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अयोध्या फैसले में पुनर्विचार याचिका दायर करने से हिंदू-मुस्लिम एकता को होगा नुकसान: अल्पसंख्यक आयोग प्रमुख

भाषा
Updated: November 24, 2019, 4:51 PM IST
अयोध्या फैसले में पुनर्विचार याचिका दायर करने से हिंदू-मुस्लिम एकता को होगा नुकसान: अल्पसंख्यक आयोग प्रमुख
एनसीएम अध्यक्ष ने कहा कि फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करना मुस्लिमों के हित में नहीं होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (National Commission for Minorities) के अध्यक्ष गयूरुल हसन रिजवी ने कहा कि मुस्लिमों को अयोध्या (Ayodhya) में मंदिर बनाने में मदद करनी चाहिए जबकि हिंदुओं को मस्जिद के निर्माण में मदद करनी चाहिए.

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नई दिल्ली. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (National Commission for Minorities) के अध्यक्ष गयूरुल हसन रिजवी ने रविवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के अयोध्या (Ayodhya) पर आए फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करना मुस्लिमों के हित में नहीं होगा और इससे दोनों समुदायों के बीच एकता को ‘‘नुकसान’’ पहुंचेगा. अल्पसंख्यक आयोग के प्रमुख ने कहा कि पुनर्विचार याचिका दायर करने से हिंदुओं के बीच ऐसा संदेश जाएगा कि वे राम मंदिर (Ram Mandir) के निर्माण के रास्ते में रोड़े अटका रहे हैं. उन्होंने मुस्लिम पक्ष से मस्जिद के लिए दी गई पांच एकड़ की वैकल्पिक भूमि को स्वीकार करने का भी अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि ऐसा करना न्यायपालिका का सम्मान होगा.

पीटीआई-भाषा को दिए एक साक्षात्कार में रिजवी ने कहा कि एनसीएम ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एक बैठक की थी और उसके सभी सदस्यों ने एक सुर में कहा था कि फैसले को स्वीकार करना चाहिए. एनसीएम अध्यक्ष ने कहा कि मुस्लिमों को अयोध्या में मंदिर बनाने में मदद करनी चाहिए जबकि हिंदुओं को मस्जिद के निर्माण में मदद करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यह दोनों समुदायों के बीच सामाजिक सौहार्द्र को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगा.

हिंदुओं-मुस्लिम एकता को होगा नुकसान
रिजवी के अनुसार, पुनर्विचार याचिका दायर करने से हिंदुओं के बीच यह संदेश जाएगा कि मुस्लिम समुदाय अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की राह में रोड़े अटकाना चाहता है. उन्होंने कहा कि इससे हिंदू-मुस्लिम एकता को ‘‘नुकसान’’ पहुंचेगा.

उन्होंने कहा, ‘‘पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करनी चाहिए क्योंकि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) और जमीयत उलेमा-ए-हिंद समेत सभी पक्षों ने वादा किया था कि उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले का सम्मान किया जाएगा.’’ उन्होंने आरोप लगाया कि एआईएमपीएलबी और जमीयत जैसे मुस्लिम संगठन अपने वादे से मुकर रहे हैं.

100 फीसदी खारिज हो जाएगी याचिका
रिजवी ने पूछा, ‘‘सिर्फ अभी नहीं बल्कि कई वर्षों से वे कह रहे हैं कि वे उच्चतम न्यायालय के फैसले को स्वीकार करेंगे तो फिर पुनर्विचार की क्या जरूरत है?’’ उन्होंने पूछा कि पुनर्विचार याचिका दायर करने का क्या औचित्य है जब वे भी कह रहे हैं कि याचिका ‘‘100 फीसदी’’ खारिज कर दी जाएगी.
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एनसीएम प्रमुख ने कहा, ‘‘इस देश का आम मुस्लिम पुनर्विचार याचिका के पक्ष में नहीं है क्योंकि वह नहीं चाहता कि जो मामले सुलझ गए है उन्हें फिर उठाया जाए और समुदाय ऐसी चीजों में फंसे.’’

रिजवी ने कहा कि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी समेत एआईएमपीएलबी के सिर्फ चार-पांच सदस्य ही पुनर्विचार याचिका के पक्ष में हैं. एनसीएम प्रमुख ने आरोप लगाया कि ओवैसी मुस्लिमों का इस्तेमाल करके राजनीति करते हैं और वह ‘‘उन्हें ऐसे मुद्दों में उलझाए रखना चाहते हैं ताकि उन्हें वोट मिल सकें.’’

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First published: November 24, 2019, 4:21 PM IST
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