• Home
  • »
  • News
  • »
  • nation
  • »
  • राम मंदिर पर कानून लाए केंद्र सरकार, फैसले के लिए हमेशा इंतजार नहीं कर सकते हिंदू: VHP

राम मंदिर पर कानून लाए केंद्र सरकार, फैसले के लिए हमेशा इंतजार नहीं कर सकते हिंदू: VHP

अयोध्या जमीन विवाद की अंतिम सुनवाई से जुड़े ताजा अपडेट्स के लिए बने रहें...

  • News18Hindi
  • | October 29, 2018, 14:54 IST
    LAST UPDATED 4 YEARS AGO
    14:52 (IST)

    राम मंदिर विवाद पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की लाइन पकड़ते हुए विश्व हिंदू परिषद ने भी केंद्र सरकार से कानून बनाने की मांग की है. वीएचपी के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने कहा, “अगर सुप्रीम कोर्ट कुछ कर नहीं पा रहा है तो सरकार को अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए कानून बनाना चाहिए.” उन्होंने कहा कि मंदिर पर फैसले के लिए हिंदू हमेशा इंतजार नहीं कर सकते हैं.

    11:58 (IST)

    अयोध्या राम जन्मभूमि- बाबरी मस्जिद जमीन विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई जनवरी तक के लिए टाल दी है. इस मामले में सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच सुनवाई कर रही है.

    11:18 (IST)

    राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई से पहले केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, "अब हिंदुओं का सब्र टूट रहा है. मुझे भय है कि उनका सब्र टूटा तो क्या होगा."

    11:18 (IST)

    राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई से पहले केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, "अब हिंदुओं का सब्र टूट रहा है. मुझे डर है कि उनका सब्र टूटा तो क्या होगा."

    11:16 (IST)
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो दिन पहले कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह सबरीमाला मामले में निर्णय सुनाया है उसी तरह उसे राम मंदिर मुकदमे में भी फैसला सुनाना चाहिए. राम मंदिर मामले को भारत के लोगों की आस्था का मामला बताते हुए योगी ने कहा कि अयोध्या में मंदिर लोगों के दिलों में बहुत महत्व रखता है. हालांकि योगी ने यह साफ किया कि उनके और उनकी पार्टी भारतीय जनता पार्टी के लिए राम मंदिर निर्माण कोई चुनावी मुद्दा नहीं है.

    11:10 (IST)

    राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में बौद्धों के दावे की भी सुनवाई होगी. बौद्धों के दावे पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका स्वीकार हो गई है. याचिकाकर्ता विनीत कुमार मौर्य ने दावा किया है कि विवादित जमीन पर मंदिर, मस्जिद नहीं, बौद्ध धर्म से जुड़ा ढांचा था. आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) की खुदाई में मिले गोलाकार स्तूप, दीवार और खंभे बौद्ध विहार की विशिष्टता हैं न कि मंदिर या मस्जिद की. याचिकाकर्ता अयोध्या का ही रहने वाला है.

    11:09 (IST)

    शीर्ष अदालत ने 27 सितंबर को 1994 के अपने उस फैसले पर पुनर्विचार के मुद्दे को पांच जजों वाली बेंच को सौंपने से इनकार कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि ‘मस्जिद इस्लाम का अनिवार्य अंग नहीं’ है. यह मुद्दा अयोध्या भूमि विवाद की सुनवाई के दौरान उठा था. शीर्ष अदालत के तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने 2:1 के बहुमत से अपने फैसले में कहा कि अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में दीवानी वाद का निर्णय सबूतों के आधार पर होगा. पहले का फैसला इस मामले में प्रासंगिक नहीं है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने 30 सितंबर, 2010 को 2:1 के बहुमत वाले फैसले में कहा था कि 2.77 एकड़ जमीन को तीनों पक्षों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला में बराबर-बराबर बांट दिया जाए.

    11:08 (IST)

    सुप्रीम कोर्ट में आज से अयोध्या राम मंदिर-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद मामले की सुनवाई होगी. राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि को तीन भागों में बांटने वाले 2010 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ कई याचिकाएं शीर्ष अदालत में दायर की गई हैं. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) रंजन गोगोई और जस्टिस संजय किशन कौल व जस्टिस के एम जोसफ की बेंच इस मामले में दायर अपीलों पर सुनवाई करेगी.

    राम मंदिर विवाद पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की लाइन पकड़ते हुए विश्व हिंदू परिषद ने भी केंद्र सरकार से कानून बनाने की मांग की है. वीएचपी के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने कहा, “अगर सुप्रीम कोर्ट कुछ कर नहीं पा रहा है तो सरकार को अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए कानून बनाना चाहिए.” बता दें कि अयोध्या राम जन्मभूमि- बाबरी मस्जिद जमीन विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई जनवरी तक के लिए टाल दी है. इस मामले में सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच सुनवाई कर रही है. कोर्ट के फैसले से पहले केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा है कि हिंदुओं का सब्र अब टूट रहा है. उन्होंने कहा, "मुझे भय है कि हिंदुओं का सब्र टूट गया तब क्या होगा?"

    राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि को तीन भागों में बांटने वाले 2010 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ कई याचिकाएं शीर्ष अदालत में दायर की गई हैं. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) रंजन गोगोई और जस्टिस संजय किशन कौल व जस्टिस के एम जोसफ की बेंच इस मामले में दायर अपीलों पर सुनवाई करेगी. शीर्ष अदालत ने 27 सितंबर को 1994 के अपने उस फैसले पर पुनर्विचार के मुद्दे को पांच जजों वाली बेंच को सौंपने से इनकार कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि ‘मस्जिद इस्लाम का अनिवार्य अंग नहीं’ है. यह मुद्दा अयोध्या भूमि विवाद की सुनवाई के दौरान उठा था.

     

    अयोध्या जमीन विवाद की अंतिम सुनवाई से जुड़े ताजा अपडेट्स के लिए बने रहें...

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन
    0