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Viral Fever in Kids: कोरोना के बीच बच्चों में वायरल फीवर का कहर, जानें मासूमों की कैसे करें सुरक्षा

वायरल बुखार के मामले लगातार बढ़ने लगे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

वायरल बुखार के मामले लगातार बढ़ने लगे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Viral Fever in India: आंकड़े बताते हैं कि महज एक महीने में ही इस बुखार के चलते 100 से ज्यादा जानें जा चुकी हैं. इसके अलावा यूपी के कानपुर, प्रयागराज और गाजियाबाद से भी बुखार के मामले सामने आए हैं.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. कोरोना वायरस संकट के बीच देश के कुछ हिस्सों में वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ा है. उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद और मथुरा से लगातार वायरल फीवर के चलते बच्चों की मौत की खबरें आ रही हैं. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, आंकड़े बताते हैं कि महज एक महीने में ही इस बुखार के चलते 100 से ज्यादा जानें जा चुकी हैं. इसके अलावा यूपी के कानपुर, प्रयागराज और गाजियाबाद से भी बुखार के मामले सामने आए हैं. अब समझते हैं कि आखिर यह परेशानी क्या है और क्या यह यूपी तक ही सीमित है?

    हालांकि, बुखार के मामले यूपी तक ही सीमित नहीं हैं. राजधानी दिल्ली, हरियाणा, बिहार, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में भी मरीज मिले हैं. हालांकि, इन राज्यों में अभी तक मौत की खबर सामने नहीं आई है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त से ही बच्चे इंफ्लुएंजा, डेंगू, चिकनगुनिया से लेकर स्क्रब टायफस का शिकार हो रहे हैं. एक्सपर्ट्स इसका बड़ा कारण मानसून को बताते हैं.

    अभी क्यों नजर आ रहे हैं ये मामले
    सामान्य तौर पर यह देखा गया है कि बच्चे एक साल में 6-8 रेस्पिरेटरी इंफेक्शन का शिकार होते हैं. कोविड-19 लॉकडाउन के हटने के बाद बच्चे बाहरी दुनिया के संपर्क में ज्यादा आए हैं और यह भी संक्रमण फैलने की एक वजह हो सकती है. जानकारों के मुताबिक, इसका दूसरा कारण बासी भोजन और गंदा पानी है.

    रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के मधुकर रेन्बो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में वरिष्ठ सलाहकार डॉक्टर अनामिका दुबे कहती हैं, ‘आज ज्यादातर बुखार वायरल हैं, फिर चाहे डेंगू हो या इंफ्लुएंजा. ये बुखार आपको बहुत कमजोर और सुस्त बनाते हैं.’ उन्होंने बताया, ‘इसमें मरीज को शरीर में दर्द होता है. इन बुखारों को केवल सिम्प्टोमैटिक ट्रीटमेंट और बेहतर हाईड्रेशन की जरूरत होती है.’

    द्वारका स्थित आकाश हेल्थकेयर में सलाहकार डॉक्टर मीना जे बताती हैं कि वायरल फ्लू के अलावा हम इस बार डेंगू के मामले भी देख रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘हम हर रोज बच्चों में डेंगू के 3-5 पॉजिटिव मामले रोज देख रहे हैं. बच्चों में बुखार, शरीर दर्द और पेट से जुड़े लक्षणों की शिकायत मिल रही है. इनका पता ब्लड टेस्ट के जरिए किया जा रहा है.’

    अब सवाल, बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या करें
    डॉक्टर मीना जे बताती हैं, ‘सावधानियों के लिए मच्छरों के पैदा होने की जगह को ठीक से संभाला जाना चाहिए और घर में कहीं भी जमा हुआ पानी नहीं होना चाहिए. बच्चे जब भी बाहर जाएं, उनपर मस्कीटो रेपेलेंट्स का इस्तेमाल करें.’ इसे अलावा वे बच्चों को बासी खाना नहीं देने की भी सलाह देती हैं.

    बच्चों को अस्पताल लेकर कब पहुंचे
    दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में वरिष्ठ सलाहकार डॉक्टर धीरेन गुप्ता कहते हैं, ‘कोई भी रहस्यमयी बीमारी या बुखार, जो 3-4 दिन से ज्यादा बना हुआ है. अगर बच्चा 103-104 डिग्री सेल्सिय से ज्यादा बुखार से जूझ रहा है और बुखार नहीं होने की स्थिति में भी बच्चा अगर खाना-पीना नहीं कर रहा है, शरीर में तेज दर्द की शिकायत कर रहा है या शरीर पर लाल चकत्ते दिख रहे हैं या बच्चे की पेशाब कम निकल रही है, तो उसे अस्पताल लाना चाहिए.’

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