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गौरक्षकों का खौफ: PM को 200 ट्वीट करने के बाद भी नहीं हो पा रहा गाय का इलाज

गौरक्षकों का खौफ: PM को 200 ट्वीट करने के बाद भी नहीं हो पा रहा गाय का इलाज

गाय (प्रतीकात्मक तस्वीर)
(firstpost)

गाय (प्रतीकात्मक तस्वीर) (firstpost)

गौरक्षा के नाम पर होने वाले हिंसा आए दिन खबरों में आती रहती है. इस हिंसा से गौवंश की सुरक्षा हो न हो लोग गायों की मदद से डरने लगे हैं.

    गौरक्षा के नाम पर होने वाले हिंसा आम बात हो गई है. इस हिंसा से गौवंश की सुरक्षा हो न हो, लोग गायों को मदद पहुंचाने से भी डरने लगे हैं. ऐसे ही डर का एक मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ से सामने आया है जहां गौरक्षकों के डर से बीमार गाय को अस्पताल ले जाने के लिए कोई तैयार नहीं है.

    मेरठ में रहने वाली ज्योति ठाकुर की गाय को लकवा मार गया है. इलाज के लिए उन्हें अपनी गाय को इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट ले जाना है लेकिन गौरक्षकों के डर की वजह से कोई भी ट्रक ड्राइवर उनकी गाय को मेरठ से बरेली ले जाने को तैयार नहीं है. मेरठ से बरेली के बीच की दूरी लगभग 200 किलोमीटर है.



    हर एक प्रयास करने के बाद भी कोई हल न ढूंढ पाने के बाद ज्योति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और यहां तक बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह तक से मदद की गुहार लगाई. लेकिन फिर भी किसी भी नेता से उनको कोई जवाब नहीं मिला.



    ज्योति ने कहा, अभी तक मुझे किसी ने भी आश्वासन नहीं दिया है. हम मजबूर हैं. ज्योति बेंगलुरु में एक प्राइवेट कंपनी में काम करती हैं. और फिलहाल मेरठ में अपने पैतृक गांव लाला मोहम्मदपुर में रुकी हुई हैं. उनका कहना है कि इस मुश्किल के कारण वो अपने काम पर बेंगलुरु भी नहीं लौट पा रही हैं.



    उन्होंने बताया कि उनकी गाय 'मोनी' 28 अक्टूबर को बीमार हो गई थी. एक स्थानीय जानवरों के डॉक्टर ने उसका इलाज किया, वो ठीक भी हो गई. लेकिन दो दिन बाद अचानक से फिर बीमार पड़ गई. इसके बाद मोनी की सेहत में सुधार न आता देख डॉक्टरों ने उसे बरेली में आईवीआरआई ले जाने को कहा.

    उन्होंने आगे कहा कि जब हमने लोकल ट्रक डाइवरों और ट्रांसपोर्टरों से बात की, तो उन लोगों ने गाय को ले जाने से साफ इनकार कर दिया. उन लोगों ने कहा कि हाईवे पर गौरक्षों के हमले का खतरा रहता है. जो ड्राइवर और क्लीनर गाय को ले जाते हैं, वो उन्हें मारते हैं. गाय बीमार है और गौरक्षकों को शक होगा कि हम उसे मारने के लिए ले जा रहे हैं.

    ज्योति ने पीएम को कई ट्वीट किए. उसने ट्विटर पर लिखा, सर हमें आपकी जरूरत है. मोनी को मदद चाहिए. आपको 200 से ज्यादा ट्वीट भेजे, इमेल भेजे हैं. 15 दिन से योगी जी नहीं सुन रहे. क्या मोनी गाय होते हुए भी गौमाता नहीं है. हमें आपसे आर्थिक मदद नहीं चाहिए. हमें बस एक गाड़ी और रेस्क्यू टाइम चाहिए, जिससे हम मोनी को बरेली आईवीआरआई ले जा सकें.

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