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कोरोना वायरस के खौफ में शख्स ने लगा ली फांसी, परिवारवालों का 'हेल्पलाइन' पर आरोप

कोरोना वायरस के कारण चीन में ही  अकेले 1100 लोगों की मौत हो चुकी है. भारत में भी इसके केस सामने आए हैं. प्रतीकात्मक फोटो

कोरोना वायरस के कारण चीन में ही अकेले 1100 लोगों की मौत हो चुकी है. भारत में भी इसके केस सामने आए हैं. प्रतीकात्मक फोटो

आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) में कोरोना वायरस (Cororna Virus) के खौफ में आत्महत्या करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. एक शख्स के परिवार वालों का आरोप है कि उसने कोरोना वायरस (Corona Virus) के डर से खुद को ही फांसी लगा ली.

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    हैदराबाद. आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) में कोरोना वायरस (Cororna Virus) के खौफ में आत्महत्या करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. एक शख्स के परिवार वालों का आरोप है कि उसने कोरोना वायरस (Corona Virus) के डर से खुद को ही फांसी लगा ली. आत्महत्या करने वाले शख्स का नाम के बालाकृष्णय्या है. ये शख्स आंध्र प्रदेश के चित्तूर के सेशामानायडू का रहने वाला था. उसके परिवार वालों का दावा है कि उनकी हालत दो सप्ताह से खराब थी. इस दौरान उन्होंने सोशल मीडिया (Social Media) पर कोरोना वायरस से जुड़े कुछ वीडियो देखे. कोरोना वायरस के कारण चीन (China) में ही अकेले 1100 लोगों की मौत हो चुकी है. इस समय दुनिया के 20 देशों में कोरोनवायरस पहुंच चुका है.

    परिवार वालों का कहना है कि बालाकृष्णय्या पिछले दिनों तिरुपति (Tirupati) के सरकारी अस्पताल में चैकअप के लिए गए थे. वहां से लौटने के बाद उन्होंने अजीब वर्ताव शुरू कर दिया. मंगलवार को उन्होंने अचानक अपने परिवार को घर में बंद कर दिया और इसके बाद गांव के बाहर जहां उनकी मां का अंतिम संस्कार किया गया था, वहीं पर उन्होंने पेड़ पर खुद को फांसी लगा ली.

    अस्पताल से लौटते ही बदला बालाकृष्णय्या का व्यवहार
    बालाकृष्णय्या के बेटे बालामुरली ने कहा, 'उन्हें पिछले दिनों सर्दी और बुखार की समस्या हुई. इसके बाद वह अस्पताल गए. वहां चैकअप के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें मास्क लगाने की हिदायत देते हुए कहा कि वह संक्रमण दूसरों में न फैलने दें. घर लौटते ही उनका व्यवहार घरवालों के प्रति बदल गया. घरवालों ने उन्हें काफी समझाने का प्रयास किया कि ये संक्रमण कोरोना वायरस का नहीं है, लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी. उन्होंने कोरोना वायरस के संक्रमण से जुड़े कई वीडियो देखे. इसके बाद खुद ही अंदाजा लगा लिया कि उन्हें कोरोना वायरस का संक्रमण है.'

    बालाकृष्णय्या की पत्नी का दावा है, 'उन्होंने कोरोना वायरस के डर से ये कदम उठाया. मेरे बेटे मुरली ने इस बारे में जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर पर फोन भी किया, लेकिन वहां से हमें कोई मदद नहीं मिली. वह अपनी बीमारी से इतने डरे हुए थे कि परिवार वालों को अपने पास भी नहीं आने देते थे.'

    डॉक्टर का दावा-किसी ने नहीं कहा कि कोरोना वायरस का संक्रमण
    तिरुपति में सरकारी हॉस्पिटल के डॉक्टर एनवी रामनय्या ने News18 से बातचीत में बताया, बालाकृष्णय्या को जनवरी के आखिरी सप्ताह में हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. थोड़े दिनों बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया था. वह किडनी और फेंफड़ों की सामान्य समस्या से जूझ रहे थे. बढ़ती उम्र में ऐसी समस्याएं सामान्य हैं. अस्पताल में किसी भी डॉक्टर ने उन्हें ऐसा नहीं कहा कि वह कोरोना वायरस से पीड़ित हैं. हमें संदेह था कि उन्हें टीबी हो सकती है. इसलिए हमने उन्हें मास्क पहनने की सलाह दी थी, जिससे संक्रमण से बचा जा सके.

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