रिपोर्ट में दावा- बेंगलुरु की सबसे बड़ी झील में एक बूंद भी साफ पानी नहीं

रिपोर्ट में बताया कि खूबसूरत शहर बेंगलुरु की सबसे बड़ी झील अधिकारियों की अनदेखी की वजह से शहर का सबसे बड़ा सेप्टिक टैंक बन गई है.


Updated: June 14, 2018, 6:28 PM IST
रिपोर्ट में दावा- बेंगलुरु की सबसे बड़ी झील में एक बूंद भी साफ पानी नहीं
बेंगलुरू की बेलंदूर झील में सीवेज के अंधाधुंध बहाव के कारण पर्यावरण आपात स्थिति पैदा हो गई है (Image:PTI)

Updated: June 14, 2018, 6:28 PM IST
बेंगलुरु की बेलंदूर झील में सीवेज के अंधाधुंध बहाव के कारण पर्यावरण आपात स्थिति पैदा हो गई है. झील में साफ पानी का एक बूंद तक नहीं है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की एक कमिटी ने इसके लिए सरकार और सिविक एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराया है.

कमिटी ने बताया कि खूबसूरत शहर बेंगलुरु की सबसे बड़ी झील अधिकारियों की अनदेखी की वजह से शहर का सबसे बड़ा सेप्टिक टैंक बन गई है.

कमिटी का कहना है कि कंस्ट्रक्शन वेस्ट या मलबे, नगरपालिका के ठोस अपशिष्ट को फेंकने से ऐसा हुआ है. पानी में हाइड्रोफाइट और माइक्रोफाइट के भारी निस्तारण के कारण बेलंदूर झील की जल धारण क्षमता तेजी से घट गई है.

रिपोर्ट में बताया गया की झील में एक मिलीलीटर भी साफ पानी नहीं है, यह झील सीवेज, अपशिष्ट, खरपतवार, मलबे आदि से भरा हुआ है.

कमिटी के सदस्यों में सीनियर एडवोकेट राज पंजवानी, एडवोकेट सुमेर सोढ़ी और राहुल चौधरी शामिल हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि बेलंदूर झील में 12 बार आग लग चुकी हैं. आग लगने की पहली घटना 12 अगस्त,  2016 को हुई थी.

कमिटी ने सिफारिश की है कि उचित स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाये जाने चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी कंस्ट्रक्शन वेस्ट और मलबे को झील के बफर जोन क्षेत्र में नहीं फेंका जा सके.

कमिटी ने यह भी कहा है कि मलबे को अवैध रूप से फेंके जाने पर नजर रखा जाए. साथ ही अतिक्रमण गतिविधियों को रोकने के लिए असुरक्षित स्थानों पर सुरक्षा गार्ड की तैनाती की जानी चाहिए.

कमिटी ने कहा, ‘अगर कोई झील या उसके बफर जोन में इस तरह की चीजें फेंकते हुए पाया जाता है, तो उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा.'

(इनपुट भाषा से)

 
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