'लैंडर की लोकेशन से साबित होता है कि ऑर्बिटर शानदार काम कर रहा'

भाषा
Updated: September 9, 2019, 11:10 AM IST
'लैंडर की लोकेशन से साबित होता है कि ऑर्बिटर शानदार काम कर रहा'
अंतरिक्ष विशेषज्ञ लेले ने कहा, "लैंडर विक्रम (Lander Vikram) की स्थिति बिना किसी संदेह के साबित करती है कि ऑर्बिटर बिल्कुल सही तरीके से काम कर रहा है.

अंतरिक्ष विशेषज्ञ अजय लेले (Ajay Lele) ने कहा कि ऑर्बिटर (Orbiter) के काम करने की नियोजित अवधि एक साल से अधिक की है इसलिए वह डेटा भेजता रहेगा, जबकि रोवर केवल एक चंद्रमा दिवस यानी 14 दिन के लिए प्रयोग करने वाला था.

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नई दिल्ली. अंतरिक्ष विशेषज्ञ अजय लेले (Ajay Lele) ने कहा कि इसरो द्वारा रविवार को चंद्रयान 2 (Chandrayaan 2) के विक्रम मॉड्यूल की स्थिति की जानकारी देना नि:संदेह साबित करता है कि ऑर्बिटर (Orbiter) सही से काम कर रहा है. रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान के वरिष्ठ शोधार्थी लेले ने यह भी कहा कि यह महज वक्त की बात थी कि ऑर्बिटर लैंडर विक्रम (Lander Vikram) को कब तक खोज पाता है, लेकिन अब सवाल यह है कि लैंडर किस स्थिति में है.

ऑर्बिटर में लगे कैमरों ने लैंडर की मौजूदगी का पता लगाया
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के प्रमुख के. सिवन ने रविवार को कहा था कि चंद्रयान 2 ऑर्बिटर में लगे कैमरों ने लैंडर की मौजूदगी का पता लगाया. इससे एक दिन पहले ही यह महत्त्वकांक्षी चंद्रमा मिशन योजना के मुताबिक चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग नहीं कर पाया था. सिवन ने कहा था कि लैंडर ने संभवत: हार्ड लैंडिंग की और उसके साथ संपर्क स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं.

प्रेक्षेपण के समय की चंद्रयान 2 की तस्वीर.


अजय लेले ने बताया कि कैसे ऑर्बिटर बढ़िया काम कर रहा है
लेले ने कहा, 'लैंडर विक्रम (Lander Vikram) की स्थिति बिना किसी संदेह के साबित करती है कि ऑर्बिटर बिल्कुल सही तरीके से काम कर रहा है. ऑर्बिटर मिशन का मुख्य हिस्सा था क्योंकि इसे एक साल से ज्यादा वक्त तक काम करना है.' उन्होंने कहा कि ऑर्बिटर के सही ढंग से काम करने से मिशन के 90 से 95 फीसदी लक्ष्य हासिल कर लिए जाएंगे. एक चंद्रमा दिवस पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर होता है.

डेटा से लैंडर की स्थिति का पता लगाया जाएगा
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लेले ने कहा कि ऑर्बिटर के काम करने की नियोजित अवधि एक साल से अधिक की है, इसलिए वह डेटा भेजता रहेगा जबिक रोवर केवल एक चंद्रमा दिवस के लिए प्रयोग करने वाला था. साथ ही उन्होंने कहा कि छवियों एवं संबंधित डेटा के साथ लैंडर की स्थिति का पता लगाना आसान होगा. इसरो के पूर्व वैज्ञानिक एस नांबी नारायणन ने कहा कि अगली चुनौती लैंडर के साथ संपर्क स्थापित करने की है. उन्होंने कहा कि फिर से संपर्क स्थापित करने की संभावना कम है क्योंकि हो सकता है कि लैंडर ने क्रैश लैंडिंग की हो.

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First published: September 9, 2019, 10:44 AM IST
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