशद्रोह के आरोप में फरार चल रहे जेएनयू के छात्र उमर खालिद के पिता सैय्यद कासिम इलियास का कहना है कि मुस्लिम होने की वजह से उनके बेटे को इस मामले में फंसाया जा रहा है। उमर के पिता के मुताबिक जिस कार्यक्रम को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उसमें एबीवीपी के भी लोग थे, कुछ कश्मीरी भी शामिल थे। सभी ने मिलकर नारेबाजी की थी लेकिन इस मामले में सिर्फ उनके बेटे का नाम घसीटा जा रहा है।

    हमारी मीडिया जिस तरह से जजमेंटल अप्रोच अपनाई हुई है ये गलत है। जहां तक 9-10 फरवरी के कार्यक्रम का ताल्लुक है तो उसमें सभी लोग शामिल थे। वहां एबीवीपी के भी लोग थे, कुछ कश्मीरी भी थे, सभी ने नारेबाजी की थी। लेकिन एक शख्स को ही निशाना बनाया जा रहा है और कम्युनलाइज किया जा रहा है। 10 आयोजकों में से उसका नाम 7वां था।

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    पिता ने कहा कि उमर की विचारधारा से हम सहमत नहीं हैं। हम प्रैक्टिसिंग मुस्लिम हैं और वो कम्युनिस्ट विचारधारा मानता है। मैं जानता हूं वो टेररिस्ट नहीं है, उसने इसी बात पर अपना पासपोर्ट नहीं बनाया क्योंकि वो देश के लिए ही काम करना चाहता था। उसका ज्यादातर वक्त जेएनयू और जंतर मंतर पर ही गुजरता है।

    हमें कन्हैया को उठाए जाने पर भी आपत्ति है और उमर खालिद औऱ बाकी लोगों के नाम पर कम्युनलाइज किया जाने पर भी आपत्ति है। जहां तक अफजल गुरू की फांसी पर आवाज उठाने की बात है तो ये पहला शख्स नहीं है जिसने आवाज उठाई। कई बड़े लोगों ने भी इसके खिलाफ आवाज उठाई है, लेकिन उन्हें तो देशद्रोही नहीं कहा गया।

    मैं साफ कर दूं कि जो नारेबाजी हुई उसको हम समर्थन नहीं देते, लेकिन देशद्रोह क्या है उसका फैसला कोर्ट करेगा। मेरा जो पास्ट है, वो उस वक्त का है जब SIMI के खिलाफ कोई आरोप नहीं था। 1985 में मैं SIMI से रिटायर हो गया था जब उमर पैदा भी नहीं हुआ था। जबकि सिमी पर 2001 में बैन लगा था। इसलिए मेरा सिमी से किसी भी तरह का ताल्लुक नहीं है।

    Umar_khalidr

    मीडिया में कई तरह की बातें की गईं, कहा गया कि वो पाकिस्तान गया था। उसका कोई पासपोर्ट नहीं है। उसको येल यूनिवर्सिटी से बुलाया था लेकिन नहीं गया क्योंकि उसको देश में रहकर ही काम करना है। कल मैंने पढ़ा कि आईबी कह रही है कि उनके पास कोई सबूत ही नहीं है कि वो पाकिस्तान गया था। इसलिए अदालत को फैसला कर लेने दीजिए, वहां से जो फैसला होगा वो हमें स्वीकार्य होगा।

    वो टाइम्स नाउ पर गया था, अगर वो टेररिस्ट होता तो क्या वो पब्लिक के सामने जाता। अगर यूनिवर्सिटी के भीतर कुछ गलत हुआ तो पहला काम यूनिवर्सिटी का होता कि वो देखे क्या गलत है। लेकिन क्योंकि जेएनयू से आपकी विचारधारा नहीं मिलती तो आपने वहां यूनिवर्सिटी को पुलिस छावनी बना दिया। जहां तक उमर का सवाल है तो हम खुद चिंतित हैं कि वो इस वक्त कहां है। मैं खुद कई बार अपील कर चुका हूं कि वो सामने आए, सरेंडर करे औऱ कोर्ट का फैसला आने दिया जाए।

    लेकिन कोर्ट भी सुरक्षित नहीं है। वहां पत्रकारों पर हमला हो रहा है छात्रों पर हमला हो रहा है और पुलिस चुपचाप खड़ी है। कोर्ट रूम के अंदर कन्हैया पर हमला होता है, लेकिन कुछ नहीं किया जाता। हमें तो ये भी नहीं पता कि वो कहां है या पुलिस ने ही उसे अरेस्ट किया हुआ है या वो गायब हुआ है। पुलिस कुछ न बता रही है न हमसे पूछ रही है।

    मीडिया दो धड़ो में बांटने की कोशिश कर रहा है। ये सब लोग टेररिस्ट नहीं है बल्कि देश के लिए काम करना चाहते हैं। आप उसकी प्रोफाइलिंग कर रहे हैं, बड़ा बड़ा करके चेहरा दिखा रहे हैं। कल अगर उसे छोड़ दिया जाता है तो क्या वो नॉर्मल लाइफ गुजार पाएगा क्या?

     

    Tags: Jnu

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