राफेल पर जेटली का पलटवार, राहुल को बताया- 'मसखरा शहजादा'

News18Hindi
Updated: September 20, 2018, 8:32 PM IST
राफेल पर जेटली का पलटवार, राहुल को बताया- 'मसखरा शहजादा'
File photo of Finance Minister Arun Jaitley. (Image: PTI)

वित्त मंत्री ने कहा, 'पब्लिक डिस्कोर्स एक गंभीर गतिविधि है, इसे आप गले लगने, आंख मारने या इस तरह से लगातार झूठ बोलने तक सीमित नहीं कर सकते हैं.'

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 20, 2018, 8:32 PM IST
  • Share this:
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राफेल लड़ाकू विमान सौदे और 15 औद्योगिक घरानों का कर्ज माफ करने के बारे में फैलाये जा रहे झूठ को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की कड़ी आलोचना की है. फेसबुक पर एक लेख में जेटली ने कहा है कि एक परिपक्व लोकतंत्र में जो झूठ के सहारे रहते हैं वह सार्वजनिक जीवन के लिये फिट नहीं बैठते हैं. जेटली ने अपने इस लेख का शीर्षक दिया है- ‘मसखरे शहजादे का झूठ.’

जेटली ने अपने पोस्ट में लिखा,' राहुल उस रणनीति पर काम कर रहे हैं जहां एक झूठ बनाकर बार-बार बोला जाता है.'

जेटली ने आगे लिखा, 'राफेल को लेकर मेरे सवालों का राहुल की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है. राफेल और उद्योगपतियों की लोन माफी पर उन्होंने बार-बार झूठ बोला है.'



उन्होंने इसमें लिखा है, ‘आपने राफेल सौदे पर झूठ बोला, आपने बैंकों के एनपीए पर झूठ बोला. तथ्यों को तोड़ने मरोड़ने की आप की प्रवृत्ति से एक वैध प्रश्न खड़ा होता है कि-- क्या ऐसे लोग जिनकी स्वाभाविक वरीयता झूठ फैलाना है क्या वे सार्वजनिक संवाद में शामिल होने लायक हैं?’

जेटली ने आगे कहा है, ‘सार्वजनिक संवाद एक गंभीर विषय है. यह कोई चुटकुलेबाजी की प्रतियोगिता नहीं है. आप इसे गले मिलने, आंख मारने यहा बार बार झूठ बोलने जैसी हरकतों के स्तर तक नहीं ले जा सकते. दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश को इस बारे में गंभीरता के साथ सोचना होगा कि क्या सार्वजनिक बहसों को किसी मसखरे शाहजादे की झूठी बातों से प्रदूषित करने की छूट दी जानी चाहिए.’

वित्त मंत्री ने कहा, ‘परिपक्व लोकतंत्र में जो झूठ पर निर्भर रहते हैं उन्हें सार्वजनिक जीवन के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है. कईयों को सार्वजनिक जीवन से हाथ धोना पड़ा है क्योंकि वह झूठ बोलते हुए पकड़े गए, लेकिन यह नियम राजवंशी पार्टी कांग्रेस जैसे एक बड़े संगठन के ऊपर लागू नहीं होता है.’
Loading...

जेटली ने कहा, ‘राफेल के बारे में जो कुछ भी कहा जा रहा है वह पहला बड़ा झूठ है, जबकि दूसरा झूठ जो बार-बार कहा जा रहा है वह यह कि मोदी सरकार ने 15 उद्योगपतियों का 2.50 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ कर दिया. राहुल गांधी के इस वाक्य में कहा जाना वाला हर शब्द झूठ है.’

जेटली ने बैंकों का कर्ज नहीं लौटाने वाले बड़े कर्जदारों की सूची गिनाते हुये कहा कि भूषण स्टील, एस्सार स्टील सहित 12 कर्जदार हैं जिन्होंने पैसा नहीं लौटाया जबकि पिछली संप्रग सरकार के नेता कह रहे हैं कि 2014 में जब उनकी सरकार थी तब बैंकों का एनपीए मात्र 2.5 लाख करोड़ रुपये था जबकि सच्चाई यह है कि एनपीए को छुपाया गया था.

वित्त मंत्री ने कहा, ‘2015 में रिजर्व बैंक ने बैंकों की संपत्ति गुणवत्ता समीक्षा की थी. इस समीक्षा में जो सामने आया वह यह कि बैंकों का एनपीए वास्तव में 8.96 लाख करोड़ रुपये था. वास्तविक एनपीए को छुपाया गया.’ पिछली संप्रग सरकार ने कोई ऐसा कदम नहीं उठाया जिससे बैंकों के कर्ज की वसूली हो सके या फिर एनपीए कम किया जा सके.

जेटली ने कहा कि 2014- 15 के बाद बैंकों का एनपीए इसलिए नहीं बढ़ा कि ज्यादा कर्ज दिया गया बल्कि इसलिये बढ़ा कि बकाये पर ब्याज का बोझ बढ़ गया. कई डिफॉल्टर कर्जदारों के कर्ज को दूसरी बार पुनर्गठित किया गया ताकि उनका एनपीए छुपा रहे.

किसी भी बैंक से जब कोई कर्ज लिया जाता तो जब तक उस पर मूल, ब्याज किस्त की अदायगी समय से होती रहती है तो उसे ‘सामान्य प्रदर्शन वाला खाता’ कहा जाता है. जैसे ही कर्जदार कर्ज कि किस्त नहीं लौटाता है तो उसमें डिफॉल्ट हो जाता है और 90 दिन तक उस कर्ज खाते में यदि मूल और ब्याज की अदायगी नहीं होती है तो उसे गैर-निष्पादित संपत्ति यानी एनपीए घोषित कर दिया जाता है.

जेटली ने कहा कि संप्रग सरकार के दौरान किसी भी खाते को एनपीए घोषित नहीं किया गया. अब उनकी सरकार दिवाला और कर्ज शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) लेकर आई है, जो कि इस दिशा में प्रभावी कदम उठाया गया.

इस कानून के तहत कर्ज लौटाने में असफल रही कंपनियों से कर्ज वसूली के लिये उनकी नीलामी का प्रावधान है.

इस कानून के बनने के बाद रिजर्व बैंक ने 12 बड़े कर्जदारों की सूची तैयार की जो कर्ज नहीं लौटा पाये हैं. इन सभी कर्जदारों पर बैंकों का तीन लाख रुपये से अधिक का बकाया है. संप्रग सरकार के तहत बैंकों ने इस कर्ज की वसूली के लिये कोई कदम नहीं उठाया. बैंकों का पैसा हड़पने वाले एक भी कर्जदार के खिलाफ बैंकों ने कोई कारवाई नहीं की.

वित्त मंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राजग सरकार ने बैंकों को इस मामले में प्रभावी कदम उठाने के लिये सहारा दिया. बैंक पुराने फंसे कर्ज की वसूली अब कर रहे हैं. बार बार झूठ दोहराने से आप सच्चाई को नहीं बदल सकते हैं.

आईबीसी कानून के तहत पुराने फंसे कर्ज की वसूली के लिये कारवाई शुरू की जा चुकी है. कुछ डिफॉल्टर को दंडित भी किया गया है. इन सभी डिफॉल्टरों को 2014 से पहले की सरकारों के समय कर्ज दिया गया. इस दौरान कइयों की कर्ज सीमा को काफी बढ़ाया गया. ये कर्ज पहले ही डिफॉल्ट बन गये थे लेकिन पुनर्गठन, रोलओवर के नाम पर इनकी वास्तविकता को छुपाया गया.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 20, 2018, 4:39 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...