प्रवासी मजदूरों की शिकायतों के समाधान के लिए बनाए 20 कंट्रोल रूम, Whatsapp पर भी मिलेंगे सवालों के जवाब

  (AP Photo/Manish Swarup)

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Coronavirus In India: पीड़ित श्रमिक ई-मेल, मोबाइल और वॉट्सऐप के जरिये कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकते हैं.

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  • Last Updated: April 22, 2021, 1:40 PM IST
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नई दिल्ली. श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (Ministry Of Labor) ने मंगलवार को प्रवासी श्रमिकों (Migrant Laborers) की शिकायतों के समाधान के लिए 20 कंट्रोल रूम स्थापित किये जाने की घोषणा की. देश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले और उसकी रोकथाम के लिए विभिन्न राज्य सरकारों की पाबंदियों के बीच यह कदम उठाया गया है.

मंत्रालय ने पिछले साल भी श्रमिकों की वेतन नहीं मिलने समेत अन्य शिकायतों के समाधान के लिए ऐसे 20 कंट्रोल रूम बनाये थे. मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) डी पी एस नेगी ने पीटीआई-भाषा से कहा कि 20 कंट्रोल रूम फिर स्थापित किये गए हैं. इस बार इन कंट्रोल रूम में अधिकारियों की संख्या पिछले साल के मुकबले ज्यादा है. श्रम सचिव अपूर्व चंद्रा ने एक बयान में कहा कि ये कंट्रोल रूम प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं के सुलझाने में मदद करेंगे.

श्रम मंत्रालय ने कहा- फिर से शुरू किए कंट्रोल रूम

श्रम मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘कोविड-19 संक्रमण के बढ़ते मामले और कई राज्यों में लगायी गयी पाबंदियों को देखते हुए श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने अप्रैल 2020 में गठित 20 कंट्रोल रूम फिर से चालू किए हैं. इसका मकसद मुख्य श्रम आयुक्त कार्यालय के तहत विभिन्न राज्य सरकारों के साथ समन्वय के जरिये प्रवासी श्रमिकों की समस्या का समाधान करना है. पिछले साल लाखों श्रमिकों ने इस सुविधा का लाभ उठाया था और उनकी समस्याएं सुलझायी गयी थीॆ.
पीड़ित श्रमिक ई-मेल, मोबाइल और वॉट्सऐप के जरिये कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकते हैं. इन कंट्रोल रूम का प्रबंधन संबंधित क्षेत्रों में श्रम प्रवर्तन अधिकारियों, सहायक श्रम आयुक्त, क्षेत्रीय श्रम आयुक्त और उप मुख्य श्रम आयुक्त के पास है. कंट्रोल रूम के कामकाज पर दैनिक आधार पर मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) नजर रखते हैं.



श्रम मंत्रालय के अनुसार कंट्रोल रूम देहरादून, दिल्ली, धनबाद, गुवाहाटी, अहमदाबाद, अजमेर, आसनसोल, बेंगलुरु, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, चेन्नई, कोच्चि, हैदराबाद, जबलपुर, कानपुर,कोलकाता, मुंबई, नागपुर, पटना और रायपुर में कार्यरत हैं.



बता दें प्रवासियों को साल 2020 जैसी स्थिति की आशंका है. उनका कहना है कि लॉकडाउन बढ़ने पर काम और संसाधनों की कमी हो जाएगी. समाचार एजेंसी PTI के अनुसार नेपाल की रहने वाली प्रवासी दैनिक मजदूर गीता कुमारी को आशंका है कि दिल्ली में छह दिनों का लॉकडाउन लगने से पिछले वर्ष जैसी स्थिति हो सकती है और उसके परिवार के पास काम और संसाधनों की जल्द ही कमी हो जाएगी. कौशांबी बस डिपो पर अपने परिवार के साथ महानगर छोड़ने की प्रतीक्षा में बैठी कुमारी ने कहा, ‘‘हमें आशंका है कि यह पिछले वर्ष की तरह नहीं हो जाए. अगर लॉकडाउन बढ़ जाए तो क्या होगा? अगर लंबे के लिए समय निर्माण कार्य बंद हो जाएं तो क्या होगा? तब हम क्या खाएंगे? पिछली बार हमने स्थिति बेहतर होने की प्रतीक्षा की थी, लेकिन अंतत: घर जाना पड़ा था.’’

पिछले वर्ष की तरह मजदूरों की भीड़ देखी जा सकती है

उसने कहा, ‘मेरे परिवार में सात सदस्य हैं, जिसमें बुजुर्ग भी हैं. पिछले बार के लॉकडाउन के दौरान स्थिति खराब होने के बाद हम नेपाल चले गए थे. हम करीब चार-पांच महीने पहले लौटे थे. हम दैनिक मजदूर हैं और वर्तमान हालात के कारण हमारे पास काम नहीं है. हमारे गांव में भी काम नहीं है इसलिए हमें वापस आना पड़ा लेकिन यह निश्चित नहीं है कि कब लॉकडाउन और आगे के लिए बढ़ जाए.’

अंतरराज्यीय बस टर्मिनल पर पिछले वर्ष की तरह मजदूरों की भीड़ देखी जा सकती है, जहां अपने घर लौटने के लिए हजारों की संख्या में मजदूर इकट्ठा हैं. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के हफ्ते भर के लॉकडाउन करने की घोषणा करने और हाथ जोड़कर मजदूरों से दिल्ली नहीं छोड़ने की अपील के कुछ ही घंटे बाद हजारों की संख्या में मजदूर पलायन के लिए बेचैन हो गए. मुख्यमंत्री ने उनसे नहीं जाने की अपील करते हुए कहा था --‘मैं हूं ना.’ मुख्यमंत्री ने मजदूरों से अपील की कि दिल्ली नहीं छोड़ें और कहा कि कम समय का लॉकडाउन आगे बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ सकती है. वर्तमान में लॉकडाउन के दौरान अंतरराज्यीय आवाजाही पर पाबंदियां नहीं हैं.

उत्तर प्रदेश के जौनपुर के रहने वाले चंदन सिरोज ने कहा कि पिछले लॉकडाउन के दौरान वह ट्रक में अपने घर गए थे. सिरोज ने कहा, ‘पिछले वर्ष लॉकडाउन के दौरान हम करीब एक महीने से ज्यादा समय तक फंसे रहे. भोजन कोई मुद्दा नहीं था लेकिन हमें अपनी जिंदगी का भय था. ट्रक से हम जौनपुर पहुंचे.’ उन्होंने कहा, ‘हम करीब दो महीने पहले आए थे. सोमवार को हमने अपने नियोक्ता से कहा कि हम जौनपुर जा रहे हैं और उससे कुछ पैसे मांगे. उसने हम सबको केवल पांच-पांच सौ रुपये दिए. इस वर्ष वैसा नहीं रहेगा. कोई सहायता नहीं करेगा.’



लखनऊ के पास अकबरपुर के रहने वाले धर्मवीर सिंह (24) ने कहा कि घर लौटने के लिए बस की प्रतीक्षा में हूं. दिलशाद गार्डन में ई-रिक्शा चलाने वाले दीपक कुमार ने कहा कि वह अपने गृह नगर अभी नहीं जा रहे हैं, लेकिन कम सवारी मिलने से खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा है.
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